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IPO Update: आज बंद हो रहे सनशाइन पिक्चर्स और शंकेश ज्वेलर्स के आईपीओ को कितना मिला सब्सक्रिप्शन? जानें पूरी डीटेल

विकास तिवारी

4 min read | अपडेटेड August 20, 2026, 10:19 IST

सारांश

शेयर बाजार में आज दो कंपनियों सनशाइन पिक्चर्स और शंकेश ज्वेलर्स के आईपीओ में पैसा लगाने का आखिरी मौका है। 19 अगस्त तक सनशाइन पिक्चर्स का आईपीओ 18.47 गुना भर चुका है, जिसमें रिटेल और एनआईआई कैटेगरी का दबदबा है।

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सनशाइन पिक्चर्स और शंकेश ज्वेलर्स के आईपीओ आज सब्सक्रिप्शन के लिए बंद हो रहे हैं।

भारतीय शेयर बाजार के प्राइमरी मार्केट में आज दो कंपनियों के आईपीओ में दांव लगाने की आखिरी तारीख है। इनमें से एक आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पांस मिल रहा है, तो दूसरा सुस्त रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। बॉलीवुड फिल्में और शो बनाने वाली कंपनी सनशाइन पिक्चर्स के आईपीओ को रिटेल और एनआईआई कैटेगरी में बंपर बोलियां मिली हैं। दूसरी ओर गोल्ड ज्वेलरी का कारोबार करने वाली शंकेश ज्वेलर्स का आईपीओ अभी तक पूरी तरह से भर भी नहीं पाया है। अगर आप आज आखिरी दिन इन दोनों में से किसी भी आईपीओ में पैसा लगाने का विचार कर रहे हैं, तो दोनों का सब्सक्रिप्शन स्टेटस, बिजनेस मॉडल और रिस्क फैक्टर्स अच्छे से समझ लें।

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सनशाइन पिक्चर्स आईपीओ में बंपर बोलियां

सनशाइन पिक्चर्स के आईपीओ में दूसरे दिन की शाम तक निवेशकों ने काफी दिलचस्पी दिखाई है। 19 अगस्त की शाम तक के आंकड़ों के मुताबिक यह इश्यू कुल 18.47 गुना भर चुका है। इसमें सबसे ज्यादा तेजी नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स यानी एनआईआई की तरफ से देखने को मिली है, जिनका हिस्सा 35.59 गुना सब्सक्राइब हुआ है। इसके अलावा रिटेल इन्वेस्टर्स की कैटेगरी में भी 21.61 गुना बोलियां दर्ज की गई हैं। हालांकि क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी क्यूआईबी हिस्से में अभी तक केवल 0.14 गुना ही सब्सक्रिप्शन आया है। आज आखिरी दिन इस हिस्से में बड़ी बोलियों की उम्मीद की जा रही है।

सनशाइन पिक्चर्स का बिजनेस और रिस्क

सनशाइन पिक्चर्स देश की जानी मानी एंटरटेनमेंट और फिल्म प्रोडक्शन कंपनी है। यह कंपनी बॉलीवुड फिल्में, टीवी शो और वेब सीरीज तैयार करने का काम करती है। कंपनी ने द केरल स्टोरी, कमांडो और हॉलिडे जैसी कई चर्चित फिल्में बनाई हैं। इसका बिजनेस मॉडल खुद फिल्में बनाने के साथ बड़े बैनर के साथ मिलकर काम करने पर आधारित है। हालांकि इसके बिजनेस में रिस्क भी बना रहता है। अगर बनाई गई फिल्म या शो दर्शकों को पसंद नहीं आता है और बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो जाता है, तो इससे कंपनी के रेवेन्यू और नेट प्रॉफिट पर सीधा असर पड़ता है। इसके अलावा ओटीटी और डिजिटल राइट्स की अनिश्चितता भी फ्यूचर के लिए बड़ा रिस्क है।

शंकेश ज्वेलर्स आईपीओ का सुस्त हाल

शंकेश ज्वेलर्स के आईपीओ में दूसरे दिन तक निवेशकों का रुझान काफी सुस्त नजर आया है। 19 अगस्त की शाम तक यह आईपीओ कुल मिलाकर केवल 0.94 गुना ही भर पाया है। कैटेगरी के हिसाब से देखें तो रिटेल इन्वेस्टर्स का हिस्सा 1.13 गुना सब्सक्राइब हो चुका है। वहीं एनआईआई कैटेगरी में 0.76 गुना और क्यूआईबी कैटेगरी में भी 0.76 गुना ही बोलियां मिली हैं। कंपनी का आईपीओ पूरी तरह भरने के लिए आज आखिरी दिन बड़े संस्थागत निवेशकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी।

शंकेश ज्वेलर्स का बिजनेस और रिस्क

शंकेश ज्वेलर्स मुख्य रूप से 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के गहनों के व्यापार से जुड़ी कंपनी है। यह कंपनी खुद मैन्युफैक्चरिंग नहीं करती बल्कि बाहरी कारीगरों और जॉब वर्कर से गहने बनवाकर बेचती है। इसका बिजनेस मॉडल एसेट लाइट है और यह जोयालुक्कास व कल्याण ज्वेलर्स जैसे बड़े ब्रांड्स को सप्लाई करती है। रिस्क फैक्टर्स की बात करें तो कंपनी पूरी तरह से तीसरे पक्ष के कारीगरों पर निर्भर है। कारीगरों की तरफ से देरी होने पर ऑपरेशन प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा कंपनी पर कर्ज का बोझ भी है और वर्किंग कैपिटल की ज्यादा जरूरत के कारण इसका कैश फ्लो भी नेगेटिव रहा है, जो फ्यूचर के लिए चिंता का विषय है।

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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