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4 min read | अपडेटेड July 20, 2026, 09:13 IST
सारांश
वैश्विक बाजारों में सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के कारण कच्चे तेल के दाम 90 डॉलर के पार निकल गए हैं। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है, जिसके बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने के संकेत मिल रहे हैं।

सोने की कीमतों में आई गिरावट के बाद सर्राफा बाजार में बढ़ी हलचल।
वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और आर्थिक चिंताओं के बीच सोमवार को सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी ब्रेंट क्रूड के दाम 90 डॉलर प्रति बैरल के पार चले गए हैं। तेल की बढ़ती कीमतों से दुनियाभर में महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है। इस बीच अमेरिकी फेडरल रिजर्व के कुछ अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है। इन तमाम बदलावों की वजह से निवेशकों ने सोने से दूरी बनाना शुरू कर दिया है।
हाजिर सोना 0.4% की गिरावट के साथ 4,000.55 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। इससे पहले बीते शुक्रवार को यह दो हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया था और पूरे हफ्ते में इसे 2.5% का नुकसान उठाना पड़ा था। वहीं अमेरिकी सोना वायदा भी अगस्त डिलीवरी के लिए 0.3% घटकर 4,005.9 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था। दूसरी तरफ मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में 3% का बड़ा उछाल आया और ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर निकल गया। अमेरिका ने ईरान पर लगातार नौवीं रात हमले किए हैं। यह कार्रवाई जॉर्डन में दो अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने के बाद की गई है। इस तनाव से पूरे एशिया के शेयर बाजारों में भी अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और लोग बड़ी टेक कंपनियों के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।
क्लीवलैंड फेड की प्रेसिडेंट बेथ हैमैक सहित कई नीति निर्माताओं का मानना है कि लगातार बढ़ रही महंगाई से निपटने के लिए ब्याज दरों को बढ़ाना पड़ सकता है। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की अगुवाई में होने वाली अगली मीटिंग में इस मुद्दे पर तीखी बहस होने की उम्मीद है और उनके कार्यकाल की इस दूसरी मीटिंग में मतभेद भी सामने आ सकते हैं। आमतौर पर जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों को रखने की लागत बढ़ जाती है, जिससे लोग इसमें निवेश कम कर देते हैं। हालांकि जुलाई में अमेरिका में कंज्यूमर सेंटिमेंट पांच महीने के ऊंचे स्तर पर पहुंचा है, लेकिन पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के कारण यह राहत अस्थायी हो सकती है। सट्टेबाजों ने 14 जुलाई को समाप्त हुए सप्ताह में कॉमेक्स गोल्ड में अपनी नेट लॉन्ग पोजीशन को 4,294 कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाकर 1,19,147 कर दिया है।
घरेलू बाजार की बात करें तो भारतीय सर्राफा बाजार में सोने पर मिलने वाला डिस्काउंट एक महीने के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि बाजार में ज्वैलरी की डिमांड काफी कमजोर बनी हुई है और खरीदार इस उम्मीद में रुके हैं कि कीमतें और कम हो सकती हैं। वहीं चीन में भी रिटेल डिमांड सुस्त होने की वजह से प्रीमियम स्थिर बना हुआ है। भारतीय बाजार में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,41,630 रुपये प्रति 10 ग्राम पर स्थिर देखी गई। हालांकि यह कीमत एक हफ्ते पहले के मुकाबले 0.75% ज्यादा है, लेकिन एक महीने पहले की तुलना में इसमें 4.01% की गिरावट आई है। पिछले साल के मुकाबले सोने में 43.86% की जोरदार बढ़त देखने को मिली है।
सोने में आई गिरावट के उलट अन्य कीमती धातुओं में हल्की बढ़त देखने को मिली है। चांदी की कीमत 999 शुद्धता के साथ भारतीय बाजार में 2,16,880 रुपये प्रति किलोग्राम पर बनी हुई है। यह कीमत एक हफ्ते पहले से 0.40% और एक महीने पहले से 7.25% कम है, लेकिन पिछले साल से 91.66% ऊपर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी 0.9% बढ़कर 56.42 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। इसके अलावा प्लेटिनम 0.1% की बढ़त के साथ 1,592.97 डॉलर और पैलेडियम 0.3% चढ़कर 1,251.74 डॉलर पर कारोबार कर रहा था।
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