return to news
  1. RBI MPC की मीटिंग शुरू, क्या रेपो रेट में बदलाव की है संभावना? इन फैक्टर्स पर रहेगी नजर

बिजनेस न्यूज़

RBI MPC की मीटिंग शुरू, क्या रेपो रेट में बदलाव की है संभावना? इन फैक्टर्स पर रहेगी नजर

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड August 03, 2026, 14:07 IST

सारांश

इस बार MPC बैठक में सबसे ज्यादा फोकस महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया में जारी तनाव, मानसून की स्थिति, रुपये की चाल, बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों पर रहेगा। अगर कच्चा तेल महंगा रहता है या मानसून कमजोर पड़ता है, तो इसका असर महंगाई पर पड़ सकता है।

RBI MPC Meeting

RBI MPC Meeting: इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून भी अहम रहेगा।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की 3 दिन की बैठक आज 3 अगस्त से शुरू हो गई है। इस बैठक के बाद 5 अगस्त को RBI गवर्नर Sanjay Malhotra मौद्रिक नीति का ऐलान करेंगे। ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस बार भी रेपो रेट को 5.25% पर ही बरकरार रखा जा सकता है।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

Repo Rate में बदलाव की उम्मीद क्यों कम है?

रॉयटर्स के एक सर्वे से पता चलता है कि RBI इस हफ्ते अपनी पॉलिसी की समीक्षा में रेपो रेट को बरकरार रख सकता है। सर्वे में शामिल 72 अर्थशास्त्रियों में से 68 को दरों में कोई बदलाव नहीं होने की उम्मीद है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल महंगाई, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए RBI सतर्क रुख अपनाएगा। पिछले साल RBI ने Repo Rate में कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी। इसके बाद लगातार तीन बैठकों में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

RBI किन बातों पर रखेगा नजर?

इस बार MPC बैठक में सबसे ज्यादा फोकस महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया में जारी तनाव, मानसून की स्थिति, रुपये की चाल, बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों पर रहेगा। अगर कच्चा तेल महंगा रहता है या मानसून कमजोर पड़ता है, तो इसका असर महंगाई पर पड़ सकता है।

कच्चे तेल की कीमतें भी RBI की चिंता बढ़ा रही हैं। जून में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम के बाद तेल की कीमतों में नरमी आई थी, लेकिन पश्चिम एशिया में फिर बढ़े तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड दोबारा महंगा हो गया है। अगर तेल लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहता है, तो परिवहन लागत बढ़ने के साथ महंगाई पर भी असर पड़ सकता है।

RBI के लिए इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून भी अहम रहेगा। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस बार सामान्य से कम यानी लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का 90% बारिश होने का अनुमान जताया है। यदि बारिश कमजोर रहती है, तो खाद्य महंगाई बढ़ सकती है, ग्रामीण मांग प्रभावित हो सकती है और सरकार पर सब्सिडी का बोझ भी बढ़ सकता है।

महंगाई और GDP पर क्या है अनुमान?

जून में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई थी, जो RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर है। हालांकि यह अभी भी RBI की तय सीमा के भीतर है। ऐसे में ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि केंद्रीय बैंक FY27 के लिए 5.1% महंगाई और 6.6% GDP ग्रोथ के अपने अनुमान में फिलहाल कोई बदलाव नहीं करेगा।

बाजार की नजर RBI के बयान पर

RBI ने जून में विदेशी पूंजी आकर्षित करने और रुपये को मजबूत रखने के लिए कई कदम उठाए थे। इनमें FCNR(B) डिपॉजिट्स के लिए रियायती विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा, विदेशी उधारी के नियमों में ढील और सरकारी बॉन्ड में निवेश के अधिक अवसर शामिल थे। हाल के महीनों में RBI के कदमों से विदेशी निवेश बढ़ा है और रुपये को भी सहारा मिला है। इसलिए इस बैठक में नए कदमों की उम्मीद कम है। हालांकि बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि RBI महंगाई, लिक्विडिटी, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक हालात को लेकर क्या संकेत देता है।

अगला लेख