पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड June 08, 2026, 17:32 IST
सारांश
सामान्य होम लोन में पूरी अवधि के दौरान EMI लगभग समान रहती है। लेकिन स्टेप-अप EMI में शुरुआती किस्तों का बड़ा हिस्सा ब्याज चुकाने में जाता है और मूलधन कम चुकता होता है। बाद में जब EMI बढ़ती है, तब मूलधन तेजी से कम होने लगता है।

Home Loan EMI: आप कम आय होने के बावजूद जल्दी घर खरीद सकते हैं।
आजकल कई बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां इस तरह के होम लोन ऑफर कर रही हैं। इसे खासतौर पर युवा प्रोफेशनल्स के लिए बनाया गया है, जिनकी सैलरी आने वाले वर्षों में बढ़ने की संभावना होती है। हालांकि, यह विकल्प हर किसी के लिए सही नहीं होता, इसलिए इसे समझना जरूरी है।
स्टेप-अप EMI एक ऐसी लोन रिपेमेंट व्यवस्था है जिसमें शुरुआती वर्षों में EMI कम रखी जाती है और बाद में धीरे-धीरे बढ़ाई जाती है। EMI बढ़ाने का शेड्यूल पहले से तय होता है। यह हर साल, कुछ वर्षों के अंतराल पर या किसी निश्चित अवधि के बाद बढ़ सकती है। EMI में कितना और कब बढ़ोतरी होगी, यह बैंक की योजना और आपके प्रोफाइल पर निर्भर करता है।
सामान्य होम लोन में पूरी अवधि के दौरान EMI लगभग समान रहती है। लेकिन स्टेप-अप EMI में शुरुआती किस्तों का बड़ा हिस्सा ब्याज चुकाने में जाता है और मूलधन कम चुकता होता है। बाद में जब EMI बढ़ती है, तब मूलधन तेजी से कम होने लगता है।
इस तरह के लोन आमतौर पर उन लोगों को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं जिनकी आय भविष्य में तेजी से बढ़ने की संभावना होती है, जैसे आईटी प्रोफेशनल्स, सरकारी कर्मचारी, डॉक्टर या शुरुआती करियर वाले MBA प्रोफेशनल्स।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप कम आय होने के बावजूद जल्दी घर खरीद सकते हैं। शुरुआती वर्षों में कम EMI होने से आपके ऊपर वित्तीय दबाव कम रहता है। आप अन्य खर्चों जैसे किराया, घरेलू जरूरतें या निवेश भी आसानी से संभाल सकते हैं। इसके अलावा, बैंक आपकी लोन पात्रता भी बढ़ा सकते हैं, जिससे आप अधिक राशि का होम लोन प्राप्त कर सकते हैं।
स्टेप-अप EMI चुनते समय आपको अपनी भविष्य की आय को लेकर सचेत होना चाहिए। यदि आपकी सैलरी उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ती है, तो बाद में बढ़ी हुई EMI आपके बजट पर दबाव डाल सकती है। इसलिए केवल इस आधार पर बड़ा लोन न लें कि भविष्य में आय बढ़ जाएगी। हमेशा एक सुरक्षित और व्यावहारिक अनुमान लगाएं।
इसकी सबसे बड़ी कमी यह है कि पूरे लोन कार्यकाल में आपको अधिक ब्याज चुकाना पड़ सकता है। यदि आपकी आय अपेक्षित गति से नहीं बढ़ती है, तो भविष्य में बढ़ी हुई EMI परेशानी का कारण बन सकती है। इसके अलावा, ब्याज दरों में बढ़ोतरी होने पर बोझ और बढ़ सकता है।
बैंक आमतौर पर ऐसे लोगों को यह सुविधा देते हैं जिनकी आय भविष्य में बढ़ने की संभावना स्पष्ट हो। इसके लिए युवा उम्र, स्थिर नौकरी, अच्छा क्रेडिट स्कोर और करियर ग्रोथ की संभावना जैसे पहलुओं को देखा जाता है। कई मामलों में बैंक पति-पत्नी की संयुक्त आय को भी ध्यान में रखते हैं और उसी आधार पर EMI का ढांचा तैयार करते हैं।
यह विकल्प उन युवा नौकरीपेशा लोगों के लिए बेहतर है जो अपने करियर की शुरुआत में हैं और आने वाले वर्षों में नियमित वेतन वृद्धि की उम्मीद रखते हैं। यह उन दंपतियों के लिए भी उपयुक्त हो सकता है जो भविष्य में दोहरी आय की योजना बना रहे हैं। वहीं जिन लोगों की आय अनियमित है, कमीशन आधारित है या भविष्य को लेकर अनिश्चितता है, उनके लिए यह विकल्प जोखिम भरा हो सकता है।
(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। कोई भी फैसले से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
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