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5 min read | अपडेटेड August 05, 2026, 10:54 IST
सारांश
RBI ने चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान 5% रखा है। तिमाही आधार पर Q1 में 5.3%, Q2 में 4.7%, Q3 में 5.9% और Q4 में 5.5% महंगाई रहने का अनुमान है। वहीं पूरे वित्त वर्ष के लिए कोर महंगाई 4.3% रहने का अनुमान लगाया गया है।

RBI गवर्नर ने कहा कि अल नीनो के कारण बारिश के समय और वितरण पर असर पड़ सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की 3 दिनों की मीटिंग के नतीजे आज 05 अगस्त को आ गए हैं। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि अगस्त 2026 की बैठक में भी रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा गया है। यह लगातार चौथी बार है, जब RBI ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक ने आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और खुदरा महंगाई (CPI) को नियंत्रण में रखने के लिए अपना Neutral Stance भी बरकरार रखा है। यहां हमने संजय मल्होत्रा की स्पीच की 10 बड़ी बातें बताई है।
आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान 5% रखा है। तिमाही आधार पर Q1 में 5.3%, Q2 में 4.7%, Q3 में 5.9% और Q4 में 5.5% महंगाई रहने का अनुमान है। वहीं पूरे वित्त वर्ष के लिए कोर महंगाई 4.3% रहने का अनुमान लगाया गया है।
आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक विकास दर (GDP Growth) का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया है। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक को भारतीय अर्थव्यवस्था के पहले के अनुमान से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। आरबीआई के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) में जीडीपी वृद्धि दर 7% रह सकती है। दूसरी तिमाही (Q2) में यह 6.4%, तीसरी तिमाही (Q3) में 6.5% और चौथी तिमाही (Q4) में 6.8% रहने का अनुमान है।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि केंद्रीय बैंक शहरी सहकारी बैंकों को नए लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया फिर से शुरू करने के लिए ड्राफ्ट गाइडलाइन जारी कर रहा है। आरबीआई ने ग्रामीण सहकारी बैंकों की कर्ज निगरानी व्यवस्था की व्यापक समीक्षा के बाद नए मसौदा निर्देश भी जारी किए हैं। केंद्रीय बैंक ने कहा कि मौजूदा ढांचे में आखिरी बड़ा संशोधन 2008 में हुआ था। इसके बाद मिले अनुभव और बैंकिंग क्षेत्र में हुए बदलावों को ध्यान में रखते हुए अब इसे अपडेट किया जा रहा है।
आरबीआई ने सभी रेगुलेटेड एंटिटीज के लिए कर्ज पर लगने वाली ब्याज दरों से जुड़े नियमों को एक समान और मानकीकृत (Standardised) बनाने का प्रस्ताव रखा है। इससे अलग-अलग संस्थानों में ब्याज दर तय करने के नियमों में एकरूपता आएगी और ग्राहकों के लिए व्यवस्था अधिक पारदर्शी होगी।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर लागत बढ़ने का दबाव आ सकता है, लेकिन वैश्विक सप्लाई चेन में बढ़ते बदलाव और विविधीकरण से इसका असर कम होने की उम्मीद है।उन्होंने कहा कि मजबूत घरेलू मांग के कारण सर्विस सेक्टर की रफ्तार बनी रहेगी। अच्छी सर्विस गतिविधियों और रोजगार की स्थिर स्थिति से शहरों में लोगों का खर्च बढ़ता रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत द्वारा हाल में किए गए द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Trade Agreements) और भारतीय कंपनियों के नए बाजारों में विस्तार की कोशिशों से निर्यात को भी फायदा मिलेगा।
RBI गवर्नर ने कहा कि अल नीनो के कारण बारिश के समय और वितरण पर असर पड़ सकता है, जो महंगाई के लिए बड़ा जोखिम है। वहीं भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भी लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर खाद्य, ईंधन और अन्य कच्चे माल की बढ़ी हुई लागत का असर दूसरी वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर पड़ता है, तो महंगाई और बढ़ सकती है।
गवर्नर ने कहा कि मानसून के दौरान बाजार में नकदी की वापसी, सरकार के नकद भंडार में कमी और विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदमों से आने वाले समय में बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि जुलाई में कमर्शियल पेपर (CP) और सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CD) जैसी अल्पकालिक उधारी की ब्याज दरों में भी कमी देखने को मिली।
संजय मल्होत्रा ने कहा कि देश के अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (Scheduled Commercial Banks) की पूंजी, नकदी, एसेट क्वालिटी और मुनाफा मजबूत बना हुआ है। हालांकि पिछले साल की तुलना में नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में कुछ कमी आई है। उन्होंने कहा कि NBFC की वित्तीय स्थिति भी अच्छी है। इनके पास पर्याप्त पूंजी है, खराब कर्ज (NPA) कम हुआ है और मुनाफे में भी सुधार हुआ है।
गवर्नर ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद पिछले साल भारत का चालू खाता घाटा नियंत्रित रहा। अप्रैल-मई के दौरान भारत के चालू खाते में 2.8 अरब डॉलर का सरप्लस दर्ज किया गया, जिसकी वजह सेवाओं का मजबूत निर्यात और विदेश से आने वाला पैसा रहा।
हालांकि पहली तिमाही में व्यापार घाटा बढ़कर करीब 86 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में लगभग 69 अरब डॉलर था। इसकी मुख्य वजह कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान और सोने का अधिक आयात रहा।
मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक व्यापार की धीमी रफ्तार, ऊर्जा कीमतों में तेजी और व्यापार नीतियों से जुड़ी अनिश्चितताएं आगे चलकर चालू खाते के घाटे को बढ़ा सकती हैं। हालांकि भारत-यूके व्यापार समझौते और अन्य नए व्यापार समझौतों के लागू होने, मजबूत सर्विस एक्सपोर्ट और विदेश से आने वाले धन से इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत में सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 30.7 अरब डॉलर रहा, जो विदेशी निवेशकों का भारत पर मजबूत भरोसा दिखाता है।
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