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Rupee vs Dollar: ₹94 के करीब कैसे पहुंचा रुपया? जानिए डॉलर गिरने की 5 वजहें

Namita Shukla

4 min read | अपडेटेड September 04, 2026, 12:06 IST

सारांश

रुपये को सबसे बड़ा सपोर्ट विदेशी मुद्रा की भारी आवक से मिला है। RBI की विशेष योजनाओं के जरिए 31 अगस्त तक करीब $136.4 अरब की विदेशी मुद्रा भारत में आई। इसमें अकेले FCNR(B) जमा के जरिए करीब $127.23 अरब जुटाए गए।

रुपये और डॉलर

रुपये के मुकाबले क्यों गिरा डॉलर पिछले कुछ दिनों में? (Photo: Shutterstock)

26 अगस्त से लगातार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में हलचल देखने को मिल रही है। 26 अगस्त को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये काफी मजबूत नजर आया था और एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 93.55 रुपये तक पहुंच गई थी। वहीं आज की बात करें तो रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 5 पैसा मजबूत होकर 94.46 तक पहुंच गया था। हालांकि बाद में रुपया दो पैसे गिरकर 94.48 तक पहुंच गया। पिछले कुछ दिनों में ऐसा क्या हुआ कि डॉलर के मुकाबले रुपया कुछ मजबूत होता नजर आ रहा है। इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण भारत में डॉलर की बढ़ती आवक और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कदम माने जा रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि डॉलर के मुकाबले रुपया क्यों मजबूत हो रहा है और USD/INR में गिरावट क्यों आ रही है? आइए समझते हैं इसके 5 बड़े कारण।

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1- भारत में रिकॉर्ड डॉलर की आवक

रुपये को सबसे बड़ा सपोर्ट विदेशी मुद्रा की भारी आवक से मिला है। RBI की विशेष योजनाओं के जरिए 31 अगस्त तक करीब $136.4 अरब की विदेशी मुद्रा भारत में आई। इसमें अकेले FCNR(B) जमा के जरिए करीब $127.23 अरब जुटाए गए। इससे भारतीय वित्तीय व्यवस्था में डॉलर की उपलब्धता बढ़ी है। जब बाजार में डॉलर की सप्लाई बढ़ती है और उसकी मांग अपेक्षाकृत कम रहती है, तो डॉलर कमजोर और रुपया मजबूत हो सकता है।

2- RBI की सक्रिय भूमिका

रुपये को संभालने में RBI की भूमिका भी अहम है। केंद्रीय बैंक जरूरत के समय डॉलर बेचकर बाजार में डॉलर की सप्लाई बढ़ाता है। 4 सितंबर को भी ट्रेडर्स ने RBI के विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप की जानकारी दी। इसका उद्देश्य रुपये में अचानक होने वाली गिरावट और अत्यधिक उतार-चढ़ाव को कंट्रोल करना है।

3- डॉलर में वैश्विक कमजोरी

भारत के अलावा इंटरनेशनल मार्केट में भी डॉलर पर दबाव है। जापानी येन की मजबूती और अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर बदलती उम्मीदों ने डॉलर की चाल को प्रभावित किया है। कमजोर डॉलर से उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं को कुछ राहत मिल सकती है।

4- भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को फायदा

बड़ी विदेशी मुद्रा आवक से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को भी मजबूती मिली है। रिपोर्टों के मुताबिक रिजर्व करीब $729 अरब तक पहुंच गया है और आगे इसमें और बढ़ोतरी की उम्मीद है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार RBI को रुपये में अत्यधिक कमजोरी आने पर बाजार में हस्तक्षेप करने की ज्यादा क्षमता देता है।

5- लेकिन महंगा कच्चा तेल बन सकता है चुनौती

रुपये की मजबूती के बावजूद तस्वीर पूरी तरह आसान नहीं है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और ब्रेंट क्रूड $96 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है। भारत अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल का आयात करता है। इसलिए महंगा तेल डॉलर की मांग बढ़ाकर रुपये पर दबाव डाल सकता है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल रुपये को मजबूत विदेशी मुद्रा आवक और RBI के समर्थन से फायदा मिल रहा है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी रोजगार आंकड़े, डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी फेड की ब्याज दरों से जुड़ी उम्मीदें आगे USD/INR की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण रहेंगी। इसलिए रुपये की मौजूदा मजबूती को स्थायी ट्रेंड मानने से पहले इन संकेतकों पर नजर रखना जरूरी होगा।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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