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4 min read | अपडेटेड July 15, 2026, 12:19 IST
सारांश
ग्रो (Groww) ब्रांड की पैरेंट कंपनी बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। जून 2026 को समाप्त तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर शानदार बढ़त के साथ 735.04 करोड़ रुपये रहा है। इसके अलावा बोर्ड ने शेयर कैपिटल में बदलाव को मंजूरी दी है।

पहली तिमाही में ग्रो की पैरेंट कंपनी बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स के नेट प्रॉफिट में बंपर बढ़ोतरी दर्ज की गई। Image: Shutterstock
फाइनेंशियल सर्विसेज टेक प्लेटफॉर्म ग्रो (Groww) की पैरेंट कंपनी बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स लिमिटेड ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के अनआडिटेड नतीजे घोषित कर दिए हैं। 15 जुलाई 2026 को हुई बोर्ड मीटिंग में कंपनी ने अपने कंसोलिडेटेड और स्टैंडअलोन वित्तीय नतीजों को मंजूरी दी। पहली तिमाही के दौरान कंपनी के नेट प्रॉफिट में पिछले साल की तुलना में जोरदार उछाल देखने को मिला है। इसके साथ ही कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने अपनी शेयर कैपिटल के ढांचे में बड़ा बदलाव करने और एक नई इंटरनल ऑडिटर फर्म की नियुक्ति करने समेत कई अहम फैसले लिए हैं।
बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स लिमिटेड द्वारा शेयर बाजार को दी गई जानकारी के मुताबिक, 30 जून 2026 को समाप्त हुई पहली तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 735.04 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। पिछले साल की समान तिमाही यानी 30 जून 2025 को कंपनी का नेट प्रॉफिट 378.35 करोड़ रुपये था। इस लिहाज से सालाना आधार पर कंपनी के नेट प्रॉफिट में बहुत बड़ी बढ़त दर्ज की गई है। वहीं, पिछली तिमाही यानी 31 मार्च 2026 के 686.36 करोड़ रुपये के मुकाबले भी कंपनी का नेट प्रॉफिट बढ़ा है।
इस तिमाही में कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू 1,501.42 करोड़ रुपये रहा है, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 904.40 करोड़ रुपये था। कंपनी का टोटल इनकम भी सालाना आधार पर 948.47 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,548.67 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। इस तिमाही में कंपनी का कुल कंसोलिडेटेड खर्च 555.68 करोड़ रुपये रहा है, जो पिछले साल 444.67 करोड़ रुपये था।
कंपनी के स्टैंडअलोन प्रदर्शन पर नजर डालें तो वहां भी मजबूत आंकड़े देखने को मिले हैं। पहली तिमाही में कंपनी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 555.14 करोड़ रुपये रहा है, जो पिछले साल की पहली तिमाही में 305.92 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। इस दौरान कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू 953.48 करोड़ रुपये रहा है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 623.45 करोड़ रुपये था। पहली तिमाही में कंपनी का स्टैंडअलोन टोटल इनकम 1,053.69 करोड़ रुपये रहा, जो साल दर साल आधार पर 664.78 करोड़ रुपये से बढ़ा है। कंपनी के स्टैंडअलोन खर्च जून तिमाही में 310.02 करोड़ रुपये रहे हैं, जो पिछले साल की समान तिमाही में 272.58 करोड़ रुपये थे।
बोर्ड मीटिंग में कंपनी ने अपनी ऑथोराइज्ड शेयर कैपिटल को रीक्लासिफाई करने का एक बड़ा फैसला लिया है। कंपनी की कुल ऑथोराइज्ड शेयर कैपिटल 5,000 करोड़ रुपये ही रहेगी। लेकिन पहले यह 2,332.50 करोड़ इक्विटी शेयरों (2 रुपये प्रति शेयर) और 33.50 करोड़ प्रिफरेंस शेयरों (10 रुपये प्रति शेयर) में बंटी हुई थी। अब इसे बदलकर पूरी तरह से 2,500 करोड़ इक्विटी शेयरों में बांटने को मंजूरी दी गई है, जिसमें प्रत्येक इक्विटी शेयर की फेस वैल्यू 2 रुपये होगी। इसके लिए कंपनी के मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन के कैपिटल क्लॉज में बदलाव किया जाएगा, जो कि शेयरधारकों की मंजूरी के बाद ही लागू होगा।
बोर्ड ने ऑडिट कमेटी की सिफारिश पर वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मेसर्स अर्न्स्ट एंड यंग एलएलपी (EY) को कंपनी का नया इंटरनल ऑडिटर नियुक्त करने की मंजूरी दी है। यह नियुक्ति मौजूदा इंटरनल ऑडिटर का कार्यकाल पूरा होने पर की गई है। इसके अलावा कंपनी ने अपने आईपीओ से मिले फंड के इस्तेमाल की डिटेल्स भी साझा की हैं। नवंबर 2025 को आए आईपीओ से कंपनी ने 1,060 करोड़ रुपये जुटाए थे, जिसमें फ्रेश इश्यू से कंपनी को 1,015.98 करोड़ रुपये की नेट रकम मिली थी। इसमें से 30 जून 2026 तक कंपनी ने 862.29 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर लिया है और 153.69 करोड़ रुपये अभी बिना इस्तेमाल के बचे हैं। इस फंड का उपयोग क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, ब्रांड बिल्डिंग, सहायक कंपनियों जैसे ग्रो क्रेडिटसर्व टेक्नोलॉजी और ग्रो इन्वेस्ट टेक में निवेश के लिए किया गया है। फंड के इस्तेमाल में किसी तरह का कोई भटकाव नहीं पाया गया है।
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