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  1. सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट, क्रूड और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का बढ़ा खौफ, समझें आज क्यों गिर रहा है बाजार?

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सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट, क्रूड और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का बढ़ा खौफ, समझें आज क्यों गिर रहा है बाजार?

Upstox

3 min read | अपडेटेड October 07, 2026, 11:02 IST

सारांश

7 अक्टूबर को आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी के नतीजों से पहले शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स करीब 500 अंक गिरकर 72,591 पर और निफ्टी 0.80% टूटकर 22,600 पर आ गया। बाजार गिरने के मुख्य कारणों में आरबीआई का डर, क्रूड ऑयल में उछाल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड शामिल हैं।

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आरबीआई मॉनेटरी पॉलिसी से पहले शेयर बाजार में भारी बिकवाली।

7 अक्टूबर को सुबह के कारोबारी सेशन में भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग के नतीजों से ठीक पहले बाजार के प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 50 बड़ी गिरावट के साथ लाल निशान में आ गए। सुबह के समय सेंसेक्स करीब 500 अंक यानी 0.65% टूटकर 72,591 के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया।

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वहीं दूसरी तरफ नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 इंडेक्स भी करीब 0.80% की गिरावट के साथ 22,600 के स्तर पर आ गया। बाजार की इस गिरावट की चपेट में स्मॉलकैप और मिडकैप शेयर भी आए और बीएसई 150 मिडकैप तथा बीएसई 250 स्मॉलकैप इंडेक्स में आधा पर्सेंट तक की गिरावट दर्ज की गई। सुबह 9:30 बजे के करीब HDFC बैंक, टाइटन, आईसीआईसीआई बैंक, रिलायंस और एक्सिस बैंक जैसे बड़े शेयर सेंसेक्स पर गिरावट के मुख्य जिम्मेदार रहे।

आरबीआई मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर बाजार में घबराहट

शेयर बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे पहला और बड़ा कारण आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग के फैसले को लेकर फैली घबराहट है। बाजार को आशंका है कि सेंट्रल बैंक रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर सकता है। हालांकि रेट में बढ़ोतरी को तो बाजार पहले ही भांप चुका है, लेकिन असली घबराहट आरबीआई का रुख सख्त रहने को लेकर है। निवेशकों को डर है कि आरबीआई आगे भी रेट हाइक जारी रखने का इशारा कर सकता है। इसके अलावा ग्रोथ और महंगाई के अनुमानों में होने वाला संशोधन भी बाजार के लिए काफी अहम रहने वाला है, जिसके चलते फैसले से ठीक पहले ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स सतर्क रुख अपनाते हुए बिकवाली कर रहे हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और क्रूड मार्केट में तनाव

बाजार पर दबाव बनाने वाला दूसरा प्रमुख कारण क्रूड ऑयल यानी कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल है। ग्लोबल मार्केट में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1% से ज्यादा बढ़कर 102 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। यमन के ईरान समर्थित हूतियों द्वारा सऊदी अरब पर किए गए हमलों के बाद मिडल ईस्ट से क्रूड की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज के समुद्री रास्ते पर अमेरिकी नियंत्रण का दावा फिर से दोहराया है। ट्रंप ने कहा कि यह जलमार्ग अमेरिकी नौसेना और अमेरिका का है। जियोपॉलिटिकल तनाव और क्रूड महंगा होने से भारतीय बाजार की धारणा पर बुरा असर पड़ा है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी से विदेशी पूंजी की निकासी

भारतीय शेयर बाजार की इस गिरावट के पीछे तीसरा मुख्य कारण अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड यील्ड में आया अचानक उछाल है। अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड यील्ड पिछले सत्र में 5.27% तक फिसलने के बाद फिर से बढ़कर 5.31% पर पहुंच गई है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड साल 2002 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है, जिससे ग्लोबल स्टॉक मार्केट में घबराहट पैदा हो गई है। आगे रेट हाइक की उम्मीदों और सरकारी खजाने से जुड़ी चिंताओं के कारण बॉन्ड यील्ड में यह तेजी आई है। इसके चलते विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से कैपिटल आउटफ्लो यानी पूंजी की निकासी की जा रही है, जिससे शेयर बाजार की रीकवरी अटक गई है।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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