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  1. अब तो FD करने वालों की हो जाएगी मौज? RBI के इस फैसले से ज्यादा मिलेगा ब्याज

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अब तो FD करने वालों की हो जाएगी मौज? RBI के इस फैसले से ज्यादा मिलेगा ब्याज

Upstox

3 min read | अपडेटेड October 07, 2026, 12:22 IST

सारांश

आरबीआई ने रेपो रेट को 0.25% बढ़ाकर 5.50% कर दिया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि एमपीसी ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया। इस फैसले से नई एफडी कराने वालों को आगे बेहतर ब्याज मिल सकता है, जबकि फ्लोटिंग लोन लेने वालों की EMI या टेन्यूर बढ़ सकता है।

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आरबीआई द्वारा रेपो रेट 5.50% किए जाने के बाद एफडी और लोन पर पड़ने वाला असर।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई ने 7 अक्टूबर को पॉलिसी रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स यानी 0.25% की बढ़ोतरी कर दी है, जिसके बाद रेपो रेट बढ़कर 5.50% हो गया है। फरवरी 2023 के बाद से सेंट्रल बैंक द्वारा किया गया यह पहला रेट हाइक है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी यानी एमपीसी ने सर्वसम्मति से ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला लिया है। पिछले चार पॉलिसी रिव्यू से रेपो रेट 5.25% पर बरकरार था। महंगाई के नए दबाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और सख्त ग्लोबल फाइनेंशियल स्थितियों के बीच ब्याज दर चक्र में यह बड़ा बदलाव देखने को मिला है। इस फैसले का FD निवेशकों, लोन ग्राहकों और डेट इन्वेस्टमेंट्स पर अलग-अलग असर पड़ेगा।

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FD निवेशकों के लिए क्या हैं इस फैसले के मायने?

फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD कराने वाले निवेशकों के लिए रेपो रेट में बढ़ोतरी आगे चलकर बेहतर रिटर्न का मौका ला सकती है। जब रेपो रेट बढ़ता है, तो बैंक अपनी फंडिंग कॉस्ट और डिपॉजिट हासिल करने की होड़ के हिसाब से नए FD डिपॉजिट्स पर ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं। हालांकि यह बदलाव तुरंत या ऑटोमैटिक नहीं होता है। बैंक अपनी लिक्विडिटी स्थिति, फंड की जरूरतों और मार्केट की स्थितियों के आधार पर FD की दरें तय करते हैं।

रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि FD दरें भी सीधे उतनी ही बढ़ जाएंगी। जिन निवेशकों ने पहले से FD करा रखी है, उनकी मैच्योरिटी तक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा। इस बढ़ोतरी का फायदा नई FD कराने या पुरानी FD को रिन्यू कराने पर ही मिलेगा। FD सेविंग करने वालों को सलाह दी जाती है कि वे यह न मानें कि हर बैंक तुरंत दरें बढ़ा देगा। अपना पैसा लॉक करने से पहले अलग-अलग बैंकों की नई दरों, अलग-अलग टेन्यूर, प्री-मैच्योर विड्रॉल की शर्तों और अपनी लिक्विडिटी जरूरतों की तुलना जरूर कर लें।

आरबीआई ने क्यों बढ़ाया रेपो रेट?

आरबीआई ने यह फैसला महंगाई के बढ़ते जोखिम, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और रुपए पर दबाव के चलते लिया है। अगस्त के महीने में रिटेल महंगाई दर बढ़कर 4.82% पर पहुंच गई थी, जो आरबीआई के 4% के मीडियम टर्म टारगेट से अधिक है। एनर्जी की कीमतें बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन और इनपुट कॉस्ट बढ़ जाती है, जिससे चौतरफा महंगाई बढ़ती है। इसके अलावा सख्त ग्लोबल फाइनेंशियल स्थितियों और अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से भारत जैसे उभरते बाजारों पर चुनौतियां बढ़ी हैं।

डेट और फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टमेंट्स की बात करें तो इसका असर मिला-जुला रहेगा। नई FD या डेट प्रोडक्ट्स में पैसा लगाने वालों को ऊंची यील्ड का फायदा मिल सकता है, लेकिन यील्ड बढ़ने से मौजूदा बॉन्ड्स की कीमतों पर दबाव आ सकता है। इसलिए निवेशकों को सिर्फ हेडलाइन यील्ड देखने के बजाय अपने इन्वेस्टमेंट होराइजन, ड्यूरेशन, क्रेडिट क्वालिटी और लिक्विडिटी जरूरतों को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए।

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Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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