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4 min read | अपडेटेड September 25, 2026, 16:41 IST
सारांश
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक चालू वित्त वर्ष 2026-27 में भारतीय फार्मा सेक्टर का रेवेन्यू 11 से 13% की दर से बढ़ सकता है। पिछले साल यह ग्रोथ केवल 8% रही थी। एक्सपोर्ट में तेजी और घरेलू बाजार में दवाओं की मजबूत डिमांड से सेक्टर को बड़ा सपोर्ट मिलेगा।

फार्मा सेक्टर के रेवेन्यू में चालू वित्त वर्ष के दौरान 11 से 13% की बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है।
भारतीय फार्मा सेक्टर के लिए चालू वित्त वर्ष 2026-27 काफी बेहतर साबित होने वाला है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस साल देश की फार्मा कंपनियों के रेवेन्यू में 11 से 13% की जोरदार बढ़त देखने को मिल सकती है। पिछले वित्त वर्ष में यह ग्रोथ केवल 8% रही थी। विदेशों में दवाओं के एक्सपोर्ट में तेजी और घरेलू बाजार में लगातार बनी हुई डिमांड के चलते कंपनियों की कमाई में यह उछाल आने की उम्मीद जताई जा रही है। क्रिसिल ने यह अनुमान लगभग 190 फार्मा कंपनियों के परफॉर्मेंस का ट्रेंड देखकर लगाया है, जो पूरे सेक्टर के कुल रेवेन्यू का लगभग आधा हिस्सा कवर करती हैं।
इस वित्त वर्ष में फार्मा एक्सपोर्ट कंपनियों के रेवेन्यू को बढ़ाने वाला मुख्य जरिया बनेगा। क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक रुपये के टर्म में फार्मा एक्सपोर्ट में 14 से 16% की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। विदेशों में होने वाली कुल बिक्री में फॉर्म्युलेशन्स का हिस्सा लगभग 83% है। इसमें से 57% हिस्सा रेगुलेटेड मार्केट को भेजा जाता है और बाकी बचा हिस्सा सेमी-रेगुलेटेड मार्केट में जाता है। विदेशी बाजारों में भारतीय दवाओं की लगातार मांग बनी रहने के कारण कंपनियों के रेवेन्यू में यह बड़ी बढ़त देखने को मिलेगी।
कंपनी की ग्रोथ के लिए घरेलू मार्केट भी एक मजबूत दूसरे इंजन की तरह काम करेगा। इस वित्त वर्ष में घरेलू फार्मा बाजार 9 से 11% की दर से बढ़ सकता है। क्रॉनिक थेरेपी की बढ़ती मांग, हर साल होने वाले 5 से 6% के प्राइस रिवीजन और वॉल्यूम ग्रोथ में सुधार से इसको काफी सपोर्ट मिलेगा। पिछले दो सालों में वॉल्यूम ग्रोथ केवल 2% के आसपास ही रही थी, जो इस साल बढ़कर 4 से 5% पर पहुंच सकती है। नए प्रोडक्ट्स की लॉन्चिंग, डॉक्टरों द्वारा ज्यादा दवाएं लिखे जाने और टियर-2 तथा टियर-3 शहरों में गहरी पहुंच बनने से वॉल्यूम ग्रोथ को बड़ा सहारा मिलेगा।
भले ही कंपनियों का रेवेन्यू तेजी से बढ़ेगा, लेकिन यह पूरी ग्रोथ कंपनियों के नेट प्रॉफिट में नहीं दिखेगी। इसका मुख्य कारण कच्चे माल, एनर्जी और फ्रेट यानी माल भाड़े के खर्च में बढ़ोतरी होना है। इन सब चीजों की लागत बढ़ने से कंपनियों का ऑपरेटिंग मार्जिन 150 से 200 बेसिस पॉइंट्स तक घट सकता है और यह 21 से 21.5% के आसपास रह सकता है। हालांकि मार्जिन पर दबाव के बावजूद कंपनियों की लिक्विडिटी, कैश जनरेशन और बैलेंस शीट काफी मजबूत रहेगी। क्रिसिल के अनुसार कंपनियों का डेट-टू-EBITDA लगभग 1.2 गुना और इंटरेस्ट कवरेज रेशियो 10 गुना के पास बना रहेगा, जिससे उनका क्रेडिट प्रोफाइल काफी मजबूत रहने वाला है।
इस बीच शेयर बाजार में निफ्टी फार्मा इंडेक्स में हल्का दबाव देखने को मिला। निफ्टी फार्मा 0.10% गिरकर 27,003.00 के लेवल पर ट्रेड करता हुआ नजर आया। हालांकि फार्मा स्टॉक्स में मिला-जुला रुख देखने को मिला। जाइडस लाइफ के शेयर में 2.00% और टोरेंट फार्मा में 1.22% की तेजी रही। इसके अलावा सिप्ला में 0.05% और डिविस लैब में 0.18% की मामूली बढ़त दर्ज की गई। दूसरी तरफ ग्लेनमार्क 2.07%, वॉकहार्ट 1.04% और लॉरस लैब्स 0.95% की गिरावट के साथ बंद हुए।
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