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  1. कार एक्सीडेंट के बाद नहीं अटकेगा इंश्योरेंस क्लेम, बस इन 5 गलतियों को करने से बचें

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कार एक्सीडेंट के बाद नहीं अटकेगा इंश्योरेंस क्लेम, बस इन 5 गलतियों को करने से बचें

Upstox

3 min read | अपडेटेड June 11, 2026, 16:09 IST

सारांश

गाड़ी का एक्सीडेंट होने पर इंश्योरेंस क्लेम जल्दी सेटल होना बड़ी राहत देता है। लेकिन कई बार क्लेम अटक जाता है या रिजेक्ट हो जाता है। इंश्योरेंस कंपनी को समय पर सूचना न देना, जरूरी दस्तावेज न होना, एफआईआर दर्ज न कराना और पॉलिसी की शर्तें न समझना क्लेम लटकने की बड़ी वजहें हैं।

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कार इंश्योरेंस क्लेम करते समय इन जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है।| Image: Shutterstock

हादसे के बाद अक्सर लोग परेशान हो जाते हैं और जल्दबाजी में कई ऐसे कदम उठा लेते हैं जो उनके लिए नुकसानदेह साबित होते हैं। कार का एक्सीडेंट होना अपने आप में एक बड़ा झटका होता है। ऐसे कठिन समय में सबसे बड़ी राहत तब मिलती है जब गाड़ी का इंश्योरेंस क्लेम जल्दी से सेटल हो जाए और गाड़ी बिना किसी परेशानी के ठीक होकर वापस आ जाए। लेकिन कई बार देखने को मिलता है कि कार इंश्योरेंस का क्लेम बीच में ही अटक जाता है या फिर कंपनी उसे पास करने में बहुत लंबा समय लगा देती है। ज्यादातर लोग इस देरी के लिए सीधे तौर पर इंश्योरेंस कंपनी को ही जिम्मेदार ठहराने लगते हैं।

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कंपनी को समय पर सूचना न देना पड़ता है भारी

एक्सीडेंट होने के बाद सबसे पहला और महत्वपूर्ण काम इंश्योरेंस कंपनी को सूचित करना होता है। इसमें होने वाली देरी क्लेम रिजेक्ट होने की सबसे बड़ी और आम वजह बनती है। ज्यादातर इंश्योरेंस कंपनियां चाहती हैं कि हादसे के 24 से 48 घंटे के भीतर उन्हें हर हाल में जानकारी दे दी जाए। अगर आप इसमें बहुत ज्यादा देरी करते हैं तो कंपनी को पूरी घटना पर शक होने लगता है। इस शक की वजह से कंपनी मामले की जांच शुरू कर देती है और आपका क्लेम लंबे समय के लिए अटक जाता है। इसलिए समय पर जानकारी देना बेहद जरूरी है।

अधूरे और गलत दस्तावेज बढ़ा देते हैं मुश्किल

क्लेम की प्रोसेस को तेज करने के लिए सभी कागजात का पूरी तरह से सही होना बहुत जरूरी है। क्लेम फॉर्म भरते समय की गई एक छोटी सी गलती भी आपके पूरे काम को बिगाड़ सकती है। इसके अलावा ड्राइविंग लाइसेंस, RC और FIR की कॉपी जैसे जरूरी कागज पूरे न होने पर पूरी प्रक्रिया बहुत धीमी हो जाती है। जब भी दस्तावेज अधूरे होते हैं तो इंश्योरेंस कंपनी हर एक जानकारी को दोबारा से वेरिफाई करती है। इस वेरिफिकेशन के काम में बहुत ज्यादा समय बर्बाद होता है जिससे क्लेम मिलने में हफ्तों लग जाते हैं।

FIR दर्ज न कराना भी है एक बड़ी लापरवाही

अगर सड़क हादसे में किसी थर्ड पार्टी का नुकसान हुआ है, गाड़ी चोरी हो गई है या फिर कोई बहुत बड़ा हादसा हुआ है तो ऐसी स्थिति में पुलिस के पास एफआईआर दर्ज कराना कानूनी रूप से बहुत जरूरी होता है। कई बार लोग पुलिस के झंझट से बचने के लिए एफआईआर नहीं कराते हैं और सीधे क्लेम करने पहुंच जाते हैं। लेकिन आपको बता दें कि एफआईआर की कॉपी के बिना कोई भी इंश्योरेंस कंपनी क्लेम की फाइल को आगे नहीं बढ़ाती है। इस वजह से आपका पूरा मामला अधर में लटक जाता है और क्लेम रुक जाता है।

नियमों को तोड़ना और पॉलिसी की शर्तों को न समझना

अगर एक्सीडेंट के समय गाड़ी चलाने वाला व्यक्ति नशे में था या उसने किसी बड़े ट्रैफिक नियम का उल्लंघन किया था तो कंपनी क्लेम को सीधे तौर पर रद्द कर सकती है। इसके साथ ही बहुत से लोग बिना पॉलिसी को पढ़े ही क्लेम के लिए अप्लाई कर देते हैं। हर पॉलिसी में कुछ ऐसी चीजें होती हैं जो कवर नहीं होती हैं जिन्हें एक्सक्लूजंस कहा जाता है। अगर आपका नुकसान उसी लिस्ट में आता है तो क्लेम रिजेक्ट हो जाएगा।

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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