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  1. UPI पर MDR चार्ज को लेकर झूठे दावों का सच आया सामने, जानिए घरेलू कंपनियों को कैसे होगा बड़ा फायदा?

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UPI पर MDR चार्ज को लेकर झूठे दावों का सच आया सामने, जानिए घरेलू कंपनियों को कैसे होगा बड़ा फायदा?

Upstox

3 min read | अपडेटेड September 17, 2026, 17:58 IST

सारांश

UPI पर एमडीआर चार्ज लगाने को लेकर मीडिया में विदेशी दबाव के दावे किए जा रहे हैं। इन दावों को पूरी तरह से गलत और भ्रामक बताया गया है। सरकार और NPCI का मुख्य मकसद घरेलू पेमेंट कंपनियों को आगे बढ़ाना, रूपे कार्ड को प्राथमिकता देना और देश की डिजिटल संप्रभुता की रक्षा करना है।

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UPI पर MDR चार्ज को लेकर विदेशी दबाव के दावों का सच आया सामने।

UPI पर हाल ही में लागू किए गए MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट चार्ज को लेकर मीडिया के एक वर्ग में तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि यह फैसला किसी बाहरी दबाव में लिया गया है और इसके लिए साल 2026 की यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव यानी यूएसटीआर रिपोर्ट का हवाला भी दिया जा रहा है। हालांकि यह दावा पूरी तरह से गलत, झूठा और भ्रामक है। केंद्र सरकार और नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI का स्पष्ट मानना है कि MDR लाने का उद्देश्य देश के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को मजबूत करना और घरेलू कंपनियों को बराबरी का मौका देना है।

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UPI पर सिर्फ रूपे क्रेडिट कार्ड को ही अनुमति

यूएसटीआर की रिपोर्ट में पहला मुद्दा यह उठाया गया था कि अमेरिकी इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट कंपनियों को रूपे के समान UPI इकोसिस्टम में काम करने का मौका नहीं मिल रहा है। इस पर NPCI के 15 सितंबर 2026 के सर्कुलर से स्थिति पूरी तरह साफ हो जाती है। इस सर्कुलर के अनुसार UPI पर केवल रूपे क्रेडिट कार्ड के जरिए ही क्रेडिट ट्रांजेक्शन की अनुमति दी गई है। भारत सरकार की यह एक बिल्कुल स्पष्ट पॉलिसी है कि देश के यूजर्स के बीच रूपे क्रेडिट कार्ड को सबसे पहली और पसंदीदा पसंद बनाया जाए। इसी वजह से किसी भी अन्य विदेशी क्रेडिट कार्ड को UPI क्रेडिट ट्रांजेक्शन की मंजूरी नहीं दी गई है।

30% मार्केट शेयर लिमिट और MDR का कनेक्शन

रिपोर्ट में दूसरा मुद्दा थर्ड पार्टी ऐप प्रोवाइडर्स के लिए 30% मार्केट शेयर लिमिट का उठाया गया था, जिसे नवंबर 2020 में घोषित किया गया था और दिसंबर 2026 से लागू होना है। दरअसल एक सही रेवेन्यू मॉडल न होने की वजह से छोटी कंपनियां मार्केट लीडर्स का मुकाबला नहीं कर पा रही थीं और यह नियम सही से लागू नहीं हो पा रहा था। अब चुनिंदा बड़े ट्रांजेक्शन पर MDR लागू होने से छोटी और घरेलू कंपनियों को एक टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल मिलेगा। इससे वे बड़ी कंपनियों से मुकाबला कर सकेंगी और UPI इकोसिस्टम में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकेंगी। यानी MDR लाने का मुख्य मकसद भारतीय कंपनियों को अपना ऑपरेशन फैलाने में मदद करना है।

डिजिटल पेमेंट में देश की संप्रभुता की सुरक्षा

MDR लागू करने का कदम किसी बाहरी दबाव का नतीजा नहीं है, बल्कि यह फैसला भारत के इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट इकोसिस्टम की संप्रभुता को सुरक्षित रखने की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है। बड़े ट्रांजेक्शन पर MDR से मिलने वाले रेवेन्यू से घरेलू पेमेंट कंपनियां आत्मनिर्भर बनेंगी। इसके अलावा भारत सरकार ने रूपे क्रेडिट और डेबिट कार्ड को लगातार प्रमोट किया है ताकि देश के लोगों के पास एक मजबूत स्वदेशी विकल्प मौजूद रहे। रूपे क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल लगातार बढ़ता रहे, इसके लिए डेबिट कार्ड को पूरी तरह से MDR फ्री रखा गया है। इससे साफ है कि बाहरी प्रभाव के सभी आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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