मार्केट न्यूज़

4 min read | अपडेटेड July 15, 2026, 12:21 IST
सारांश
IBM के शेयर में करीब 25% की ऐतिहासिक गिरावट आई, जिससे उसकी मार्केट वैल्यू 70 अरब डॉलर घट गई। कंपनियों द्वारा सॉफ्टवेयर के बजाय एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने से IBM को नुकसान हुआ है। इसका सीधा असर भारतीय आईटी सेक्टर पर पड़ा, जहां TCS 2.36% और इंफोसिस 1.52% तक टूट गए।

आईबीएम के शेयर में बड़ी गिरावट के बाद भारतीय आईटी स्टॉक्स में आई कमजोरी।
वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी सेक्टर में आए एक बड़े बदलाव ने शेयर बाजार में भारी हलचल मचा दी है। अमेरिकी टेक्नोलॉजी दिग्गज आईबीएम के शेयरों में हुई ऐतिहासिक गिरावट का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला है। बुधवार को भारतीय IT कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली दर्ज की गई। IBM द्वारा सॉफ्टवेयर पर कंपनियों का खर्च कम होने की चेतावनी और कमजोर तिमाही नतीजों के बाद घरेलू निवेशकों में चिंता बढ़ गई है। भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों के तिमाही नतीजों के सीजन के शुरू होने से पहले इस बुरी खबर ने पूरे मार्केट का सेंटिमेंट बिगाड़ दिया है।
IBM के इस बड़े झटके के बाद घरेलू बाजार में सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी TCS के शेयर में बड़ी गिरावट आई। TCS का शेयर कारोबार के दौरान 2.36% तक फिसलकर 2,144 रुपये पर आ गया, जबकि इसकी शुरुआत 2,173 रुपये पर हुई थी। दूसरी बड़ी दिग्गज कंपनी इंफोसिस भी भारी दबाव में रही और इसका शेयर 1.52% की कमजोरी के साथ 1,075 रुपये तक चला गया। विप्रो का शेयर भी 1.41% टूटकर 174.65 रुपये पर आ गया। इनके अलावा केपीआईटी टेक्नोलॉजीज, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा, हेक्सावेयर, LTI Mindtree, कोफोर्स और टाटा टेक्नोलॉजीज जैसी तमाम आईटी कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
अमेरिकी बाजार में रात के कारोबार के दौरान आईबीएम के शेयरों में पिछले कई दशकों की सबसे बड़ी एक दिवसीय गिरावट देखी गई। कंपनी का शेयर 25.21% की भारी गिरावट के साथ 217.07 डॉलर पर बंद हुआ। इस ऐतिहासिक बिकवाली की वजह से महज एक दिन में कंपनी की मार्केट वैल्यू से लगभग 70 अरब डॉलर साफ हो गए। यह गिरावट वर्ष 1987 के ब्लैक मंडे क्रैश से भी ज्यादा बड़ी थी। दरअसल कंपनी ने अपनी दूसरी तिमाही के जो शुरुआती आंकड़े पेश किए हैं, वे वॉल स्ट्रीट के अनुमानों से काफी कम रहे हैं। कंपनी का कुल रेवेन्यू 17.2 अरब डॉलर रहा, जबकि विश्लेषकों का अनुमान 17.86 अरब डॉलर का था। वहीं इसका एडजस्टेड अर्निंग प्रति शेयर भी 3.02 डॉलर के अनुमान के मुकाबले केवल 2.93 डॉलर रहा, जो कंपनी की एक साल में सबसे कमजोर रेवेन्यू ग्रोथ को बता रहा है।
IBM के सीईओ अरविंद कृष्णा ने निवेशकों को लिखे लेटर में माना कि कंपनी ग्राहकों की बदलती प्राथमिकताओं को समझने में चूक गई। आजकल कॉरपोरेट कंपनियां अपना बजट ट्रेडिशनल सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट्स से हटाकर एआई इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सर्वर, स्टोरेज सिस्टम और मेमोरी चिप्स खरीदने में लगा रही हैं। कंपनियों को डर है कि फ्यूचर में AI हार्डवेयर की कमी हो सकती है और वे महंगे हो सकते हैं। इसके अलावा आईबीएम इस तिमाही में कई बड़ी डील्स को तय समय पर पूरा करने में असफल रही, जिसे मैनेजमेंट ने ऑपरेशन की विफलता माना। साथ ही एंथ्रोपिक के मिथोस एआई मॉडल के आने के बाद कंपनियों ने सॉफ्टवेयर के बजाय साइबर सिक्योरिटी को मजबूत करने को प्राथमिकता दी। कंपनी का पारंपरिक मेनफ्रेम बिजनेस भी उम्मीद से काफी कमजोर रहा।
इस मंदी का असर केवल IBM तक सीमित नहीं रहा, बल्कि माइक्रोसॉफ्ट, सेल्सफोर्स, सर्विस नाउ और इनट्यूट जैसी बड़ी टेक कंपनियों के शेयर भी 2 से 5% तक टूट गए। विश्लेषकों का मानना है कि सॉफ्टवेयर कंपनियों पर यह दबाव तब तक बना रह सकता है जब तक कंपनियां अपना बजट एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की तरफ डायवर्ट करती रहेंगी। हालांकि IBM का कहना है कि उसका लॉन्ग टर्म प्लान बिल्कुल नहीं बदला है। कंपनी की रेड हैट रेवेन्यू ग्रोथ 11% रही है और डिस्ट्रीब्यूटेड इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस में 37% की रिकॉर्ड बढ़त हुई है। कंपनी फ्यूचर के लिए क्वांटम कंप्यूटिंग पर अगले 5 सालों में 10 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश करने जा रही है, जिससे वर्ष 2029 तक बड़ा क्वांटम कंप्यूटर बनाया जा सके। इसके अलावा कंपनी ने 5 अरब डॉलर की साइबर सिक्योरिटी पहल लाइटवेल भी शुरू की है। कंपनी के पूरे नतीजे 22 जुलाई को आएंगे।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में

अगला लेख
How To Use Open Interest For Intraday Trading: Complete Guide
What Is Stop Loss In Trading? Meaning, Types, & How To Use It
What Is ICRA? Why Its Credit Ratings Matter To Investors
Explore Learning Centre
All topics · stocks, MFs, derivatives, IPOs