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4 min read | अपडेटेड September 04, 2026, 10:44 IST
सारांश
सेबी द्वारा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट प्राइस के नियमों की समीक्षा करने के ऐलान के बाद कैपिटल मार्केट के शेयरों में भारी बढ़त देखी गई। क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी CAS लागू होने के बाद से आ रही चिंताओं को देखते हुए सेबी एक हफ्ते में कंसल्टेशन पेपर जारी कर सकता है।

शेयर बाजार रेगुलेटर सेबी एफएंडओ एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस तय करने के तरीके में बदलाव करने की योजना बना रहा है। Image: Shutterstock
भारतीय शेयर बाजार में 4 सितंबर को कैपिटल मार्केट से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में जोरदार एक्शन देखने को मिला है। बाजार रेगुलेटर सेबी यानी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया द्वारा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट प्राइस तय करने के तरीके की समीक्षा करने की योजना के बाद इन शेयरों में भारी खरीदारी दर्ज की गई। 3 अगस्त से लागू हुए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी CAS के बाद से ही F&O एक्सपायरी के दिन सेटलमेंट प्राइस को लेकर सवाल उठ रहे थे। इस पर संज्ञान लेते हुए सेबी ने कहा है कि वह मौजूदा व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव ला सकता है और लगभग एक हफ्ते के भीतर इस पर एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया जाएगा।
सेबी के इस बयान के सामने आते ही एक्सचेंज और ब्रोकिंग कंपनियों के शेयरों में पंख लग गए। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर बीएसई लिमिटेड का शेयर 5% तक चढ़कर 3,474 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वहीं ब्रोकिंग कंपनी एंजल वन के शेयर में 7.8% की बंपर तेजी देखी गई और यह 308.35 रुपये के हाई पर पहुंच गया। इसके अलावा बिलियनब्रेन गैराज वेंचर्स यानी ग्रो का शेयर 1.5% बढ़कर 193.10 रुपये पर कारोबार कर रहा था, जबकि नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट के शेयर में 1.28% की बढ़त दर्ज की गई और यह 1,862.80 रुपये पर पहुंच गया।
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी सीएएस एक ऐसी व्यवस्था है, जिसे स्टॉक एक्सचेंज ट्रेडिंग डे के अंत में किसी शेयर या इंडेक्स का ऑफिशियल क्लोजिंग प्राइस तय करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। आसान भाषा में समझें तो आखिरी ट्रेड के भाव को क्लोजिंग प्राइस मानने के बजाय एक्सचेंज बाजार बंद होने से ठीक पहले एक छोटा ऑक्शन आयोजित करता है। इसमें बाय और सेल ऑर्डर जुटाकर एक ऐसा भाव तय किया जाता है जिस पर सबसे ज्यादा शेयरों की ट्रेडिंग हो सके। इसी भाव को आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस माना जाता है। मौजूदा नियमों के तहत सीएएस से निकला यही भाव एफएंडओ एक्सपायरी के दिन डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट का आधार बनता है।
सीएएस लागू होने के बाद से ही ऑप्शंस ट्रेडर्स और मार्केट पार्टिसिपेंट्स को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। मुख्य चिंता यह थी कि ऑक्शन के दौरान लिक्विडिटी कम होने से बहुत छोटे समय में शेयरों और इंडेक्स के भाव में काफी बड़ा उतार-चढ़ाव आ जाता था। एक्सपायरी के दिन इसी भाव से सेटलमेंट होने के कारण ट्रेडर्स के प्रॉफिट और लॉस पर अचानक बड़ा असर पड़ जाता था। VWAP यानी वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस की जगह CAS आने से ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन हेज करने में दिक्कत हो रही थी। इसके चलते अगस्त महीने में इक्विटी ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स की ट्रेडिंग में 30% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि इंडेक्स ऑप्शंस प्रीमियम टर्नओवर भी 20% घट गया था।
सेबी ने बताया कि 3 अगस्त को कैश सेगमेंट में सीएएस की शुरुआत के बाद से ही वह स्टॉक एक्सचेंजों, ब्रोकरों, प्रोपराइटरी ट्रेडर्स, सॉफ्टवेयर वेंडर्स, म्यूचुअल फंड्स और एफपीआई के साथ लगातार संपर्क में था। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से मिले फीडबैक और एक महीने के कामकाज की समीक्षा के बाद सेबी ने सेटलमेंट प्राइस के तरीके में बदलाव करने का मन बनाया है। गौरतलब है कि 13 अगस्त को बीएसई सेंसेक्स वीकली ऑप्शंस एक्सपायरी के दिन सीएएस के दौरान प्राइस मैनिपुलेशन के आरोप में सेबी ने हाल ही में दो एंटिटीज के 3.68 करोड़ रुपये के गलत फायदे को जब्त करने का अंतरिम आदेश भी जारी किया था। अब सेबी के नए कंसल्टेशन पेपर से बाजार को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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