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4 min read | अपडेटेड August 11, 2026, 13:17 IST
सारांश
भारी उद्योग मंत्रालय ने 10 अगस्त 2026 को जारी नोटिफिकेशन में बताया कि PM E-DRIVE स्कीम अब 31 मार्च 2028 तक जारी रहेगी। इस योजना का कुल बजट 11,900 करोड़ रुपये है। इसका उद्देश्य देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना और इलेक्ट्रिक व्हीकल की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करना है।

PM E-Drive Scheme: इस योजना का कुल बजट 11,900 करोड़ रुपये है।
अगर आप आने वाले समय में इलेक्ट्रिक स्कूटर या इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स पर मिलने वाली सब्सिडी को आगे बढ़ा दिया है। सरकार ने PM E-DRIVE Scheme की अवधि अब 31 मार्च 2028 तक कर दी है। यानी पात्र इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने वाले ग्राहकों को आगे भी सरकार की ओर से इंसेंटिव का लाभ मिल सकता है।
भारी उद्योग मंत्रालय ने 10 अगस्त 2026 को जारी नोटिफिकेशन में बताया कि PM E-DRIVE स्कीम अब 31 मार्च 2028 तक जारी रहेगी। इस योजना का कुल बजट 11,900 करोड़ रुपये है। इसका उद्देश्य देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना और इलेक्ट्रिक व्हीकल की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करना है।
खरीदारों के लिए सबसे अहम बात यह है कि इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर मिलने वाला इंसेंटिव भी जारी रहेगा। हालांकि, यह इंसेंटिव हर इलेक्ट्रिक स्कूटर या बाइक पर समान नहीं होगा। इसकी गणना वाहन की बैटरी क्षमता और उसकी कीमत के आधार पर तय नियमों के मुताबिक होगी।
सरकार के संशोधित नियमों के अनुसार, 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2028 के बीच रजिस्टर्ड पात्र इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स पर 2,500 रुपये प्रति kWh के हिसाब से इंसेंटिव मिलेगा। हालांकि, इसकी अधिकतम सीमा 5,000 रुपये प्रति वाहन तय की गई है। उदाहरण के लिए, अगर किसी इलेक्ट्रिक स्कूटर की बैटरी क्षमता 2 kWh है, तो 2,500 रुपये प्रति kWh के हिसाब से इंसेंटिव 5,000 रुपये होगा। वहीं इससे ज्यादा क्षमता वाली बैटरी होने पर भी अधिकतम इंसेंटिव 5,000 रुपये तक ही रहेगा।
ध्यान देने वाली बात यह है कि सरकार की यह सब्सिडी हर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर लागू नहीं होगी। योजना के तहत पात्र वाहन की अधिकतम ex-factory कीमत 1.5 लाख रुपये होनी चाहिए। योजना के तहत अधिकतम 45,79,120 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स को लाभ देने का प्रावधान है। इसके लिए भारी उद्योग मंत्रालय की ओर से कुल 2,767 करोड़ रुपये का फंड निर्धारित किया गया है।
खरीदारों के लिए यह समझना भी जरूरी है कि मौजूदा इंसेंटिव पहले की तुलना में कम है। वित्त वर्ष 2024-25 में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स के लिए इंसेंटिव 5,000 रुपये प्रति kWh था और इसकी अधिकतम सीमा 10,000 रुपये प्रति वाहन थी। अब इसे घटाकर 2,500 रुपये प्रति kWh और अधिकतम 5,000 रुपये कर दिया गया है।
यानी अगर आप सिर्फ सब्सिडी के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने का इंतजार कर रहे हैं, तो यह समझना जरूरी है कि 2028 तक स्कीम जारी रहने का मतलब यह नहीं है कि सब्सिडी 10,000 रुपये तक मिलेगी।
अगर आपका बजट इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के लिए तय है, तो PM E-DRIVE के विस्तार से आपको खरीदारी पर कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, स्कूटर खरीदते समय केवल सब्सिडी देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। वाहन की कुल कीमत, बैटरी की क्षमता, रेंज, चार्जिंग टाइम, बैटरी वारंटी और सर्विस नेटवर्क जैसी चीजों को भी जरूर देखें।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि PM E-DRIVE एक फंड-लिमिटेड स्कीम है। यानी 11,900 करोड़ रुपये की कुल सीमा से ज्यादा भुगतान नहीं किया जाएगा। अगर किसी कंपोनेंट के लिए तय फंड 31 मार्च 2028 से पहले ही खत्म हो जाता है, तो उस हिस्से को बंद किया जा सकता है और उसके बाद नए दावों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
स्कीम के तहत इंसेंटिव की राशि या नियमों में समय-समय पर बदलाव किया जा सकता है। सरकार ने कहा है कि वाहन की लागत में कमी आने पर प्रति kWh इंसेंटिव की समीक्षा की जा सकती है। इसके अलावा इंसेंटिव तय सीमा या वाहन की ex-factory कीमत के 15 फीसदी, इनमें से जो कम हो, तक सीमित रहेगा।
इसलिए अगर आप 2026-27 या 2027-28 में इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने की सोच रहे हैं, तो खरीदारी से पहले यह जरूर जांच लें कि आपका चुना हुआ मॉडल PM E-DRIVE के तहत पात्र है या नहीं और उस समय उपलब्ध इंसेंटिव कितना है।
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