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5 min read | अपडेटेड July 20, 2026, 18:16 IST
सारांश
एसबीआई म्यूचुअल फंड के आईपीओ के बीच एसबीआई फ्लेक्सीकैप फंड के मैनेजर अनूप उपाध्याय ने बाजार की चाल और निवेश की रणनीति पर बात की। उन्होंने बताया कि रिटेल निवेशकों के लिए फ्लेक्सीकैप फंड क्यों सही हैं। इसके साथ ही उन्होंने लम्प सम निवेश और प्राइवेट बैंक जैसे सेक्टर्स पर अपनी राय दी।

एसबीआई म्यूचुअल फंड के फंड मैनेजर ने शेयर बाजार में निवेश को लेकर दिए काम के टिप्स। | Image: Shutterstock.
एसबीआई म्यूचुअल फंड का आईपीओ इस समय चर्चा में बना हुआ है और निवेशकों की नजर देश के सबसे बड़े एसेट मैनेजर पर टिकी हुई है। ऐसे माहौल में हर कोई यह जानना चाहता है कि फंड मैनेजर बाजार की मौजूदा स्थिति को कैसे देख रहे हैं। SBI फ्लेक्सीकैप फंड को संभालने वाले अनूप उपाध्याय ने अपस्टॉक्स को दिए एक इंटरव्यू में रिटेल निवेशकों के लिए सही रणनीति, लम्प सम निवेश के सही समय और उन सेक्टर्स के बारे में विस्तार से बताया है जहां लंबे समय में बंपर कमाई के मौके बन रहे हैं।
अक्सर निवेशकों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या किसी म्यूचुअल फंड कंपनी के लिस्ट होने से उसके काम करने के तरीके में बदलाव आता है। इस पर अनूप उपाध्याय ने साफ किया कि कंपनी के लिस्टेड होने से फंड मैनेजर्स के निवेश संबंधी फैसलों या उनकी फिलॉस्फी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। हर स्कीम को उसकी मौजूदा रणनीति और तय रिस्क टेम्पलेट के हिसाब से ही चलाया जाता रहेगा।
बाजार में लार्ज कैप, मल्टी कैप और फ्लेक्सीकैप फंड्स को लेकर काफी उलझन रहती है। इस पर उन्होंने कहा कि ज्यादातर रिटेल निवेशक अलग-अलग साइज की कंपनियों में पैसा लगाने का रिस्क तो ले सकते हैं, लेकिन उनके पास खुद से यह तय करने की रिसर्च या संसाधन नहीं होते कि किस इंडस्ट्री में कितना पैसा लगाना है। फ्लेक्सीकैप फंड इसी समस्या को दूर करते हैं और आम निवेशकों के लिए सबसे सही रहते हैं। हालांकि, जिन लोगों का रिस्क लेने का मन बिल्कुल नहीं है या माली हालत ठीक नहीं है, उन्हें इससे दूर रहना चाहिए। उलझन होने पर किसी सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर की मदद ली जा सकती है।
आने वाले सालों के लिए वे कुछ खास सेक्टर्स को लेकर काफी सकारात्मक हैं। उनके फ्लेक्सीकैप फंड में इस समय प्राइवेट बैंक और हेल्थकेयर सेक्टर्स में सबसे ज्यादा निवेश है। इसके अलावा ईकॉमर्स, गारमेंटिंग, डेटा सेंटर्स, पॉवर इक्विपमेंट, डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में भी अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है। पिछले कुछ समय से लगातार बिकवाली के कारण प्राइवेट बैंकों के वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट आई है, लेकिन उनकी बैलेंस शीट मजबूत है और एसेट क्वालिटी भी अच्छी है। ई-कॉमर्स कंपनियां शहरों में तेजी से मार्केट शेयर बढ़ा रही हैं। हेल्थकेयर कंपनियां नई रिसर्च और दवाओं पर काम कर रही हैं, जबकि गारमेंट कंपनियों को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के बाद यूके और यूरोप से बड़े ऑर्डर्स मिलने की उम्मीद है।
अगर किसी निवेशक के पास एक साथ लगाने के लिए बड़ी रकम यानी लम्प सम पैसा है, तो उसे कब निवेश करना चाहिए? इसके जवाब में उन्होंने बताया कि यह निवेशक की मौजूदा एसेट एलोकेशन और रिटर्न की उम्मीद पर निर्भर करता है। जो लोग अगले 3 से 5 साल में कम डबल डिजिट रिटर्न से संतुष्ट हैं या जिनकी कुल नेट वर्थ में इक्विटी का हिस्सा 50% से कम है, वे आज लम्प सम निवेश कर सकते हैं। वहीं अगर कोई आज एसआईपी शुरू कर रहा है, तो उसका नजरिया कम से कम 5 से 7 साल का होना चाहिए ताकि एक पूरा मार्केट साइकिल कवर हो सके। शॉर्ट टर्म नजरिए से गलत समय पर बाजार से बाहर निकलने का रिस्क रहता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि फ्लेक्सीकैप फंड्स आने वाले समय में बीएसई 500 इंडेक्स से बेहतर रिटर्न देने में कामयाब रहेंगे।
पोर्टफोलियो में होने वाले बदलावों को लेकर उन्होंने बताया कि जब किसी अच्छे फंडामेंटल वाले शेयर की कीमत गिरती है, तो वे कम आकर्षक शेयरों को बेचकर उसे खरीदते हैं। जून के महीने में उन्होंने एनर्जी सेक्टर में अपना निवेश कम किया है, क्योंकि ईरान युद्ध में तनाव कम होने के संकेत मिले हैं और गर्मी का सीजन भी खत्म हो रहा है। इसकी जगह उन्होंने ज्यादा ग्रोथ की संभावना वाली कंपनियों, प्राइवेट बैंक, हेल्थकेयर और ईकॉमर्स सेक्टर्स में अपना निवेश बढ़ा दिया है। आने वाले समय में फाइनेंशियल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स बाजार की तेजी को आगे बढ़ा सकते हैं, लेकिन निवेशकों को हर शेयर का अलग से एनालिसिस करना होगा क्योंकि डिफेंस जैसे कुछ मैन्युफैक्चरिंग शेयरों के दाम पहले ही काफी बढ़ चुके हैं और उनके वैल्यूएशन काफी महंगे हैं।
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