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4 min read | अपडेटेड October 01, 2026, 08:56 IST
सारांश
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 30 जुलाई को बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़े नियमों में बदलाव किया था। बैंकों को इन नए नियमों को 1 अक्टूबर 2026 से लागू करना होगा। इसका मुख्य उद्देश्य बड़ी रकम वाली एफडी में ब्याज दरों को लेकर ज्यादा पारदर्शिता लाना और ग्राहकों को पहले से उपलब्ध जानकारी के आधार पर फैसला लेने का मौका देना है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 30 जुलाई को बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़े नियमों में बदलाव किया था।
1 अक्टूबर 2026 से RBI के नए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) नियम लागू हो रहे हैं। हालांकि, इन बदलावों का असर मुख्य रूप से ₹3 करोड़ या उससे ज्यादा की बल्क एफडी पर पड़ेगा। आम रिटेल निवेशक, जिनकी एफडी ₹3 करोड़ से कम है, उनके लिए ब्याज दरों या मौजूदा एफडी के रिटर्न को लेकर कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 30 जुलाई को बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़े नियमों में बदलाव किया था। बैंकों को इन नए नियमों को 1 अक्टूबर 2026 से लागू करना होगा। इसका मुख्य उद्देश्य बड़ी रकम वाली एफडी में ब्याज दरों को लेकर ज्यादा पारदर्शिता लाना और ग्राहकों को पहले से उपलब्ध जानकारी के आधार पर फैसला लेने का मौका देना है।
नए नियमों के तहत बैंकों को बल्क डिपॉजिट पर लागू ब्याज दरों को अपनी वेबसाइट पर हर कामकाजी दिन प्रकाशित करना होगा। यह जानकारी सुबह 10 बजे तक उपलब्ध करानी होगी और इसमें 10 मिनट की अपडेट विंडो होगी। इसका फायदा खासतौर पर उन निवेशकों को होगा जो ₹3 करोड़ या उससे ज्यादा की एफडी कराने या उसे रिन्यू कराने जा रहे हैं।
मान लीजिए किसी निवेशक के पास ₹3 करोड़ या उससे ज्यादा की रकम है और वह उसे एफडी में लगाना चाहता है। नए नियम के बाद वह एफडी कराने से पहले बैंक की वेबसाइट पर उस दिन लागू बल्क डिपॉजिट की ब्याज दर देख सकेगा।
इससे बड़े निवेशकों को बैंक से एफडी कराने से पहले ब्याज दर को लेकर ज्यादा स्पष्टता मिलेगी। खासकर बड़ी रकम के मामले में कुछ बेसिस पॉइंट का अंतर भी कुल ब्याज कमाई पर बड़ा असर डाल सकता है। ऐसे में निवेशक अलग-अलग बैंकों की उपलब्ध दरों की तुलना करके फैसला ले सकते हैं।
नए नियमों के तहत एक ही दिन स्वीकार की जाने वाली समान तरह की बल्क एफडी पर बैंक को एक समान ब्याज दर की पेशकश करनी होगी। यानी सिर्फ इसलिए ब्याज दर अलग नहीं होनी चाहिए कि ग्राहक ने एफडी किसी दूसरी शाखा से कराई है या किसी अलग बैंकिंग चैनल का इस्तेमाल किया है। हालांकि, RBI के नियमों में दिए गए अपवाद लागू रहेंगे। निवेशकों के नजरिए से यह बदलाव बड़ी एफडी की कीमत तय करने में ज्यादा समानता और पारदर्शिता ला सकता है।
अगर आपकी एफडी ₹3 करोड़ से कम है, तो इन नए नियमों से आपके लिए कोई बड़ा बदलाव नहीं है। सामान्य रिटेल एफडी पर मिलने वाली ब्याज दर बैंक की मौजूदा डिपॉजिट रेट, एफडी की अवधि, ग्राहक की कैटेगरी और बैंक की अन्य लागू शर्तों पर निर्भर करेगी। इसलिए सिर्फ 1 अक्टूबर से नए RBI नियम लागू होने के कारण रिटेल निवेशकों को अपनी एफडी की ब्याज दर बदलने या रिटर्न कम होने की चिंता करने की जरूरत नहीं है।
अगर आपकी एफडी पहले से चल रही है, तो 1 अक्टूबर से उसकी ब्याज दर अपने आप नहीं बदलेगी। एफडी जिस समय खोली गई थी, उस समय लागू शर्तों के मुताबिक ही चलती रहेगी। नए नियम किसी मौजूदा एफडी की ब्याज दर को अपने आप रीसेट नहीं करते।
हालांकि, अगर आपकी ₹3 करोड़ या उससे ज्यादा की एफडी की मैच्योरिटी के बाद रिन्यूअल होना है, तो रिन्यू कराने से पहले बैंक की वेबसाइट पर उस दिन की बल्क डिपॉजिट ब्याज दर जरूर देखना फायदेमंद रहेगा।
कुल मिलाकर, 1 अक्टूबर 2026 से RBI के FD नियमों में बदलाव का मुख्य फोकस बड़ी रकम वाली एफडी में पारदर्शिता बढ़ाना है, न कि आम निवेशकों की एफडी ब्याज दरों में बदलाव करना। रिटेल FD धारकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि मौजूदा एफडी का रिटर्न सिर्फ नए नियम लागू होने की वजह से अपने आप नहीं बदलेगा। वहीं, ₹3 करोड़ या उससे ज्यादा की एफडी करने वाले निवेशकों को अब ब्याज दर की जानकारी पहले से देखने और अलग-अलग विकल्पों की तुलना करने में ज्यादा आसानी होगी।
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