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6 min read | अपडेटेड August 05, 2026, 10:38 IST
सारांश
रेपो रेट को स्थिर रखने के साथ-साथ आरबीआई ने दूसरी प्रमुख ब्याज दरों में भी कोई बदलाव नहीं किया है। रिजर्व बैंक ने स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी दर को 5% पर बरकरार रखा है। वहीं मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी दर और बैंक दर को भी 5.5% पर ही स्थिर रखा गया है।

RBI MPC बैठक का आज आया फैसला।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई MPC बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर बिना किसी बदलाव के बरकरार रखा गया है। इसके साथ ही SDF रेट 5% और MSF और बैंक रेट 5.5% पर स्थिर हैं। रिजर्व बैंक ने जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 10 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 6.6% कर दिया है। महंगाई के मोर्चे पर दूसरी तिमाही के लिए CPI अनुमान को घटाकर 4.7% और चौथी तिमाही के लिए बढ़ाकर 5.5% किया गया है। जून से बैंकिंग सिस्टम में औसतन 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी बनी हुई है। इन फैसलों के बाद शेयर बाजार में तेजी देखी गई और सेंसेक्स 300 से ज्यादा अंक चढ़ गया।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों की लाइसेंसिंग प्रक्रिया दोबारा शुरू करने के लिए जल्द ही ड्राफ्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही वर्ष 2008 के बाद पहली बार ग्रामीण को-ऑपरेटिव बैंकों की क्रेडिट मॉनिटरिंग व्यवस्था की समीक्षा कर नए निर्देश लाए जा रहे हैं। इसके अलावा रिजर्व बैंक ने सभी रेगुलेटेड एंटिटीज के लिए कर्ज पर लगने वाली ब्याज दरों के नियमों को एक समान और स्टैंडराइज करने का प्रस्ताव भी रखा है।
जून महीने से ही देश की बैंकिंग प्रणाली में औसत नकदी यानी लिक्विडिटी का स्तर लगातार 1 लाख करोड़ रुपये से ऊपर बना हुआ है। बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी की यह स्थिति लगातार मजबूत बनी हुई है, जिससे बाजार में पैसों की उपलब्धता बेहतर हुई है और बैंकों के पास फंड की कोई कमी नहीं है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, मानसून के दौरान नकदी की वापसी, सरकारी कैश बैलेंस के इस्तेमाल और विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के कदमों से आने वाले समय में बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी सुधरने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि कीमती धातुओं को छोड़कर कोर इंफ्लेशन के सामान्य कोर इंफ्लेशन से कम रहने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष के अंत तक इसके बराबर आ सकता है। इसके अलावा, जुलाई के महीने में कमर्शियल पेपर्स और सर्टिफिकेट्स ऑफ डिपॉजिट जैसी शॉर्ट-टर्म मनी मार्केट की दरों में भी नरमी देखने को मिली है।
आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 10 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 6.6% कर दिया है। रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने के फैसले के बाद शेयर बाजार में भी जोरदार तेजी देखने को मिल रही है, जिससे सेंसेक्स 300 अंकों से ज्यादा चढ़ गया है और निफ्टी 24,600 के स्तर के पास पहुंच गया है।
आरबीआई ने चौथी तिमाही के लिए सीपीआई अनुमान को 5.4% से बढ़ाकर 5.5% कर दिया है, साथ ही अर्थव्यवस्था पर अल नीनो का बड़ा असर पड़ने की संभावना जताई है। वहीं दूसरी तिमाही के लिए सीपीआई अनुमान को 5.1% से घटाकर 4.7% कर दिया गया है, वहीं तीसरी तिमाही में इसके 5.9% पर रहने का अनुमान है। बाजार में क्रेडिट ग्रोथ की बढ़त लगातार जारी है। नीतिगत फैसलों के असर से 2036 के 6.94% वाले बॉन्ड की यील्ड 0.04 यानी 0.65% गिरकर 6.7729 पर आ गई है।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से प्रमुख व्यापारिक रास्ते बाधित हो रहे हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। हालांकि, देश की आर्थिक वृद्धि दर को मजबूत मांग से अच्छा समर्थन मिल रहा है, जिससे अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अपनी स्पीच में बताया कि उम्मीद के मुताबिक रिटेल महंगाई दर तय लक्ष्य से ऊपर निकल गई है। उन्होंने कहा कि महंगाई में इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह खाद्य पदार्थों और ईंधन की ऊंची कीमतें हैं, जबकि कोर इंफ्लेशन अभी भी नियंत्रण में बना हुआ है। गवर्नर के मुताबिक, इस साल की तीसरी तिमाही में महंगाई अपने पीक पर पहुंच सकती है, जिसके बाद इसमें गिरावट आने और स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है।
रेपो रेट को स्थिर रखने के साथ-साथ आरबीआई ने दूसरी प्रमुख ब्याज दरों में भी कोई बदलाव नहीं किया है। रिजर्व बैंक ने स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी दर को 5% पर बरकरार रखा है। वहीं मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी दर और बैंक दर को भी 5.5% पर ही स्थिर रखा गया है।
भारतीय रिजर्व बैंक की एमपीसी बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर ही बनाए रखने और न्यूट्रल रुख अपनाने का फैसला किया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने नीतिगत फैसलों का ऐलान करते हुए बताया कि ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है।
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति यानी एमपीसी की बैठक के नतीजों का ऐलान होने जा रहा है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अपना संबोधन शुरू कर दिया है, जिस पर पूरे बाजार की निगाहें बनी हुई हैं।
दुनिया भर के आर्थिक हालातों पर बात करते हुए रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पहले ही कहा था कि वेस्ट एशिया में लगातार जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता काफी ज्यादा बढ़ी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया था कि पिछले कुछ महीनों में ग्लोबल इकोनॉमी पर बढ़ती अनिश्चितता, मुख्य ट्रेड रूट्स और सप्लाई चेन में पैदा हुई रुकावटों, मार्केट में बढ़ी वोलेटिलिटी और सतर्क बिजनेस सेंटिमेंट का सीधा असर पड़ा है। इन सभी वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ही रिजर्व बैंक अपनी मॉनेटरी पॉलिसी के फैसले तय कर रहा है।
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा सुबह 10 बजे आधिकारिक तौर पर मॉनेटरी पॉलिसी के फैसलों को देश के सामने रखेंगे। इस ऐलान से देश की इकोनॉमी की चाल, ब्याज दरों की स्थिति और फ्यूचर के आर्थिक रुख पर तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी। चालू फाइनेंशियल ईयर के लिए रिजर्व बैंक ने एवरेज इन्फ्लेशन का अनुमान 5.1% पर रखा है। पूरी उम्मीद जताई जा रही है कि सेंट्रल बैंक बिना किसी बड़े फेरबदल के अपने इसी पुराने अनुमान को आगे भी बरकरार रख सकता है।
इससे पहले जून महीने में हुई मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू के दौरान भी रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 5.25 पर्सेंट पर ही स्थिर रखने का फैसला किया था। जून में 3 तारीख से 5 तारीख के बीच आयोजित MPC की बैठक में पॉलिसी के न्यूट्रल रुख को कायम रखा गया था। इसके साथ ही स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी यानी SDF रेट को 5% पर बनाए रखा गया था। वहीं दूसरी तरफ मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी यानी MSF रेट और बैंक रेट को भी 5.5% पर ही बनाए रखने का निर्णय लिया गया था।
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