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  1. RBI का बड़ा फैसला, अकाउंट एग्रीगेटर्स के बीच इंटरऑपरेबिलिटी को मंजूरी, आसान होगा फाइनेंशियल डेटा शेयरिंग

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RBI का बड़ा फैसला, अकाउंट एग्रीगेटर्स के बीच इंटरऑपरेबिलिटी को मंजूरी, आसान होगा फाइनेंशियल डेटा शेयरिंग

Upstox

3 min read | अपडेटेड October 07, 2026, 12:55 IST

सारांश

अभी तक Account Aggregator सिस्टम में डेटा शेयरिंग कई बार किसी खास प्लेटफॉर्म से जुड़ी रहती थी। RBI के इस फैसले से इस तरह की रुकावट कम होगी और अलग-अलग Account Aggregator के बीच वित्तीय डेटा का प्रवाह आसान हो सकेगा।

RBI

डेटा शेयरिंग पहले की तरह ग्राहक की सहमति यानी कंसेंट पर आधारित रहेगी।

भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने NBFC अकाउंट एग्रीगेटर्स (NBFC-AAs) के बीच इंटरऑपरेबिलिटी की अनुमति दे दी है। इसका मतलब है कि अब अगर कोई ग्राहक एक अकाउंट एग्रीगेटर पर रजिस्टर्ड है, तो वह दूसरे अकाउंट एग्रीगेटर का इस्तेमाल करने वाली बैंक, NBFC या दूसरी रेगुलेटेड वित्तीय संस्था के साथ भी अपनी वित्तीय जानकारी शेयर कर सकेगा। अभी तक अकाउंट एग्रीगेटर सिस्टम में डेटा शेयरिंग कई बार किसी खास प्लेटफॉर्म से जुड़ी रहती थी। RBI के इस फैसले से इस तरह की रुकावट कम होगी और अलग-अलग अकाउंट एग्रीगेटर के बीच वित्तीय डेटा का प्रवाह आसान हो सकेगा।

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ग्राहकों को क्या फायदा होगा?

ग्राहकों के लिए इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि उन्हें अपनी पसंद का अकाउंट एग्रीगेटर बदलने या अलग-अलग वित्तीय संस्थाओं के लिए अलग व्यवस्था करने की जरूरत कम होगी। वे अपने चुने हुए अकाउंट एग्रीगेटर के जरिए अपनी वित्तीय जानकारी उन बैंकों, NBFCs और दूसरी रेगुलेटेड वित्तीय संस्थाओं के साथ शेयर कर सकेंगे, जो इस नेटवर्क का हिस्सा हैं।

हालांकि, डेटा शेयरिंग पहले की तरह ग्राहक की सहमति यानी कंसेंट पर आधारित रहेगी। इसका मतलब है कि ग्राहक की अनुमति के बिना उसकी वित्तीय जानकारी किसी संस्था के साथ शेयर नहीं की जाएगी।

अब कौन-कौन सी जानकारी शेयर हो सकेगी?

RBI ने सिर्फ अकाउंट एग्रीगेटर के बीच डेटा शेयरिंग को आसान नहीं बनाया है, बल्कि इस सिस्टम के तहत उपलब्ध कराई जा सकने वाली वित्तीय जानकारी का दायरा भी बढ़ाया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अब बैंक डिपॉजिट के साथ-साथ डेट और इक्विटी निवेश से जुड़ी जानकारी भी शेयर की जा सकेगी। यानी ग्राहक की अलग-अलग तरह की वित्तीय संपत्तियों की जानकारी एक व्यापक डिजिटल फ्रेमवर्क के तहत उपलब्ध हो सकेगी।

अकाउंट एग्रीगेटर सिस्टम क्या करता है?

अकाउंट एग्रीगेटर एक ऐसा सिस्टम है, जो ग्राहक की अनुमति के आधार पर वित्तीय जानकारी उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं और उस जानकारी का इस्तेमाल करने वाली रेगुलेटेड वित्तीय संस्थाओं के बीच डेटा शेयर करने की सुविधा देता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति को लोन लेना है, तो उसकी अनुमति से बैंक या NBFC उसकी वित्तीय स्थिति से जुड़ी जरूरी जानकारी अकाउंट एग्रीगेटर सिस्टम के जरिए प्राप्त कर सकता है। इसके लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म के साथ अलग डेटा-शेयरिंग व्यवस्था बनाने की जरूरत कम हो सकती है।

लोन लेने वालों को भी हो सकता है फायदा

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अकाउंट एग्रीगेटर के बीच डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर की इंटरऑपरेबिलिटी और ज्यादा व्यापक कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट खास तौर पर ऐसे समय में अहम हैं, जब ब्याज दरों का माहौल कड़ा है और लोन देने के फैसलों के लिए समय पर और भरोसेमंद ग्राहक डेटा की जरूरत बढ़ जाती है।

कुल मिलाकर, RBI के इस बदलाव का उद्देश्य अकाउंट एग्रीगेटर सिस्टम को ज्यादा एकीकृत बनाना और वित्तीय डेटा को ग्राहक की सहमति के आधार पर अलग-अलग रेगुलेटेड संस्थाओं तक पहुंचाना आसान बनाना है। इससे ग्राहकों के लिए डेटा शेयरिंग की प्रक्रिया सरल हो सकती है और बैंकों व दूसरे वित्तीय संस्थानों के लिए भी ग्राहकों की वित्तीय जानकारी तक पहुंच ज्यादा सहज हो सकती है।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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