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4 min read | अपडेटेड June 11, 2026, 14:29 IST
सारांश
इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते समय छोटी सी लापरवाही भी आपको भारी पड़ सकती है। टैक्सपेयर्स अक्सर गलत फॉर्म चुनने, गलत असेसमेंट ईयर भरने या बैंक डिटेल्स में गड़बड़ी जैसी गलतियां कर बैठते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन 10 बड़ी गलतियों से बचकर आप टैक्स नोटिस और जुर्माने से सुरक्षित रह सकते हैं।

इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय इन 10 बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करने का समय आते ही टैक्सपेयर्स इसकी तैयारियों में जुट जाते हैं। आजकल टैक्स अथॉरिटीज पूरी तरह से टेक्नोलॉजी पर आधारित सिस्टम और डेटा मैचिंग का इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे गड़बड़ी पकड़े जाने की आशंका बहुत बढ़ गई है। ऐसे में ITR भरते समय पूरी सटीकता और सही जानकारी देना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। थोड़ी सी भी लापरवाही या अनजाने में की गई गलती के कारण आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस मिल सकता है, या फिर आपका रिफंड अटक सकता है।
आईटीआर भरते समय सबसे आम गलतियों में से एक है गलत फॉर्म चुनना। जैसे कि 50 लाख रुपये से कम इनकम वाले सैलरीड लोग, जिन्हें कोई कैपिटल गेंस नहीं है, उन्हें आमतौर पर आईटीआर-1 भरना होता है। वहीं बिजनेस या प्रोफेशन से इनकम वाले लोगों को आईटीआर-3 का इस्तेमाल करना चाहिए। गलत फॉर्म चुनने पर आपका रिटर्न डिफेक्टिव माना जा सकता है और प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है। इसके अलावा असेसमेंट ईयर चुनने में भी लोग गलती करते हैं। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में कमाए गए पैसे के लिए सही असेसमेंट ईयर 2026-27 होगा। इसमें गलती होने पर डबल टैक्स और पेनाल्टी का सामना करना पड़ सकता है।
टैक्सपेयर्स को यह हमेशा पक्का करना चाहिए कि उनका नाम, पैन, जन्मतिथि, ईमेल आईडी और फोन नंबर पूरी तरह से उनके पैन रिकॉर्ड से मैच करते हों। बैंक अकाउंट की डिटेल्स या आईएफएससी कोड गलत होने से आपका रिफंड आने में देरी हो सकती है और बैंक वैलिडेशन एरर आ सकता है। इसलिए फॉर्म सबमिट करने से पहले बैंक डिटेल्स को दोबारा चेक करना बहुत जरूरी है।
लोग अक्सर सेविंग्स अकाउंट के ब्याज, फिक्स डिपॉजिट यानी एफडी, कैपिटल गेंस और रेंटल इनकम को रिपोर्ट करना भूल जाते हैं। एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि टैक्स फ्री या छूट वाली इनकम को भी बताना जरूरी होता है। उदाहरण के लिए, इक्विटी शेयर या म्यूचुअल फंड से 1.25 लाख रुपये तक का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस भले ही टैक्स फ्री हो, लेकिन इसे शेड्यूल में दिखाना जरूरी है। इसके साथ ही रिटर्न भरने से पहले अपनी इनकम का मिलान फॉर्म 26एएस, एआईएस और टीआईएस से जरूर कर लें। इनमें आपके टीडीएस, इन्वेस्टमेंट, सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन, जीएसटी टर्नओवर और फॉरेन रेमिटेंस की पूरी जानकारी होती है। अगर फॉर्म 16 और एआईएस में अंतर होगा, तो टैक्स बढ़ सकता है या रिफंड कम हो सकता है।
अगर आपने साल के बीच में नौकरी बदली है तो आपको एक से ज्यादा कंपनियों से फॉर्म 16 मिल सकता है। कई लोग सिर्फ आखिरी कंपनी का फॉर्म 16 देखकर रिटर्न भर देते हैं, जबकि आपको सभी कंपनियों की सैलरी को जोड़कर कुल इनकम पर टैक्स देना चाहिए। इसके अलावा कई लोग सही डिडक्शन क्लेम करना भूल जाते हैं जिससे उन पर टैक्स का बोझ बढ़ जाता है। अगर आप अपने एंप्लॉयर को रेंट रसीद नहीं दे पाए थे, तो भी आप आईटीआर भरते समय एचआरए का फायदा ले सकते हैं।
अगर आपकी कमाई के अन्य सोर्स हैं तो आपको फाइनेंशियल ईयर के दौरान किस्तों में एडवान्स टैक्स जमा करना होता है। एडवान्स टैक्स न भरने या कम भरने पर बचे हुए अमाउंट पर हर महीने 1 पर्सेंट की दर से ब्याज लगता है। इसी तरह नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट यानी एनएससी को लेकर भी भ्रम रहता है। एनएससी में इन्वेस्टमेंट पर 80सी के तहत डिडक्शन तो मिलता है, लेकिन इससे मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स के दायरे में आता है। इसे अन्य सोर्स से इनकम में दिखाना जरूरी है, वरना बाद में टैक्स डिमांड आ सकती है।
रिटर्न फाइल करना सिर्फ आधा काम है। इसके बाद 30 दिनों के भीतर इसका ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है। इसे आप आधार ओटीपी, नेट बैंकिंग या इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड के जरिए कर सकते हैं। इसके अलावा आप साइन किया हुआ आईटीआर-वी सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर भी भेज सकते हैं। तय समय में ऐसा न करने पर आपका रिटर्न इनवैलिड घोषित हो जाएगा और आपको दोबारा नए सिरे से पूरी प्रोसेस करनी पड़ेगी। फ्यूचर में होने वाले किसी भी नुकसान से बचने के लिए सबमिट करने से पहले हर जानकारी को अच्छे से जांच लें।
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