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  1. सरकार का एक फैसला और रॉकेट हुए सुगर स्टॉक्स, समझिए चीनी कंपनियों को ऐसा क्या होने वाला है फायदा?

मार्केट न्यूज़

सरकार का एक फैसला और रॉकेट हुए सुगर स्टॉक्स, समझिए चीनी कंपनियों को ऐसा क्या होने वाला है फायदा?

विकास तिवारी

4 min read | अपडेटेड August 20, 2026, 11:02 IST

सारांश

देश में चीनी की रिकॉर्ड बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकार ने डीलरों के लिए स्टॉक रखने की सीमा तय कर दी है। इस फैसले के बाद 20 अगस्त को चीनी कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। बजाज हिंदुस्तान, धामपुर शुगर और द्वारिकेश शुगर जैसे शेयरों में 6% तक का उछाल आया।

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सरकार के नए नियमों और बढ़ती कीमतों के कारण गुरुवार को चीनी कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली।

तीज त्योहारों के सीजन से ठीक पहले देश में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। बाजार में बढ़ती कीमतों को कंट्रोल करने के लिए सरकार ने डीलरों पर चीनी का स्टॉक रखने के नियमों को काफी सख्त कर दिया है। सरकार के इस कदम के बीच 20 अगस्त को चीनी कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। शेयर बाजार में ट्रेडिंग के दौरान बजाज हिंदुस्तान 5.3%, धामपुर शुगर 6%, द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज 6.3%, श्री रेणुका शुगर्स 4% और बलरामपुर चीनी मिल्स का शेयर 3% तक चढ़ गया।

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स्टॉकहोल्डिंग के लिए बनाए गए नए नियम

सरकार द्वारा जारी संशोधित नियमों के अनुसार, महीने में 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी खरीदने वाले डीलरों को अब अधिकतम 15 दिनों तक ही अपना स्टॉक रखने की अनुमति होगी। यह नया नियम 1 सितंबर से लागू होकर 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगा। इस पूरी अवधि के दौरान सरकार हर महीने चीनी की बिक्री पर कड़ी नजर रखेगी। सरकार का मुख्य मकसद त्योहारों के दौरान बाजार में चीनी की सप्लाई को बनाए रखना है ताकि जमाखोरी और बेवजह की किल्लत को रोका जा सके।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे चीनी के दाम

देश के प्रमुख थोक बाजारों में चीनी की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। कानपुर और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों में थोक चीनी का भाव 6,000 रुपये प्रति क्विंटल के पार चला गया है। वहीं मुजफ्फरपुर और कोल्हापुर बेल्ट में औसत भाव 5,000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर दर्ज किए गए हैं। ऑल इंडिया लेवल पर चीनी का एक्स-मिल भाव बढ़कर 5,400 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है, जो बीते साल इसी समय 3,900 रुपये प्रति क्विंटल था। वहीं 18 अगस्त को रिटेल मार्केट में भी चीनी का भाव 13% बढ़कर 52.30 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया।

सप्लाई को लेकर गहराती चिंताएं

1 अक्टूबर से शुरू होने जा रहे नए चीनी सीजन 2026-27 के लिए चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, नए सीजन में शुरुआती स्टॉक केवल 40 से 42 लाख टन रहने की उम्मीद है, जबकि कुछ दूसरे अनुमानों में इसके 32 से 35 लाख टन रहने की बात कही गई है। इसके मुकाबले देश में सालाना घरेलू जरूरत लगभग 50 लाख टन की है। इसके अलावा कई इलाकों में कम बारिश और सूखे मौसम के कारण गन्ने के उत्पादन पर असर पड़ा है, जिससे सप्लाई का दबाव और बढ़ गया है।

एसबीआई सिक्योरिटीज के फंडामेंटल रिसर्च हेड सन्नी अग्रवाल का कहना है कि मांग और सप्लाई के बीच के अंतर से चीनी के दाम मजबूत हुए हैं, जो चीनी मिलों के लिए काफी पॉजिटिव है। मिलों के पास लगभग 37 रुपये प्रति किलो के कम दाम पर खरीदा गया पुराना स्टॉक मौजूद है, जबकि इस समय उत्तर प्रदेश में एक्स-फैक्ट्री रेट 54 से 55 रुपये और महाराष्ट्र में 46 रुपये प्रति किलो चल रहा है। इससे मिलों का मार्जिन बढ़ेगा और बीते तीन सालों से कीमतें न बढ़ने के कारण इथेनॉल डिविजन के मार्जिन पर पड़ रहे दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। इस सेक्टर में बलरामपुर चीनी, त्रिवेणी इंजीनियरिंग और ईआईडी पैरी पसंदीदा शेयर हैं। हालांकि, सरकार द्वारा 10 लाख टन कच्ची चीनी के बिना ड्यूटी आयात की अनुमति देने के फैसले से कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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