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5 min read | अपडेटेड July 14, 2026, 15:30 IST
सारांश
निफ्टी 500 कंपनियों के प्रदर्शन में बैंकिंग सेक्टर का योगदान सबसे ज्यादा 23% रहा है। पिछले 10 सालों में कंपनियों के ऑपरेशनल परफॉर्मेंस में बड़ा सुधार हुआ है और उनका ऑपरेटिंग प्रॉफिट 256% बढ़ा है। इसके साथ ही कंपनियों के टैक्स और कैपिटल एक्सपेंडिचर में भी बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

देश की बड़ी कंपनियों की कमाई में तेजी है? | Image: Shutterstock
भारतीय कॉरपोरेट जगत के लिए वित्त वर्ष 2026 नेट प्रॉफिट के लिहाज से बेहद शानदार रहा है। इस दौरान कंपनियों के नेट प्रॉफिट में दमदार बढ़ोतरी देखी गई है और उनकी बैलेंस शीट में भी बड़ा सुधार हुआ है। ACE इक्विटी के आंकड़ों के अनुसार, निफ्टी 500 कंपनियों का कुल नेट प्रॉफिट वित्त वर्ष 2026 में 14% की बढ़त के साथ 18.2 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष 2025 में 15.9 लाख करोड़ रुपये था। हालांकि, इस दौरान कंपनियों के रेवेन्यू ग्रोथ की रफ्तार थोड़ी धीमी रही है। निफ्टी 500 कंपनियों का कुल रेवेन्यू सालाना आधार पर करीब 6% बढ़कर 168 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया है।
अगर पिछले एक दशक की बात करें, तो भारतीय कंपनियों के स्केल और नेट प्रॉफिट में बहुत बड़ा बदलाव आया है। निफ्टी 500 इंडेक्स की 451 कंपनियों के लगातार 10 सालों के फाइनेंशियल डेटा के एनालिसिस से पता चलता है कि उनका कुल रेवेन्यू वित्त वर्ष 2016 के 61.7 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में अनुमानित 164.2 लाख करोड़ रुपये हो गया है। कोरोना महामारी के कारण बीच में इस ग्रोथ पर थोड़ा असर पड़ा था, लेकिन इसके बाद कंपनियों ने बहुत तेजी से रिकवरी की। आर्थिक गतिविधियां सामान्य होने के बाद वित्त वर्ष 2022 में रेवेन्यू 25% और वित्त वर्ष 2023 में 21% बढ़ा था। इस मजबूत रिकवरी के दम पर निफ्टी 500 कंपनियों का कुल नेट प्रॉफिट वित्त वर्ष 2016 के 4 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले वित्त वर्ष 2026 में चार गुना से भी ज्यादा बढ़ गया है।
बिजनेस का दायरा बढ़ने के साथ ही कंपनियों के कुल खर्चों में भी बढ़ोतरी हुई है। पिछले 10 साल की अवधि में कंपनियों का कुल खर्च 52.8 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 136.5 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, कर्मचारियों पर होने वाला खर्च भी 6 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 16.5 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी कंपनियों के बढ़ते ऑपरेशन, प्रोडक्शन कैपेसिटी के विस्तार और नए कर्मचारियों की भर्ती के वजह से देखी गई है। इन बढ़ते खर्चों के बावजूद कंपनियां तेजी से नेट प्रॉफिट बनाने में कामयाब रहीं। इसका सबसे बड़ा कारण कंपनियों का ऑपरेटिंग प्रॉफिट रहा, जिसमें वित्त वर्ष 2016 से वित्त वर्ष 2026 के बीच 256% का भारी उछाल आया। एस इक्विटी के चार्ट के मुताबिक, रेवेन्यू में ऑपरेटिंग प्रॉफिट का हिस्सा वित्त वर्ष 2016 के 16.7% से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 22.3% हो गया है। इसके अलावा, ब्याज के खर्चों में केवल 164% की बढ़ोतरी हुई, जिससे कंपनियों का फाइनेंशियल स्ट्रेस कम हुआ। कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले टैक्स में भी 243% की बड़ी बढ़त हुई है और यह 1.5 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 5.2 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
कंपनियों ने अपने फ्यूचर विस्तार के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर पर भी काफी ध्यान दिया है। निफ्टी 500 कंपनियों का कुल कैपिटल एक्सपेंडिचर वित्त वर्ष 2016 के 3.91 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 9.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था, जो कंपनियों के विस्तार के भरोसे को दिखाता है। अगर मार्केट सेगमेंट के प्रदर्शन की बात करें, तो वित्त वर्ष 2026 में मिडकैप कंपनियों ने सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है। निफ्टी मिडकैप 150 स्टॉक्स के नेट प्रॉफिट में 42% की जोरदार बढ़त दर्ज की गई है, जबकि लार्ज-कैप स्टॉक्स का नेट प्रॉफिट 12% बढ़ा है। स्मॉल-कैप कंपनियों के नेट प्रॉफिट में केवल 2% की मामूली बढ़ोतरी हुई है। पिछले चार सालों में मिडकैप कंपनियों ने 165% का प्रॉफिट गेन करके सबको पीछे छोड़ दिया है।
वित्त वर्ष 2026 में कंपनियों के कुल नेट प्रॉफिट में अलग-अलग सेक्टर्स का योगदान अलग रहा है। बैंकिंग सेक्टर 23% योगदान के साथ सबसे आगे और सबसे दबदबे वाला सेक्टर रहा है। इसके बाद ऑयल एंड गैस सेक्टर का योगदान 13%, फाइनेंस का 11% और आईटी का 8% रहा है। ऑटोमोटिव और पावर सेक्टर्स का योगदान 5-5% रहा, जो सबसे कम हिस्सेदारी है। अगर ग्रोथ के मामले में देखें तो पिछले एक दशक में बैंकिंग सेक्टर के नेट प्रॉफिट में 1,284% की ऐतिहासिक बढ़त हुई है। वहीं, इंश्योरेंस में 648% और टेलीकॉम सेक्टर में 484% की ग्रोथ देखी गई है। पिछले एक साल में आयरन एंड स्टील कंपनियों के नेट प्रॉफिट में 188% और ऑयल एंड गैस कंपनियों के नेट प्रॉफिट में 50% का जोरदार उछाल आया है।
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