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  1. सीनियर सिटीजंस के लिए NSC या SCSS: किस स्कीम में मिलेगा ज्यादा रिटर्न? निवेश से पहले समझें पूरा गणित

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सीनियर सिटीजंस के लिए NSC या SCSS: किस स्कीम में मिलेगा ज्यादा रिटर्न? निवेश से पहले समझें पूरा गणित

Upstox

4 min read | अपडेटेड November 05, 2026, 19:16 IST

सारांश

सीनियर सिटीजंस के लिए NSC और SCSS दोनों सुरक्षित सरकारी योजनाएं हैं। 5 साल की अवधि वाली इन योजनाओं में SCSS 8.2% ब्याज और तिमाही भुगतान देती है, जबकि NSC में 7.7% ब्याज मैच्योरिटी पर जुड़कर मिलता है।

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वरिष्ठ नागरिकों के लिए NSC और SCSS में निवेश के रिटर्न और नियमों की तुलना।

रिटायरमेंट के बाद अपनी जमा पूंजी सुरक्षित रखना और उस पर बेहतर रिटर्न पाना हर वरिष्ठ नागरिक की प्राथमिकता होती है। सुरक्षित रिटर्न के लिए नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट यानी NSC और सीनियर सिटीजंस सेविंग्स स्कीम यानी SCSS दो लोकप्रिय सरकारी योजनाएं हैं। दोनों ही योजनाएं सरकार की गारंटी देती हैं, लेकिन ब्याज दर, भुगतान के तरीके, निवेश सीमा और टैक्स में अंतर होता है। अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए SCSS में 8.2% की ब्याज दर मिल रही है, जबकि NSC में 7.7% ब्याज दिया जा रहा है। ऐसे में बुजुर्ग निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि उनके फ्यूचर के लिए कौन सी स्कीम ज्यादा फायदेमंद रहेगी।

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ब्याज दर और भुगतान के तरीके में क्या है बड़ा फर्क

दोनों योजनाओं में सबसे पहला फर्क ब्याज दर और उसके भुगतान का है। SCSS में जहां 8.2% ब्याज मिलता है, वहीं NSC में 7.7% ब्याज दर तय है। SCSS खास तौर पर बुजुर्गों की नियमित जरूरतों के लिए बनाई गई है। इसमें ब्याज का भुगतान हर तिमाही होता है, जिससे वरिष्ठ नागरिकों को हर तीन महीने पर तय इनकम मिलती है। 30 लाख रुपये के अधिकतम निवेश पर 8.2% की दर से हर तिमाही लगभग 61,500 रुपये और सालाना 2.46 लाख रुपये की कमाई टैक्स से पहले होती है। इसके विपरीत NSC में ब्याज सालाना जुड़ता है और मैच्योरिटी पर मिलता है। NSC में 1 लाख रुपये का निवेश 5 साल में बढ़कर लगभग 1.45 लाख रुपये हो जाता है।

पात्रता और निवेश की अधिकतम सीमा के नियम

पात्रता और निवेश की सीमाओं में भी दोनों योजनाओं में अंतर है। सीनियर सिटीजंस सेविंग्स स्कीम में आमतौर पर 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के नागरिक ही खाता खुलवा सकते हैं। इसमें न्यूनतम 1,000 रुपये और अधिकतम 30 लाख रुपये तक निवेश की सीमा है। दूसरी तरफ नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट में कोई भी निवासी भारतीय नागरिक निवेश कर सकता है। NSC में न्यूनतम 1,000 रुपये से शुरुआत होती है, लेकिन अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है। यानी NSC में कितनी भी बड़ी रकम लगाई जा सकती है। दोनों ही योजनाओं का कार्यकाल 5 साल का होता है।

टैक्स छूट और ब्याज पर टैक्स के क्या हैं नियम

टैक्स के मोर्चे पर दोनों ही योजनाएं पुरानी टैक्स व्यवस्था में छूट का लाभ देती हैं। NSC और SCSS दोनों में किया गया निवेश सेक्शन 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स कटौती के दायरे में आता है। हालांकि दोनों स्कीमों से मिलने वाले ब्याज पर टैक्स चुकाना पड़ता है। निवेशक को अपनी टैक्स स्लैब दर के अनुसार ब्याज की आय पर टैक्स देना होता है। SCSS में मिलने वाला तिमाही ब्याज हर साल टैक्सेबल होता है, जबकि NSC में मैच्योरिटी के समय कुल ब्याज पर टैक्स की गणना की जाती है।

5 लाख के निवेश पर किस स्कीम में मिलेगा ज्यादा लाभ

वरिष्ठ नागरिकों के लिए कौन सा विकल्प बेहतर है, इसे 5 लाख रुपये के उदाहरण से समझा जा सकता है। अगर कोई वरिष्ठ नागरिक दोनों योजनाओं में 5-5 लाख रुपये 5 साल के लिए लगाता है, तो SCSS में उसे कुल 2,05,000 रुपये का ब्याज नियमित किस्तों में मिलेगा और कुल 7,05,000 रुपये मिलेंगे। वहीं NSC में 5 साल की मैच्योरिटी पर 7,24,517 रुपये की एकमुश्त रकम मिलेगी। NSC में सालाना चक्रवृद्धि से करीब 19,500 रुपये ज्यादा मिलते हैं, लेकिन पैसा 5 साल लॉक रहता है। नियमित आय चाहने वालों के लिए SCSS सबसे बेहतर है, जबकि एकमुश्त रकम बढ़ाने के लिए NSC मुफीद है।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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