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  1. क्या ब्याज दरों को लेकर बैंक और NBFCs पर लगेगी लगाम? RBI जल्द जारी करेगा नए दिशा-निर्देश

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क्या ब्याज दरों को लेकर बैंक और NBFCs पर लगेगी लगाम? RBI जल्द जारी करेगा नए दिशा-निर्देश

Namita Shukla

3 min read | अपडेटेड August 05, 2026, 12:03 IST

सारांश

मौजूदा समय में कई बैंक और वित्तीय संस्थान अलग-अलग तरह के लोन पर अलग-अलग तरीके से ब्याज दर तय करते हैं। इससे ग्राहकों को यह समझने में दिक्कत होती है, कि उनकी ईएमआई या कुल ब्याज पेमेंट कैसे तय की जाएगी?

भारतीय रिजर्व बैंक

आरबीआई ब्याज दरों से जुड़े नियमों में करेगा बदलाव, जल्द जारी होंगे मसौदा दिशा-निर्देश (Photo: Shutterstock)

भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India, RBI) ने बुधवार को बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए कर्ज पर ब्याज दरों से जुड़ी नियामकीय रूपरेखा को अधिक आसान, तर्कसंगत (Rational) और सिद्धांत-आधारित (Principle based) बनाने का प्रस्ताव रखा। इस कदम का उद्देश्य विभिन्न वित्तीय संस्थानों के बीच ब्याज दर निर्धारण के नियमों में एकरूपता लाना, ट्रांसपैरेंसी बढ़ाना और ग्राहकों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना है। रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर की तीसरी मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा, ‘कर्ज पर ब्याज दरों में पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ताओं के हितों को मजबूत करने के उद्देश्य से सभी विनियमित संस्थाओं के लिए ब्याज दरों से संबंधित नियामकीय रूपरेखा में एकरूपता लाने और मानकीकृत करने का प्रस्ताव है।’ आरबीआई के मुताबिक, प्रस्तावित बदलावों के तहत उसके दायरे में आने वाले सभी विनियमित संस्थाओं (बैंक, एनबीएफसी आदि) के लिए ब्याज दर संबंधी दिशा-निर्देशों को युक्तिसंगत बनाया जाएगा, जबकि संस्थानों के आकार और प्रकृति के अनुसार आवश्यक लचीलापन भी बरकरार रखा जाएगा।

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इस पहल के तहत मौजूदा कोष की सीमांत लागत आधारित ब्याज दर (Marginal Cost of Funds-based Lending Rate, MCLR) और बाह्य मानक ब्याज दर (External Benchmark Lending Rate, EBLR) व्यवस्था से जुड़े कुछ परिचालन संबंधी मुद्दों का समाधान भी किया जाएगा। साथ ही, केंद्रीय बैंक ब्याज की कैलकुलेशन के लिए अपनाई जाने वाली 'डे काउंट कन्वेंशन' (दिनों के कैलकुलेशन सिस्टम) और बेंचमार्क रीसेट डेट्स जैसी अलग-अलग प्रचलित बाजार गतिविधियों को भी मानकीकृत करेगा, ताकि सभी बैंकों के बीच एक समान व्यवस्था लागू हो सके। आरबीआई का मानना है कि इन प्रस्तावित उपायों से कर्ज मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता बढ़ेगी, मौद्रिक नीति के फैसलों का असर ग्राहकों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा, ब्याज दरों के निर्धारण में एकरूपता आएगी और उपभोक्ताओं के हितों को और मजबूती मिलेगी। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि इन प्रस्तावों को शामिल करते हुए दिशानिर्देशों का मसौदा जल्द जारी किया जाएगा।

अभी क्या हैं नियम और क्यों बदलाव की जरूरत?

मौजूदा समय में कई बैंक और वित्तीय संस्थान अलग-अलग तरह के लोन पर अलग-अलग तरीके से ब्याज दर तय करते हैं। इससे ग्राहकों को यह समझने में दिक्कत होती है, कि उनकी ईएमआई या कुल ब्याज पेमेंट कैसे तय की जाएगी? नए नियमों के लागू होने के बाद ब्याज दर तय करने का प्रोसेस पहले से ज्यादा क्लियर और एक जैसा हो सकता है। आरबीआई का मानना है कि ऐसा करने से ब्याज दर को लेकर ग्राहकों में विश्वास बढ़ेगा साथ ही बैंक और वित्तीय संस्थान ब्याज दरों में बदलाव करने के लिए एक क्लियर तय प्रोसेस का पालन करेंगे। इससे ग्राहकों को यह जानने में आसानी होगी कि ब्याज दर कब और किन कारणों से बदली गई है। इसका असर होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन या अन्य तरह के लोनों पर देखने को मिल सकता है।

PTI इनपुट के साथ

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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