मार्केट न्यूज़

4 min read | अपडेटेड August 17, 2026, 13:31 IST
सारांश
सोने और चांदी दोनों की कीमतों में तेजी बनी हुई है, लेकिन मांग के कारण अलग हैं। सेंट्रल बैंकों की रिकॉर्ड खरीदारी से सोने को मजबूती मिल रही है। वहीं दूसरी ओर लगातार छठे साल सप्लाई की कमी और इंडस्ट्रियल मांग से चांदी का भाव टिका हुआ है। टाटा म्यूचुअल फंड ने इस पर नया आउटलुक जारी किया है।

भारतीय बाजारों में भी सोने और चांदी में बदलाव देखा गया है। Image: Shutterstock
कीमती धातुओं के बाजार में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में तेजी का रुख देखा जा रहा है, लेकिन दोनों धातुओं की मांग को बढ़ाने वाले वजह एक दूसरे से काफी अलग हैं। जहां एक तरफ सेंट्रल बैंकों की ओर से हो रही खरीदारी और सुरक्षित संपत्ति के रूप में मांग सोने को सपोर्ट दे रही है, वहीं दूसरी तरफ इंडस्ट्रियल सेक्टर की मांग और सप्लाई में आ रही कमी के चलते चांदी को मजबूती मिल रही है। टाटा म्यूचुअल फंड द्वारा जारी अगस्त 2026 के आउटलुक में बताया गया है कि आने वाले समय में ग्लोबल इकोनॉमिक और जियोपॉलिटिकल परिस्थितियों के हिसाब से दोनों धातुओं की चाल तय होगी।
सोने का सबसे बड़ा आधार इसका मॉनेटरी रोल और सेफ-हेवन एसेट होना है। दुनिया भर के सेंट्रल बैंक अपने रिजर्व को डाइवर्सिफाई करने के लिए लगातार सोना खरीद रहे हैं। टाटा म्यूचुअल फंड द्वारा वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के हवाले से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में सेंट्रल बैंकों की गोल्ड खरीदारी बढ़कर 289 टन पर पहुंच गई। यह दूसरी तिमाही में दर्ज की गई अब तक की सबसे बड़ी खरीदारी है। इसके साथ ही 2026 की पहली छमाही में सेंट्रल बैंकों की कुल गोल्ड खरीदारी 345 टन तक पहुंच गई है।
मार्च 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव शुरू होने के बाद ग्लोबल गोल्ड ETF से भारी रकम बाहर निकली थी। ऐसे समय में सेंट्रल बैंकों की इस मजबूत खरीदारी ने सोने की कीमतों को काफी सहारा दिया। हालांकि जुलाई 2026 से ईटीएफ आउटफ्लो में भी ठहराव के संकेत मिलने लगे हैं। टाटा MF के अनुसार, मैक्रोइकोनॉमिक अनिश्चितता के दौर में सोने की मांग बनी हुई है। 15 अगस्त 2026 को 24 कैरेट सोने का भाव 1,53,660 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने का भाव 1,40,750 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।
सोने से अलग चांदी की मांग मुख्य रूप से इंडस्ट्रियल सेक्टर से आती है। टाटा म्यूचुअल फंड के मुताबिक 2026 लगातार छठा ऐसा साल रहने का अनुमान है जब चांदी के बाजार में सप्लाई डेफिसिट यानी मांग के मुकाबले सप्लाई की कमी देखी जाएगी। इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई हार्डवेयर, रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और सोलर पैनल निर्माण में चांदी का इस्तेमाल काफी बढ़ा है, जिससे इसे ग्रोथ सेक्टर्स का सपोर्ट मिल रहा है।
सप्लाई के मोर्चे पर भी वैश्विक स्तर पर एक बड़ा ट्रेंड देखा जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, चीन के पास दुनिया के कुल चांदी रिजर्व का करीब 11% हिस्सा मौजूद है और वह 60 से 70% रिफाइनिंग कैपेसिटी को कंट्रोल करता है। ऐसे में अगर चीन अपनी घरेलू जरूरतों को तरजीह देता है या सप्लाई चैन को कड़ा करता है, तो ग्लोबल मार्केट में चांदी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। 13 अगस्त 2026 को चांदी का भाव 2,342 रुपये प्रति 10 ग्राम यानी 2,34,200 रुपये प्रति किलो दर्ज हुआ था।
सोने की मांग जहां सेफ-हेवन और मॉनेटरी एसेट पर निर्भर है, वहीं चांदी की मांग औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ी हुई है। इसी वजह से चांदी की कीमतों पर आर्थिक सुस्ती और मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के प्रदर्शन का असर ज्यादा पड़ता है। टाटा एमएफ का कहना है कि सोलर इंस्टॉलेशन की रफ्तार थोड़ी धीमी होने से शॉर्ट टर्म में चांदी में वोलेटिलिटी देखने को मिल सकती है।
टाटा म्यूचुअल फंड के एसेट एलोकेशन फ्रेमवर्क के अनुसार, कीमती धातुओं के कुल पोर्टफोलियो में 70% हिस्सा सोने का और 30% हिस्सा चांदी का रखने का 70:30 मॉडल सुझाया गया है। यह मॉडल सोने की सुरक्षात्मक क्षमता और चांदी की इंडस्ट्रियल ग्रोथ दोनों के संतुलन पर आधारित है।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में

अगला लेख