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3 min read | अपडेटेड May 11, 2026, 15:25 IST
सारांश
वित्त वर्ष 2025 से सरकार ने नई टैक्स रिजीम को पहले से ज्यादा आकर्षक बना दिया है। अब इसमें स्टैंडर्ड डिडक्शन और रिबेट के जरिए 12.75 लाख रुपये तक की सालाना कमाई टैक्स-फ्री हो सकती है। वहीं, जो लोग निवेश और एचआरए का फायदा लेते हैं, उनके लिए पुरानी रिजीम अब भी फायदेमंद है।

नए और पुराने टैक्स सिस्टम के बीच सही अंतर समझकर आप अपनी बड़ी बचत कर सकते हैं। | Image: Shutterstock.
इनकम टैक्स भरने का सीजन शुरू होते ही बहुत से लोग इस उलझन में हैं कि उन्हें पुराने टैक्स सिस्टम में रहना चाहिए या नए सिस्टम में शिफ्ट हो जाना चाहिए। वित्त वर्ष 2025 से सरकार ने नई टैक्स रिजीम को काफी बेहतर और आकर्षक बना दिया है। सरकार का मकसद टैक्स भरने की प्रक्रिया को आसान बनाना और लोगों के हाथों में ज्यादा पैसा छोड़ना है। इसी वजह से नई रिजीम में रिबेट की लिमिट को बढ़ा दिया गया है, जिससे अब 12.75 लाख रुपये तक की सालाना कमाई करने वालों को कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। हालांकि, दोनों ही सिस्टम के अपने-अपने फायदे हैं। यह आपकी कमाई और निवेश पर निर्भर करता है कि आपके लिए क्या सही है।
नई टैक्स रिजीम में अब 4 लाख रुपये तक की सालाना इनकम को टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया है। इससे ज्यादा की कमाई पर स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है, लेकिन खास बात यह है कि यहां टैक्स की दरें पुरानी रिजीम के मुकाबले काफी कम रखी गई हैं। इस सिस्टम में अब 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी जोड़ दिया गया है। इसके अलावा सेक्शन 87A के तहत मिलने वाली रिबेट की वजह से 12.75 लाख रुपये तक कमाने वाले रेजिडेंट इंडिविजुअल्स को प्रभावी रूप से कोई टैक्स नहीं देना पड़ता है। इस रिजीम की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें आपको किसी भी तरह के निवेश का सबूत देने की जरूरत नहीं पड़ती और पेपरवर्क बहुत कम हो जाता है।
अगर आपकी सालाना इनकम 12.75 लाख रुपये से 20 लाख रुपये के बीच है और आप एचआरए या सेक्शन 80सी के तहत कोई बड़ा निवेश नहीं करते हैं, तो नई रिजीम आपके लिए सबसे बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। यह उन लोगों के लिए बहुत अच्छा है जो टैक्स बचाने के लिए अलग से कोई इंवेस्टमेंट नहीं करना चाहते और अपनी पूरी सैलरी का इस्तेमाल अपनी जरूरतों के लिए करना चाहते हैं। इसमें कम टैक्स रेट का सीधा फायदा आपकी इन हैंड सैलरी पर पड़ता है। साथ ही, कंप्लायंस का प्रोसेस आसान होने की वजह से आपको टैक्स फाइल करने में भी ज्यादा माथापच्ची नहीं करनी पड़ती है।
पुराना टैक्स सिस्टम आज भी मौजूद है और यह उन लोगों के लिए बहुत काम का है जो अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा बचत और निवेश में लगाते हैं। पुरानी रिजीम में टैक्स की दरें तो ज्यादा हैं, लेकिन इसमें आपको एचआरए, होम लोन का ब्याज और सेक्शन 80सी व 80डी जैसे कई बड़े डिडक्शन मिलते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपका कुल डिडक्शन साल भर में 3 से 4 लाख रुपये के बीच बैठता है, तो आपके लिए पुरानी रिजीम ही ज्यादा फायदेमंद रहेगी। इसमें मिलने वाली छूट आपकी टैक्सेबल इनकम को काफी हद तक कम कर देती है, जिससे आपका टैक्स कम हो जाता है।
पुरानी रिजीम में 50,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी लागू होता है। ऐसे लोग जिनकी सालाना इनकम 20 लाख रुपये या उससे ज्यादा है और जिनके पास होम लोन या लाइफ इंश्योरेंस जैसे भारी निवेश हैं, वे पुरानी रिजीम में रहकर ज्यादा बचत कर सकते हैं।
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