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4 min read | अपडेटेड July 09, 2026, 15:25 IST
सारांश
इनकम टैक्स एक्ट के तहत कैश ट्रांजैक्शन को लेकर कई कड़े नियम बनाए गए हैं। टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक बड़े पैमाने पर कैश लेने, लोन का लेनदेन करने या डोनेशन देने पर तय लिमिट से ज्यादा कैश इस्तेमाल करने से भारी पेनल्टी लग सकती है। टैक्सपेयर्स को इन 8 जरूरी नियमों का ध्यान रखना चाहिए।

आज हम इनकम टैक्स कैश लिमिट को समझेंगे। Image: Shutterstock
इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय ज्यादातर करदाता केवल टैक्स छूट और डिडक्शन पर ही अपना ध्यान लगाते हैं। लेकिन इनकम टैक्स एक्ट में कैश में होने वाले कई तरह के लेनदेन को लेकर भी कड़ी लिमिट तय की गई है। अगर आप तय सीमा से ज्यादा कैश लेते हैं, लोन का लेनदेन कैश में करते हैं, या फिर किसी प्रॉपर्टी डील में बड़ा कैश इस्तेमाल करते हैं, तो आपको भारी पेनल्टी का सामना करना पड़ सकता है।
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 186 के तहत कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति से एक सिंगल दिन में 2 लाख रुपये या उससे ज्यादा का कैश रिसीव नहीं कर सकता है। टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन कहते हैं कि यह नियम एक सिंगल ट्रांजैक्शन या किसी एक ही इवेंट या मौके से जुड़े कई सारे ट्रांजैक्शंस पर पूरी तरह लागू होता है। उदाहरण के लिए अगर आप किसी शादी या प्रॉपर्टी के सौदे के लिए 2 लाख रुपये से ज्यादा कैश स्वीकार करते हैं, तो यह नियम का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसा करने पर सेक्शन 451 के तहत मिलने वाले कैश के बराबर ही भारी पेनल्टी लगाई जा सकती है।
सेक्शन 185 के तहत कोई भी व्यक्ति 20,000 रुपये या उससे अधिक की रकम कैश में लोन या डिपॉजिट के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता है। इसमें अचल संपत्ति यानी प्रॉपर्टी के ट्रांसफर से जुड़े कैश एडवांस भी शामिल हैं। इस तरह के सभी लेनदेन केवल बैंकिंग चैनलों या तय इलेक्ट्रॉनिक मोड्स के जरिए ही होने चाहिए। इस नियम को तोड़ने पर सेक्शन 450 के तहत कैश में ली गई रकम के बराबर ही पेनल्टी भुगतनी पड़ सकती है।
लोन या डिपॉजिट को कैश में वापस करने को लेकर भी सख्त नियम हैं। सेक्शन 188 के अनुसार, आप 20,000 रुपये या उससे ज्यादा का लोन या डिपॉजिट कैश में रिपे नहीं कर सकते हैं। इसके रीपेमेंट के लिए अकाउंट पेयी चेक, बैंक ड्राफ्ट या डिजिटल तरीकों का ही इस्तेमाल करना होगा। इसका उल्लंघन करने पर सेक्शन 453 के तहत रिपे की गई कैश रकम के बराबर पेनल्टी लग सकती है।
बिजनेस करने वाले लोगों के लिए भी कैश खर्चों की सीमा तय है। सेक्शन 36(4) के मुताबिक, कोई भी बिजनेस एक दिन में किसी एक व्यक्ति को 10,000 रुपये से ज्यादा का कैश पेमेंट करने पर उस खर्चे पर टैक्स डिडक्शन का दावा नहीं कर सकता है। हालांकि माल ढोने वाली गाड़ियों के बिजनेस में लगे लोगों के लिए यह लिमिट थोड़ी ज्यादा है, वे एक दिन में एक व्यक्ति को 35,000 रुपये तक का कैश पेमेंट कर सकते हैं।
अगर आप किसी संस्था को दान देते हैं, तो सेक्शन 133 के तहत 2,000 रुपये से ज्यादा का कैश डोनेशन देने पर आपको टैक्स में कोई छूट नहीं मिलेगी। इस डिडक्शन का लाभ उठाने के लिए आपको हमेशा बैंकिंग चैनल या डिजिटल पेमेंट मोड के जरिए ही डोनेशन देना चाहिए।
अपने खुद के बैंक अकाउंट से कैश निकालने की कोई कानूनी सीमा नहीं है, लेकिन इस पर टीडीएस लग सकता है। सेक्शन 393(3) के अनुसार, यदि एक फाइनेंशियल ईयर के दौरान बैंक या पोस्ट ऑफिस से कैश निकालना तय सालाना सीमा पार कर जाता है, तो बैंक इस पर टीडीएस काट सकते हैं। बड़े कैश विड्रॉल की जानकारी इनकम टैक्स विभाग को भी दी जाती है।
सेक्शन 185 के तहत किसी भी अचल संपत्ति के ट्रांसफर से जुड़ा 20,000 रुपये या उससे ज्यादा का एडवांस कैश में नहीं लिया जा सकता है। इसके अलावा बड़े प्रॉपर्टी सौदों की जानकारी स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस यानी SFT के तहत इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को रिपोर्ट की जाती है। इसलिए स्क्रूटनी से बचने के लिए बैंकिंग चैनलों का इस्तेमाल करना सबसे सुरक्षित है।
कई लोग सोचते हैं कि बड़े कैश पेमेंट को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर वे नियमों से बच जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं है। यदि कई सारे छोटे कैश पेमेंट्स किसी एक ही ट्रांजैक्शन या इवेंट से जुड़े हैं, तो सेक्शन 186 के तहत उन्हें एक ही ट्रांजैक्शन माना जाएगा। ऐसे में लिमिट पार होने पर पेनल्टी लग जाएगी। टैक्सपेयर्स को हमेशा डिजिटल पेमेंट या बैंकिंग मोड्स को ही प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि उनका फ्यूचर सुरक्षित रहे।
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