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  1. PPF, EPF या NPS: रिटायरमेंट के लिए कौन सा निवेश देगा सबसे बड़ा फंड? अपनी जरूरत के हिसाब से लें फैसला

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PPF, EPF या NPS: रिटायरमेंट के लिए कौन सा निवेश देगा सबसे बड़ा फंड? अपनी जरूरत के हिसाब से लें फैसला

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड June 11, 2026, 17:17 IST

सारांश

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) सरकार समर्थित लंबी अवधि की बचत योजना है। यह टैक्स के लिहाज से EEE कैटेगरी में आता है। यानी निवेश, इस पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी की रकम पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है।

PPF EPF

EPF ज्यादातर नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए अनिवार्य रिटायरमेंट बचत योजना है।

रिटायरमेंट के बाद सुकून की जिंदगी के लिए आर्थिक आजादी होना जरूरी है। हर कोई चाहता है कि उसके पास रिटायरमेंट के बाद इतना पैसा हो कि जिंदगी आराम से गुजर जाए। हालांकि, बड़ा सवाल यह होता है कि इसके लिए निवेश कहां किया जाए। रिटायरमेंट के लिहाज से नौकरीपेशा लोगों के पास कई बचत विकल्प हैं, जिनमें EPF, PPF और NPS सबसे लोकप्रिय हैं। तीनों योजनाओं का मकसद रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा देना है, लेकिन इनके नियम, रिटर्न और फायदे अलग-अलग हैं। इसलिए निवेश करने से पहले इनके बारे में समझना जरूरी है।

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PPF: सुरक्षित और टैक्स-फ्री बचत का विकल्प

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) सरकार समर्थित लंबी अवधि की बचत योजना है। यह टैक्स के लिहाज से EEE कैटेगरी में आता है। यानी निवेश, इस पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी की रकम पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है। इस योजना में 15 साल का लॉक-इन होता है और हर वित्त वर्ष में कम से कम 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये निवेश किए जा सकते हैं।

अगर कोई व्यक्ति 30 साल तक हर साल 1.5 लाख रुपये निवेश करता है और ब्याज दर 7.1% बनी रहती है, तो उसका कुल निवेश 45 लाख रुपये होगा। इस पर करीब 1.09 करोड़ रुपये ब्याज मिलेगा और मैच्योरिटी पर कुल रकम लगभग 1.54 करोड़ रुपये हो सकती है।

EPF: नौकरीपेशा लोगों के लिए अनिवार्य बचत योजना

एम्प्लॉयी प्रोविडेंट फंड (EPF) ज्यादातर नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए अनिवार्य रिटायरमेंट बचत योजना है। इसमें कर्मचारी और कंपनी दोनों कर्मचारी के बेसिक वेतन का 12-12% योगदान करते हैं। फिलहाल EPF पर 8.25% सालाना ब्याज मिल रहा है।

इस योजना की खास बात यह है कि कर्मचारी चाहें तो Voluntary Provident Fund (VPF) के जरिए 12% से ज्यादा योगदान भी कर सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति की उम्र 30 साल है, बेसिक सैलरी 50,000 रुपये महीना है और वेतन हर साल 5% बढ़ता है, तो 60 साल की उम्र तक उसका EPF कॉर्पस करीब 2.6 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS)

NPS एक मार्केट-लिंक्ड रिटायरमेंट योजना है। इसमें 18 से 70 साल तक का कोई भी भारतीय नागरिक निवेश कर सकता है। यह योजना शेयर बाजार और डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करती है, इसलिए लंबे समय में ज्यादा रिटर्न देने की क्षमता रखती है।

मान लीजिए कोई व्यक्ति 30 साल की उम्र से हर महीने 12,500 रुपये NPS में निवेश करता है और उसे औसतन 10% सालाना रिटर्न मिलता है। ऐसे में 60 साल की उम्र तक उसका कुल पेंशन कॉर्पस करीब 2.85 करोड़ रुपये हो सकता है। नियमों के अनुसार, 60% रकम यानी करीब 1.71 करोड़ रुपये एकमुश्त टैक्स-फ्री निकाली जा सकती है, जबकि बाकी 40% रकम से एन्युटी खरीदनी होती है। यदि एन्युटी पर 8% रिटर्न मिले, तो व्यक्ति को लगभग 76,000 रुपये महीने पेंशन मिल सकती है।

कौन सा विकल्प बेहतर है?

तीनों योजनाओं के अपने फायदे हैं। PPF सबसे सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न वाला विकल्प है। EPF भी सुरक्षित है और इसमें कंपनी का योगदान मिलने से कॉर्पस तेजी से बढ़ता है। वहीं NPS बाजार से जुड़ा होने के कारण सबसे बड़ा रिटायरमेंट फंड बनाने की क्षमता रखता है, लेकिन इसमें जोखिम भी शामिल है।

इसी वजह से एक्सपर्ट्स अक्सर सलाह देते हैं कि निवेशक अपनी जरूरत, जोखिम उठाने की क्षमता और रिटायरमेंट लक्ष्य के अनुसार इन योजनाओं का संतुलित मिश्रण चुनें, ताकि लंबी अवधि में बेहतर और स्थिर रिटर्न मिल सके। हर किसी की जरूरत और रिस्क लेने की क्षमता अलग-अलग होती है। ऐसे में कोई भी फैसला अपनी जरूरत के अनुसार और एक्सपर्ट्स की सालह से ही लेना चाहिए।

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