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  1. REIT और REIT म्यूचुअल फंड में क्या है फर्क, जानिए टैक्स से लेकर रिटर्न तक सब कुछ

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REIT और REIT म्यूचुअल फंड में क्या है फर्क, जानिए टैक्स से लेकर रिटर्न तक सब कुछ

विकास तिवारी

3 min read | अपडेटेड August 04, 2026, 15:51 IST

सारांश

रियल एस्टेट में बिना प्रॉपर्टी खरीदे निवेश करने के लिए REITs और REIT म्यूचुअल फंड दो बड़े विकल्प हैं। REITs से आपको सीधे रेंटल इनकम और यूनिट की कीमत बढ़ने का फायदा मिलता है। वहीं REIT म्यूचुअल फंड्स कई तरह के REITs और रियल एस्टेट शेयरों में पैसा लगाकर डाइवर्सिफिकेशन और आसानी देते हैं।

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रियल एस्टेट में इन्वेस्ट करने से पहले REIT और REIT म्यूचुअल फंड का अंतर समझना जरूरी है। | Image: Shutterstock.

रियल एस्टेट में इन्वेस्ट करना हमेशा से ही कमाई का एक बड़ा जरिया माना गया है। लेकिन बड़ी रकम की कमी के चलते हर कोई सीधे बड़ी कमर्शियल प्रॉपर्टी नहीं खरीद पाता। ऐसे इन्वेस्टर्स के लिए मार्केट में दो बेहतरीन रास्ते हैं, पहला REIT यानी रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट और दूसरा REIT म्यूचुअल फंड। दोनों ही विकल्प कम पैसों में रियल एस्टेट मार्केट का फायदा उठाने का मौका देते हैं। लेकिन इन दोनों में मिलने वाले रिटर्न, रिस्क, ट्रैकिंग और टैक्स के नियम काफी अलग हैं, जिन्हें इन्वेस्ट करने से पहले जानना बेहद जरूरी है।

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रिटर्न मिलने का तरीका और लॉन्ग टर्म परफॉर्मेंस

REIT में निवेश करने पर आपको मुख्य रूप से रेंटल डिस्ट्रीब्यूशन और REIT यूनिट की कीमत में होने वाली बढ़ोतरी से रिटर्न मिलता है। इसका लॉन्ग टर्म रिटर्न सीधे तौर पर आपके चुने हुए REIT के डिविडेंड यील्ड और प्राइस अप्रिसिएशन पर निर्भर करता है। दूसरी तरफ, REIT म्यूचुअल फंड का रिटर्न REITs के साथ-साथ रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों की परफॉर्मेंस पर निर्भर करता है। इसमें आपको REIT इनकम और रियल एस्टेट इक्विटी दोनों का मिला-जुला रिटर्न मिलता है। अगर किसी फंड में इक्विटी का एक्सपोजर ज्यादा है, तो उसमें उतार-चढ़ाव यानी वोलेटिलिटी भी ज्यादा देखने को मिल सकती है।

किस इन्वेस्टर के लिए कौन सा ऑप्शन सही?

अगर आप एक ऐसे इन्वेस्टर हैं जो रेगुलर इनकम चाहते हैं और खुद सही REIT चुनने की समझ रखते हैं, तो सीधे REIT में पैसा लगाना आपके लिए सही रहेगा। लेकिन अगर आप बिना किसी झंझट के अपने पोर्टफोलियो में डाइवर्सिफिकेशन चाहते हैं और अलग-अलग REITs को खुद ट्रैक नहीं करना चाहते, तो REIT म्यूचुअल फंड आपके लिए ज्यादा सुविधाजनक विकल्प साबित हो सकता है। REIT म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टर्स को एक ही जगह पैसा लगाकर पूरे सेक्टर का फायदा मिल जाता है।

सीधे REIT में पैसा लगाने से पहले आपको स्पॉन्सर की क्वालिटी, प्रॉपर्टी की ऑक्यूपेंसी, किरायेदार यानी टीनेंट मिक्स, कर्ज का लेवल, रेंटल ग्रोथ और डिस्ट्रीब्यूशन कितना सस्टेनेबल है, जैसी चीजों की गहराई से जांच करनी चाहिए। वहीं REIT म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते समय यह देखना जरूरी होता है कि उस फंड का REIT में कितना एलोकेशन है, रियल एस्टेट शेयरों में कितना एक्सपोजर है, उसका ट्रैकिंग एरर कितना है और फंड का एक्सपेंस रेशियो क्या है।

टैक्स की बात करें तो दोनों विकल्पों में काफी अंतर देखने को मिलता है। लिस्टेड REIT यूनिट्स को अगर 12 महीने तक रखकर बेचा जाता है, तो उस पर मिलने वाले शार्ट टर्म कैपिटल गेन पर 20% का फ्लैट टैक्स लगता है। वहीं 12 महीने से ज्यादा समय तक रखने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स 12.5% लगता है, जिसमें सालाना 1.25 लाख रुपये तक की छूट मिलती है। REIT म्यूचुअल फंड की बात करें तो अगर यूनिट्स को 24 महीने तक रखकर बेचा जाए तो शार्ट टर्म गेन पर आपकी टैक्स स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स लगता है। 24 महीने से ज्यादा रखने पर 12.5% का लॉन्ग टर्म टैक्स बिना इंडेक्सेशन के लगता है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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