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  1. ईरान को ट्रंप का एक और अल्टीमेटम, कहा- वॉशिंगटन से समझौते का अब आखिरी मौका

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ईरान को ट्रंप का एक और अल्टीमेटम, कहा- वॉशिंगटन से समझौते का अब आखिरी मौका

Namita Shukla

4 min read | अपडेटेड August 04, 2026, 13:12 IST

सारांश

अमेरिका ने ईरान पर अटैक रोके तो हैं, लेकिन शांति वार्ता को लेकर देशों के दावे एक-दूसरे से काफी अलग हैं, जो इस ओर इशारा करता है कि इन दोनों देशों के बीच अभी स्थिति काफी बिगड़ी हुई सी है।

डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिका की ओर से फिर मिला ईरान को अल्टीमेटम (Photo: Shutterstock)

अमेरिका और ईरान के बीच टेंशन फिलहाल खत्म होती दिख नहीं रही है। अमेरिका ने ईरान पर अटैक रोके तो हैं, लेकिन शांति वार्ता को लेकर देशों के दावे एक-दूसरे से काफी अलग हैं, जो इस ओर इशारा करता है कि इन दोनों देशों के बीच अभी स्थिति काफी बिगड़ी हुई सी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान को वॉशिंगटन के साथ समझौता करने का आखिरी मौका दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि ईरान और कई खाड़ी देशों के कूटनीति अपनाने के आग्रह के बाद एक नियोजित सैन्य हमले को रोक दिया गया था। ओवल ऑफिस में बोलते हुए, ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान पर बड़ा हमला करने के लिए तैयार था, लेकिन बातचीत जारी रखने के लिए सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान से फोन आने के बाद इस कार्रवाई को टाल दिया गया।

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ट्रंप ने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से फिर से खोलने के लिए बातचीत चल रही है, जो शायद कल तक हो सकती है। उन्होंने इसे पहला राउंड बताया और कहा कि दूसरे राउंड में ईरान के परमाणु-निरस्त्रीकरण पर ध्यान दिया जाएगा, हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिका के साथ डायरेक्ट या इनडायरेक्ट बातचीत की खबरों का खंडन करते हुए कहा कि तेहरान वॉशिंगटन के साथ बातचीत नहीं कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में ईरान और ओमान के बीच हुआ समुद्री समझौता केवल जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक तकनीकी कदम था और इसका मतलब यह नहीं है कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल दिया गया है।

ट्रंप ने ईरान पर लगाए ये आरोप

ट्रंप ने फिर से ईरान पर आरोप लगाया कि वह सार्वजनिक रूप से बातचीत से इनकार करता है जबकि निजी तौर पर बातचीत में शामिल रहता है। उन्होंने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, ट्रंप ने सैन्य परिवारों के समर्थन के लिए पहली बार 'प्रेसिडेंशियल मिलिट्री स्पाउस कमीशन' बनाने वाले एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए। इस साल फरवरी के अंत में दोनों देशों के बीच युद्ध शुरू हुआ था। इसके बाद जून में दोनों देशों ने एक इंटरिम डील साइन की थी। जिसके बाद कुछ समय के लिए युद्ध विराम रहा। हालांकि यह शांति ज्यादा दिन तक नहीं रही और जुलाई में एक बार फिर दोनों देशों के बीच गहमागहमी हुई और युद्ध दोबारा शुरू हो गया।

अमेरिका-ईरान के बीच इस साल अभी तक क्या-क्या हुआ?

28 फरवरी: 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' शुरू हुआ, जिसमें ईरान के मिलिट्री कमांड, एयर डिफेंस और लीडरशिप को निशाना बनाते हुए अमेरिका और इजराइल ने लगभग 900 संयुक्त हवाई हमले किए। इन हमलों में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई मारे गए।
1–7 मार्च: ईरान ने गठबंधन के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय ड्रोन और मिसाइल हमले करके जवाबी कार्रवाई की। इन घटनाओं में कुवैत में अमेरिकी सैनिकों की मौत वाला ड्रोन हमला और श्रीलंका के पास एक अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत को डुबोना शामिल था। अमेरिका में गैस पंप की कीमतें $3.98 प्रति गैलन से ऊपर चली गईं।
17 जून: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी अधिकारियों ने जिनेवा में पाकिस्तान की मध्यस्थता से एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसमें परमाणु गतिविधियों को कम करने के बदले नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने पर सहमति बनी।
7–8 जुलाई: ईरानी धरती पर अमेरिका के नए जवाबी हमलों के बाद यह नाजुक शांति खत्म हो गई, राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्धविराम के खत्म होने की घोषणा की, जिससे फिर से हवाई बमबारी शुरू हो गई।
जुलाई के आखिर में: मध्यस्थों द्वारा कराई गई लड़ाई में कुछ समय की शांति ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी, क्योंकि हूथी और मिलिशिया प्रॉक्सी ने क्षेत्रीय हमले जारी रखे और मध्य पूर्व के एनर्जी हब के पास स्थानीय स्तर पर तनाव बढ़ता रहा। अब एक बार फिर दोनों देशों के बीच बातचीत की चर्चा है, लेकिन इसका रिजल्ट कब तक आएगा, इसके बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है।

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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