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  1. अरब से अमेरिका तक अरबों का कारोबार करता है बिहार का ये सुपरफुड, किसानों की होती है बंपर कमाई

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अरब से अमेरिका तक अरबों का कारोबार करता है बिहार का ये सुपरफुड, किसानों की होती है बंपर कमाई

विकास तिवारी

3 min read | अपडेटेड August 19, 2026, 14:41 IST

सारांश

भारत का मखाना सेक्टर तेजी से बढ़कर ग्लोबल सुपरफूड बन चुका है। पूरी दुनिया के 80 से 85% मखाने की सप्लाई अकेले बिहार से होती है। साल 2025-26 में भारत ने 7,264.89 मीट्रिक टन मखाना उत्पाद एक्सपोर्ट किए हैं। सरकार की योजनाओं और बढ़ती डिमांड से किसानों की कमाई में बंपर इजाफा हो रहा है।

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बिहार से लेकर वैश्विक बाजारों तक भारत के मखाना सेक्टर में देखी जा रही है रिकॉर्ड ग्रोथ।

भारत का मखाना सेक्टर आज देश के पारंपरिक खान-पान से निकलकर दुनिया भर में एक सुपरफूड के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और पौष्टिक स्नैक्स की मांग ने मखाने को एक प्रीमियम प्रोडक्ट बना दिया है। भारत इस समय दुनिया का सबसे बड़ा मखाना उत्पादक देश है। देश के कुल उत्पादन का लगभग तीन-चौथाई और दुनिया की कुल सप्लाई का 80 से 85% हिस्सा अकेले बिहार से आता है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 19,296.08 लाख रुपये की वैल्यू का 7,264.89 मीट्रिक टन मखाना एक्सपोर्ट किया है।

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बिहार बना मखाना उत्पादन का मुख्य केंद्र

मखाने की खेती मुख्य रूप से तालाबों, झीलों और उथले पानी वाले क्षेत्रों में की जाती है। बिहार मखाना उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र है, जहां के कोसी बेसिन वाले जिलों सुपौल, सहरसा और मधेपुरा के साथ-साथ मिथिला और सीमांचल क्षेत्रों में इसकी व्यापक खेती होती है। पीआईबी की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल मखाना उत्पादन 80,590 मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जिसमें अकेले बिहार का योगदान 60,000 मीट्रिक टन है। बिहार के कटिहार जिले में सबसे अधिक 12,620 मीट्रिक टन और पूर्णिया में 11,228 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ है। मिथिला मखाना को जीआई टैग भी मिला है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में इसकी एक अलग पहचान बनी है।

घरेलू बाजार में सेहतमंद स्नैक्स की मांग बढ़ने से मखाने की कीमतों में भारी तेजी देखी गई है। साल 2020 से 2022 के दौरान जो मखाना औसतन 500 रुपये प्रति किलो बिकता था, उसकी कीमत साल 2025 में बढ़कर लगभग 1,250 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। अनुमान है कि 2029-30 तक देश का मखाना बाजार 11,000 से 12,000 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच जाएगा। भारत में हर महीने 3,000 से 3,500 मीट्रिक टन मखाने की घरेलू खपत होती है, जो त्योहारों के सीजन में बढ़कर 5,000 मीट्रिक टन तक हो जाती है। इसमें से ब्रांडेड एफएमसीजी कंपनियां हर महीने 1,800 से 2,000 मीट्रिक टन मखाना बेचती हैं।

एक्सपोर्ट मार्केट में भारत का दबदबा

साल 2025 में सरकार ने मखाने के लिए एक अलग एचएसएन कोड पेश किया, जिससे इसके सटीक एक्सपोर्ट आंकड़े सामने आने लगे हैं। भारत के कुल मखाना एक्सपोर्ट का 77% हिस्सा केवल तीन देशों अमेरिका (40%), कनाडा (20%) और यूएई (17%) में जाता है। हालांकि जर्मनी, नेपाल और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रीमियम मार्केट में मखाने की बहुत ज्यादा कीमत मिलती है। उदाहरण के लिए जर्मनी में भारत का मखाना 26 डॉलर प्रति किलो के भाव पर बिकता है, जबकि अमेरिका में इसका औसत दाम 19.5 डॉलर प्रति किलो है।

सरकार भी चला रही खास योजना

मखाने के विकास के लिए केंद्र सरकार ने बजट 2025-26 में नेशनल मखाना बोर्ड के गठन का ऐलान किया था, जिसे 15 सितंबर 2025 को बिहार में शुरू किया गया। इसके अलावा 2025-26 से 2030-31 के लिए 476.03 करोड़ रुपये की केंद्रीय योजना को मंजूरी दी गई है। पोषण के लिहाज से मखाना प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, आयरन और पोटेशियम से भरपूर होता है। इसमें केवल 0.33 ग्राम फैट प्रति 100 ग्राम होता है। यह डायबिटीज और दिल के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। स्वर्ण वैदेही और सबौर मखाना-1 जैसी नई किस्मों से किसानों की पैदावार और कमाई दोनों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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