return to news
  1. भारत बनाएगा 100 नए Merchant Vessels, Cochin Shipyard समेत कई शेयरों में दिखी तेजी

मार्केट न्यूज़

भारत बनाएगा 100 नए Merchant Vessels, Cochin Shipyard समेत कई शेयरों में दिखी तेजी

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड August 26, 2026, 11:45 IST

सारांश

मर्चेंट वेसल ऐसे व्यावसायिक जहाज होते हैं जो समूद्र के रास्ते सामान या यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाते हैं। इसलिए 100 नए जहाज जोड़ने का मतलब भारतीय स्वामित्व वाले 100 अतिरिक्त व्यावसायिक जहाज तैयार करना है।

Stock Market

सरकार का कहना है कि इस योजना का लक्ष्य भारत के विदेशी फ्रेट बिल को कम करना है।

भारत सरकार के एक फैसले के बाद शिपिंग कंपनियों के शेयर फोकस में आ गए हैं। दरअसल, सरकार की अगले 5 साल में भारत के मर्चेंट फ्लीट में 100 नए जहाज जोड़ने की योजना है। केंद्रीय मंत्री र्बानंद सोनोवाल ने मंगलवार को बताया कि इस योजना का लक्ष्य भारत के विदेशी फ्रेट बिल को कम करना है। सरकार का अनुमान है कि इससे करीब 75 अरब डॉलर के फ्रेट खर्च को बचाने में मदद मिल सकती है। फिलहाल भारत के मर्चेंट फ्लीट में करीब 1600 समूद्री जहाज हैं।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

इन शेयरों में दिखी तेजी

सरकार के फैसले के बाद कई शिपिंग कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की नजर बनी हुई है। आज Garden Reach Shipbuilders & Engineers का शेयर 1.25 फीसदी बढ़कर 2642 रुपये के भाव पर पहुंच गया है। इसके अलावा Mazagon Dock Shipbuilders, Shipping Corporation of India और Cochin Shipyard में भी करीब 1 फीसदी तक की तेजी है। हालांकि, Great Eastern Shipping Company के शेयरों में गिरावट नजर आ रही है।

क्या है सरकार का प्लान

यह योजना नेशनल शिपिंग बोर्ड के पहले 'सागर संवाद' कार्यक्रम में चर्चा किए गए रोडमैप का हिस्सा है। सरकार का लक्ष्य भारतीय झंडे वाले जहाजों को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाना और भारत को 2047 तक दुनिया के टॉप 5 जहाज मालिक देशों में शामिल करना है। मर्चेंट वेसल ऐसे व्यावसायिक जहाज होते हैं जो समूद्र के रास्ते सामान या यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाते हैं। इसलिए 100 नए जहाज जोड़ने का मतलब भारतीय स्वामित्व वाले 100 अतिरिक्त व्यावसायिक जहाज तैयार करना है।

भारतीय जहाज चलाना अभी महंगा

कार्यक्रम में एक्सपर्ट्स ने बताया कि भारतीय झंडे के तहत जहाज चलाना विदेशी झंडे वाले जहाजों की तुलना में करीब 16-20% महंगा है। इसके पीछे जहाजों के आयात और रखरखाव पर टैक्स, समुद्री कर्मचारियों की सैलरी पर टैक्स, फ्रेट पर टैक्स और भारत में ज्यादा पूंजी लागत जैसी वजहें बताई गईं।

सरकार का फोकस सिर्फ जहाजों की संख्या बढ़ाने पर नहीं है। सोनोवाल ने कहा कि समुद्री क्षेत्र भारत के युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा स्रोत बन सकता है। सरकार स्किल ट्रेनिंग बढ़ाने, रोजगार के अवसर बनाने और शिपबिल्डिंग जैसे नए क्षेत्रों के लिए कर्मचारियों को तैयार करने पर भी काम कर रही है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

अगला लेख