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  1. Small Savings Rates: PPF, SCSS और Sukanya की ब्याज दरों में नहीं हुआ बदलाव, लगातार 10वीं तिमाही भी दरें स्थिर

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Small Savings Rates: PPF, SCSS और Sukanya की ब्याज दरों में नहीं हुआ बदलाव, लगातार 10वीं तिमाही भी दरें स्थिर

Shubham Singh Thakur

2 min read | अपडेटेड September 30, 2026, 18:49 IST

सारांश

छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में पिछले कई तिमाहियों से कोई बदलाव नहीं हुआ है। जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही में भी सरकार ने दरों को स्थिर रखा था। अब अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए भी मौजूदा दरें जारी रखने का फैसला किया गया है।

Small Saving Schemes

छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें तय करने में सरकारी बॉन्ड यानी G-Sec की यील्ड एक अहम आधार होती है।

Small Savings Schemes: सरकार ने अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। इसका मतलब है कि PPF, Senior Citizens Savings Scheme (SCSS), Sukanya Samriddhi Scheme समेत दूसरी पोस्ट ऑफिस सेविंग्स स्कीम्स पर पहले की तरह ही ब्याज मिलता रहेगा। इन योजनाओं की दरें लगातार 10वीं तिमाही में भी स्थिर रखी गई हैं।
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PPF पर 7.1%, SCSS और Sukanya पर 8.2% ब्याज

  • नई दरों के मुताबिक Public Provident Fund (PPF) पर 7.1 फीसदी सालाना ब्याज मिलता रहेगा।
  • Senior Citizens Savings Scheme (SCSS) और Sukanya Samriddhi Yojana पर 8.2 फीसदी की ब्याज दर बरकरार रखी गई है।
  • National Savings Certificate (NSC) पर 7.7% और Monthly Income Account पर 7.4 फीसदी का ब्याज मिलता रहेगा।
  • Kisan Vikas Patra (KVP) पर निवेशकों को आगे भी 7.5% का रिटर्न मिलता रहेगा।
  • इसके अलावा 1-वर्षीय पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट पर 6.9% वार्षिक, 2-वर्षीय पर 7.0% वार्षिक, 3-वर्षीय पर 7.1% वार्षिक और 5-वर्षीय टाइम डिपॉजिट पर 7.5% वार्षिक ब्याज मिलता रहेगा। वहीं 5-वर्षीय पोस्ट ऑफिस रिकरिंग डिपॉजिट (RD) पर 6.7% वार्षिक ब्याज दर उपलब्ध है।

लगातार 10 तिमाहियों से नहीं बदली दरें

छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में पिछले कई तिमाहियों से कोई बदलाव नहीं हुआ है। जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही में भी सरकार ने दरों को स्थिर रखा था। अब अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए भी मौजूदा दरें जारी रखने का फैसला किया गया है। इसका मतलब है कि PPF, SCSS और Sukanya जैसी योजनाओं में निवेश करने वाले लोगों को इस तिमाही में ब्याज दरों में किसी बदलाव का सामना नहीं करना पड़ेगा।

बॉन्ड यील्ड और महंगाई के बीच फैसला

छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें तय करने में सरकारी बॉन्ड यानी G-Sec की यील्ड एक अहम आधार होती है। अलग-अलग योजनाओं की दरें समान अवधि वाली गवर्नमेंट सिक्योरिटीज की यील्ड से व्यापक रूप से जुड़ी होती हैं और इनके लिए एक तय स्प्रेड भी होता है। ऐसे में बॉन्ड यील्ड में बदलाव होने पर छोटी बचत योजनाओं की दरों की समीक्षा की जाती है। निवेशकों के लिए इस तिमाही में योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

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