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PM Surya Sarovar Yojana को कैबिनेट की मंजूरी, जानें क्या है यह योजना और किन शेयरों पर रहेगी नजर

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड August 03, 2026, 12:53 IST

सारांश

PM Surya Sarovar Yojana: इस योजना के तहत 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर क्षमता विकसित की जाएगी। इसके साथ 10,000 MWh एनर्जी स्टोरेज सिस्टम भी लगाए जाएंगे, ताकि सौर ऊर्जा को जरूरत के समय इस्तेमाल किया जा सके।

PM Surya Sarovar Yojana

PM Surya Sarovar Yojana: सरकार का कहना है कि इस योजना का लाभ सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलेगा। (Image: BHEL Website)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) को मंजूरी दी है। इस योजना पर 5,070 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका मकसद देशभर के जलाशयों और अन्य अंदरूनी जल निकायों पर फ्लोटिंग सोलर पावर प्रोजेक्ट्स लगाकर स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना है। सरकार के अनुसार यह योजना हर साल करीब 1 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम करने में मदद करेगी।

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किन कंपनियों को हो सकता है फायदा?

सरकार के इस कदम से सोलर EPC, फ्लोटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, रिन्यूएबल पावर जेनरेशन और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों को फायदा होने की उम्मीद जताई जा रही है। इन सेक्टर्स में Tata Power, BHEL और Waaree Energies जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। बता दें कि हाल ही में BHEL ने तेलंगाना के NTPC रामागुंडम में भारत का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्लांट शुरू किया है।

क्या है योजना का लक्ष्य?

इस योजना के तहत 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर क्षमता विकसित की जाएगी। इसके साथ 10,000 MWh एनर्जी स्टोरेज सिस्टम भी लगाए जाएंगे, ताकि सौर ऊर्जा को जरूरत के समय इस्तेमाल किया जा सके। सरकार वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच इन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देगी, जबकि वित्तीय सहायता 2032-33 तक दी जाएगी।

डेवलपर्स को मिलेगी आर्थिक मदद

सरकार सफलतापूर्वक परियोजना पूरी होने पर पात्र परियोजनाओं को प्रति मेगावाट 1 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) देगी। इसके अलावा, परियोजना शुरू करने से पहले होने वाले सर्वे, पर्यावरण आकलन और अन्य जरूरी अध्ययन के लिए प्रति परियोजना 50 लाख रुपये तक की मदद भी दी जाएगी।

सभी राज्यों को होगा फायदा

सरकार का कहना है कि इस योजना का लाभ सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलेगा। अभी देश में फ्लोटिंग सोलर की क्षमता करीब 700 मेगावाट है। जलाशयों और औद्योगिक तालाबों का उपयोग होने से सोलर परियोजनाओं के लिए जमीन की जरूरत भी कम होगी।

रोजगार और पर्यावरण को मिलेगा बढ़ावा

इससे 16,000 से 17,000 लोगों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इसके अलावा, Floating Platforms, Solar Cells, Modules और Energy Storage Systems जैसे उपकरणों के घरेलू निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती मिलेगी।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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