मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड September 18, 2026, 15:18 IST
सारांश
बैंक ऑफ जापान ने महंगाई को 2% के टारगेट से ऊपर जाने से रोकने के लिए ब्याज दरों को 1% से बढ़ाकर 31 साल के रिकॉर्ड स्तर 1.25% कर दिया है। दो दिवसीय पॉलिसी मीटिंग में 7-2 के बहुमत से यह फैसला लिया गया। इस फैसले के बाद एशियाई बाजारों में तेजी दिखी।

Bank of Japan ने ब्याज दर में बढ़ोतरी की है।
ग्लोबल मार्केट में जारी उतार-चढ़ाव और बढ़ती महंगाई के बीच बैंक ऑफ जापान ने एक बड़ा कदम उठाया है। सेंट्रल बैंक ने शुक्रवार को अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी करते हुए इन्हें 31 साल के रिकॉर्ड स्तर 1.25% पर पहुंचा दिया है। बैंक ऑफ जापान का यह फैसला बाजार की उम्मीदों के मुताबिक ही है, जिसका मुख्य उद्देश्य महंगाई को अपने 2% के तय टारगेट से ऊपर जाने से रोकना है। बैंक ऑफ जापान की दो दिनों तक चली पॉलिसी मीटिंग शुक्रवार को समाप्त हुई, जिसमें बोर्ड के मेंबर्स ने बहुमत के साथ ब्याज दरों को 1% से बढ़ाकर 1.25% करने के पक्ष में वोट दिया।
बैंक ऑफ जापान के बोर्ड में इस फैसले को लेकर 7-2 के बहुमत से मंजूरी दी गई। मीटिंग के दौरान बोर्ड मेंबर तोइचिरो असादा और अयानो सातो ने ब्याज दरें बढ़ाने के इस फैसले का विरोध किया और अपनी असहमति जताई। इस बड़े फैसले के बाद बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काजुओ उएदा दोपहर 3:30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सेंट्रल बैंक के इस कदम की वजह और आगे की योजना के बारे में जानकारी देने वाले हैं। बैंक ऑफ जापान लंबे समय से अपनी ढीली मॉनेटरी पॉलिसी के लिए जाना जाता था, लेकिन इस नए फैसले से साफ है कि उसने अपनी पुरानी छवि को पूरी तरह से बदल दिया है।
जापान में ब्याज दरों में हुई इस ताजा बढ़ोतरी ने एक नया इतिहास रच दिया है। यह पहली बार है जब बैंक ऑफ जापान, अमेरिकी फेडरल रिजर्व और यूरोपियन सेंट्रल बैंक तीनों प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने एक ही महीने के भीतर अपनी उधारी लागत यानी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। इन तीनों बड़े बैंकों के एक साथ कदम उठाने से यह साफ जाहिर होता है कि दुनिया भर में महंगाई को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक कितने गंभीर हैं। बैंक ऑफ जापान का यह रुख दिखाता है कि वह अब अपने पुराने ढर्रे से बहुत दूर निकल आया है।
बैंक ऑफ जापान के इस फैसले का असर ग्लोबल और एशियाई बाजारों पर भी देखने को मिला है। शुक्रवार को एशियाई शेयरों में तेजी दर्ज की गई, जबकि अमेरिकी डॉलर भी अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखने में कामयाब रहा। बैंक ऑफ जापान के इस फैसले से उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले असर को लेकर सेबी रजिस्टर्ड मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि इसका शॉर्ट टर्म में पॉजिटिव असर देखने को मिलेगा। एक्सपर्ट के मुताबिक, अमेरिका के बॉन्ड्स और अमेरिकी डॉलर पर पड़ने वाले दबाव की वजह से उभरती अर्थव्यवस्थाओं को शुरुआती दौर में राहत और फायदा मिल सकता है।
दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा मॉनेटरी पॉलिसी में किए जा रहे इस बड़े बदलाव के पीछे ग्लोबल लेवल पर बना तनाव भी एक मुख्य वजह है। मिडिल ईस्ट में पिछले छह महीने से ज्यादा समय से जारी युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। कच्चे तेल के लगातार ऊंचे दामों की वजह से दुनिया भर में महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है। यही वजह है कि केंद्रीय बैंकों को मजबूरन अपनी ब्याज दरों में इजाफा करना पड़ रहा है।
बैंक ऑफ जापान द्वारा ब्याज दरें 1.25% किए जाने के तुरंत बाद जापानी करेंसी यानी येन में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.5% की हल्की कमजोरी देखी गई और यह 156.75 प्रति अमेरिकी डॉलर के स्तर पर आ गया। हालांकि, इस मामूली गिरावट के बावजूद मौजूदा महीने में येन में कुल मिलाकर लगभग 2% की मजबूती दर्ज की गई है। सेंट्रल बैंक के इस कदम से आने वाले दिनों में ग्लोबल मनी फ्लो और करेंसी मार्केट पर व्यापक असर देखने को मिल सकता है।
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