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IPO Last Day: ललिता ज्वेलरी पर टूटा निवेशकों का दिल, होराइजन में सुस्ती, यहां समझें रिस्क फैक्टर

विकास तिवारी

3 min read | अपडेटेड August 19, 2026, 10:53 IST

सारांश

ललिता ज्वेलरी और होराइजन इंडस्ट्रियल पार्क के आईपीओ में पैसा लगाने का आज आखिरी मौका है। दूसरे दिन तक ललिता ज्वेलरी को निवेशकों का शानदार सपोर्ट मिला और यह 3.25 गुना सब्सक्राइब हो चुका है। वहीं दूसरी तरफ होराइजन इंडस्ट्रियल पार्क का आईपीओ केवल 0.25% ही भर पाया है।

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ललिता ज्वेलरी और होराइजन इंडस्ट्रियल पार्क आईपीओ का आज आखिरी दिन।

शेयर मार्केट में आज दो कंपनियों के आईपीओ बंद हो रहे हैं। इनमें ललिता ज्वेलरी मार्ट और होराइजन इंडस्ट्रियल पार्क शामिल हैं। दोनों ही कंपनियों में निवेशक आज शाम तक दांव लगा सकते हैं। दूसरे दिन के सब्सक्रिप्शन आंकड़ों को देखें तो निवेशकों का रिस्पॉन्स दोनों आईपीओ में काफी अलग देखने को मिला है। एक तरफ जहां ललिता ज्वेलरी के शेयर खरीदने के लिए निवेशकों में होड़ देखने को मिली, वहीं दूसरी तरफ होराइजन इंडस्ट्रियल पार्क के इश्यू को काफी सुस्त रिस्पॉन्स मिला है। आइए जानते हैं कि दोनों इश्यू में अब तक कितना दांव लगा है और कंपनियों की स्थिति कैसी है।

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सब्सक्रिप्शन स्टेटस का हाल

दूसरे दिन की बिडिंग खत्म होने तक ललिता ज्वेलरी का आईपीओ कुल 3.25 गुना सब्सक्राइब हो चुका है। इसमें रिटेल कैटेगरी में 2.96 गुना सब्सक्रिप्शन मिला है। एनआईआई कैटेगरी में निवेशकों ने सबसे ज्यादा दिलचस्पी दिखाई और यह हिस्सा 6.84 गुना भरा गया है। वहीं QIB कैटेगरी में इश्यू को 1.08 गुना सब्सक्रिप्शन मिला है। इसके उलट होराइजन इंडस्ट्रियल पार्क का आईपीओ दूसरे दिन तक केवल 0.25 गुना यानी 25% ही भर पाया है। इस इश्यू में रिटेल निवेशकों का हिस्सा 0.46 गुना, QIB का हिस्सा 0.22 गुना और NII का हिस्सा सिर्फ 0.16 गुना ही सब्सक्राइब हुआ है।

कंपनियों का बिजनेस और कमाई

ललिता ज्वेलरी दक्षिण भारत की एक बड़ी ज्वेलरी रिटेल कंपनी है। यह कंपनी सोने, चांदी और हीरे के गहनों का बिजनेस करती है। कंपनी का नेट प्रॉफिट और ऑपरेशन से रेवेन्यू लगातार मजबूत बना हुआ है। दूसरी ओर होराइजन इंडस्ट्रियल पार्क लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल पार्क्स के डेवलपमेंट और किराए पर देने का काम करती है। इसका मुख्य बिजनेस वेयरहाउसिंग और इंडस्ट्रियल एसेट्स को मैनेज करना है। इस कंपनी की कमाई का मुख्य जरिया किराए से आने वाला रेवेन्यू और ऑपरेशन से मिलने वाली इनकम है। कंसोलिडेटेड स्तर पर कंपनी अपने नेटवर्क का विस्तार कर रही है।

आईपीओ से जुटाए पैसों का इस्तेमाल

दोनों कंपनियां आईपीओ के जरिए जुटाए जाने वाले फंड का इस्तेमाल अपने बिजनेस को बढ़ाने में करेंगी। ललिता ज्वेलरी इस पैसे का इस्तेमाल नए शोरूम खोलने, इन्वेंट्री खरीदने यानी वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और कुछ कर्ज चुकाने के लिए करेगी। वहीं होराइजन इंडस्ट्रियल पार्क आईपीओ के फंड का इस्तेमाल नए इंडस्ट्रियल पार्क्स के डेवलपमेंट, कंपनी के पुराने कर्ज को चुकाने और सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों को पूरा करने के लिए करने वाली है। इससे कंपनियों को अपने फ्यूचर प्लान्स का इंप्लिमेंटेशन करने में काफी मदद मिलेगी।

क्या है रिस्क फैक्टर?

निवेश करने से पहले दोनों कंपनियों से जुड़े रिस्क फैक्टर को समझना बहुत जरूरी है। ललिता ज्वेलरी के बिजनेस में सोने की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव सबसे बड़ा रिस्क है। इसके अलावा ज्वेलरी मार्केट में मुकाबला बहुत ज्यादा है। वहीं होराइजन इंडस्ट्रियल पार्क के लिए रियल एस्टेट मार्केट के हालात और बड़े किरायेदारों पर निर्भरता मुख्य रिस्क फैक्टर हैं। अगर किराएदार लंबे समय तक एग्रीमेंट नहीं बढ़ाते हैं तो कंपनी के ऑपरेशनल परफॉर्मेंस और रेवेन्यू पर सीधा असर पड़ सकता है। इसलिए निवेशकों को अपनी समझ और रिस्क क्षमता के हिसाब से ही कोई फैसला लेना चाहिए।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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