मार्केट न्यूज़
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3 min read | अपडेटेड September 25, 2026, 15:08 IST
सारांश
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को एक्सचेंज ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव्स में ज्यादा भागीदारी की अनुमति दी गई है। FPI अब नॉन-एग्रीकल्चरल इंडेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स में हिस्सा ले सकेंगे, चाहे उनका अंडरलाइंग कैश सेटल्ड हो या नहीं।

सेबी ने पीएमएस के नियमों में व्यापक बदलाव को मंजूरी दी है।
मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने गुरुवार को हुई बोर्ड बैठक में पूंजी बाजार से जुड़े कई बड़े फैसलों को मंजूरी दी। इनमें पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज यानी PMS के नियमों में बदलाव, सेटलमेंट प्रक्रिया को आसान बनाना, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI की पहुंच बढ़ाना और रिसर्च एनालिस्ट के लिए अनुपालन नियमों में राहत जैसे फैसले शामिल हैं।
सेबी ने पीएमएस के नियमों में व्यापक बदलाव को मंजूरी दी है। इसके तहत पोर्टफोलियो मैनेजर्स रूट फॉर इन्वेस्टमेंट इन म्यूचुअल फंड यूनिट्स यानी PRIM नाम से नया रास्ता शुरू किया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत PMS कंपनियां ग्राहकों के पैसे को सीधे म्यूचुअल फंड स्कीम और स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड यानी SIF में निवेश कर सकेंगी। मौजूदा PMS प्रदाता अलग इन्वेस्टमेंट अप्रोच के जरिए यह सुविधा दे सकेंगे और इसके लिए न्यूनतम निवेश सीमा 25 लाख रुपये होगी।
नए नियमों के तहत डिस्क्रेशनरी PMS में ग्राहकों की कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट यानी AUM का 10% तक निवेश इन्वेस्टमेंट-ग्रेड अनलिस्टेड डेट सिक्योरिटीज में किया जा सकेगा। इसके लिए ग्राहक की सहमति जरूरी होगी। PMS कंपनियों को IPO, प्राइमरी डेट इश्यू और एक्सचेंज ट्रेडेड डेरिवेटिव्स में भाग लेने की भी अनुमति दी गई है। सेबी ने नियमों की भाषा को आसान करने और पुराने व गैर-जरूरी प्रावधानों को हटाने का भी फैसला किया है।
सेबी ने सेटलमेंट प्रोसीडिंग्स रेगुलेशंस में भी बदलाव को मंजूरी दी है। नई व्यवस्था में आमतौर पर शो-कॉज नोटिस से पहले सेटलमेंट नोटिस जारी किया जाएगा। संबंधित संस्था को सेटलमेंट आवेदन जमा करने के लिए 60 दिन का समय मिलेगा। हालांकि, जहां अंतरिम आदेश पर विचार किया जा रहा हो, वहां यह नोटिस जारी नहीं किया जाएगा।
डिस्क्लोजर से जुड़े उल्लंघनों के लिए फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट की सुविधा भी शुरू होगी। इसमें 10 लाख रुपये तक की सेटलमेंट राशि वाले मामलों को शामिल किया जाएगा। वित्तीय विवरणों में गलत जानकारी देने और फंड के डायवर्जन से जुड़े मामलों के सेटलमेंट के लिए भी नया ढांचा बनाया जाएगा।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को एक्सचेंज ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव्स में ज्यादा भागीदारी की अनुमति दी गई है। FPI अब नॉन-एग्रीकल्चरल इंडेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स में हिस्सा ले सकेंगे, चाहे उनका अंडरलाइंग कैश सेटल्ड हो या नहीं। इसके अलावा नॉन-कैश-सेटल्ड नॉन-एग्रीकल्चरल कमोडिटी डेरिवेटिव्स में भी FPI भाग ले सकेंगे। हालांकि, डिलीवरी की स्थिति आने से पहले उन्हें अपनी पोजीशन खत्म करनी होगी।
रिसर्च एनालिस्ट और रिसर्च संस्थाओं के लिए इंस्ट के साथ बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग रखने की अनिवार्यता में भी राहत दी गई है। इसके अलावा कुछ रेगुलेटेड संस्थाओं के लिए कॉमन विज्ञापन कोड को मंजूरी दी गई है। इसके तहत सेलिब्रिटीज का इस्तेमाल ब्रांड या संस्था के स्तर पर प्रचार के लिए किया जा सकेगा और कुछ मामलों में पहले से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट वाले विज्ञापनों के लिए पूर्व मंजूरी जरूरी रहेगी।
सेबी ने वॉल्ट मैनेजर्स रेगुलेशंस, REITs और इनविट के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस उपायों और एक्रेडिटेड इन्वेस्टर फ्रेमवर्क में बदलाव को भी मंजूरी दी है। इसके अलावा पहली बार एनसीडी लिस्ट करने वाली कंपनियों के सभी पुराने अनलिस्टेड नॉन-कन्वर्टिबल डेट सिक्योरिटीज की अनिवार्य लिस्टिंग में भी राहत दी गई है।
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