पर्सनल फाइनेंस
.png)
3 min read | अपडेटेड May 26, 2026, 18:56 IST
सारांश
एक बड़ी गलती जो लोग करते हैं, वह है तुरंत दोबारा लोन के लिए आवेदन करना। ऐसा नहीं करना चाहिए। कम समय में बहुत ज्यादा एंक्वायरी होने से आपका क्रेडिट स्कोर और खराब हो सकता है। इसलिए कुछ हफ्ते या 1-2 महीने रुकें और पहले अपनी प्रोफाइल सुधारें।

अगर समस्या क्रेडिट स्कोर की है, तो उसे सुधारने पर काम करें।
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आपका लोन रिजेक्ट क्यों हुआ। आम कारणों में कम क्रेडिट स्कोर, पहले से बहुत ज्यादा लोन होना, क्रेडिट कार्ड का ज्यादा इस्तेमाल, आय का स्थिर न होना या बार-बार नौकरी बदलना शामिल हैं। कई बार दस्तावेजों में गलती, गलत जानकारी या नाम/पता मिसमैच होने की वजह से भी आवेदन रिजेक्ट हो जाता है।
दोबारा अप्लाई करने से पहले पहला कदम होना चाहिए अपना क्रेडिट रिपोर्ट चेक करना। इससे आपको अंदाजा मिलेगा कि समस्या कहां है। कम स्कोर है, ज्यादा कर्ज है या कोई और तकनीकी गलती।
एक बड़ी गलती जो लोग करते हैं, वह है तुरंत दोबारा लोन के लिए आवेदन करना। ऐसा नहीं करना चाहिए। कम समय में बहुत ज्यादा एंक्वायरी होने से आपका क्रेडिट स्कोर और खराब हो सकता है। इसलिए कुछ हफ्ते या 1-2 महीने रुकें और पहले अपनी प्रोफाइल सुधारें।
अगर समस्या क्रेडिट स्कोर की है, तो उसे सुधारने पर काम करें। अपने सभी EMI और क्रेडिट कार्ड बिल समय पर भरें। कोशिश करें कि क्रेडिट कार्ड की लिमिट का 30-40% से ज्यादा इस्तेमाल न करें। जब तक जरूरी न हो, नया कर्ज लेने से बचें। कुछ महीनों में छोटे-छोटे सुधार भी बड़ा फर्क ला सकते हैं।
लोन देने वाली कंपनियां सिर्फ आपकी कमाई नहीं देखतीं, बल्कि यह भी देखती हैं कि आपकी कमाई का कितना हिस्सा पहले से EMI में जा रहा है। अगर आपकी आय का बड़ा हिस्सा पहले से कर्ज चुकाने में जा रहा है, तो नया लोन मिलना मुश्किल हो जाता है। इसलिए अगर संभव हो तो छोटे लोन पहले चुका दें या क्रेडिट कार्ड का बकाया कम करें।
दस्तावेजों की जांच भी बहुत जरूरी है। कई बार सिर्फ छोटी गलती जैसे PAN और Aadhaar में अलग नाम, पुराना बैंक स्टेटमेंट या गलत इनकम डिटेल—की वजह से आवेदन रिजेक्ट हो जाता है। दोबारा आवेदन करने से पहले सभी दस्तावेज ध्यान से जांच लें।
अगर आपकी प्रोफाइल ठीक है लेकिन बहुत मजबूत नहीं है, तो co-applicant जोड़ना मदद कर सकता है। जैसे पति/पत्नी, माता-पिता या कोई ऐसा व्यक्ति जिसकी आय स्थिर हो और क्रेडिट स्कोर अच्छा हो। इससे बैंक का जोखिम कम होता है और मंजूरी मिलने की संभावना बढ़ती है।
हर बैंक या NBFC के नियम अलग होते हैं। कुछ बैंक क्रेडिट स्कोर को लेकर सख्त होते हैं, जबकि कुछ थोड़े लचीले होते हैं लेकिन ब्याज दर ज्यादा ले सकते हैं। इसलिए हर जगह आवेदन करने की बजाय ऐसे लेंडर चुनें जो आपकी प्रोफाइल के अनुसार सही हों।
अगर आपने पहले बहुत बड़ी राशि के लिए आवेदन किया था, तो इस बार थोड़ा कम लोन अमाउंट मांगना बेहतर हो सकता है। बैंक को कम राशि देना कम जोखिम वाला लगता है, इसलिए मंजूरी मिलने के chances बढ़ जाते हैं।
जब आप दोबारा आवेदन करेंगे, तो प्रक्रिया वही होगी। नया आवेदन, नए दस्तावेज और फिर लेंडर आपकी आय, क्रेडिट स्कोर और मौजूदा कर्ज देखकर फैसला करेगा। कोई “सेकंड चांस” अलग से नहीं होता, लेकिन अगर आपकी प्रोफाइल बेहतर हो गई है तो मंजूरी मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में
.png)
अगला लेख
What is a Corporate Bond? A Complete Guide to Corporate Bonds in India
Credit Score vs CIBIL Score: Key Differences
What is a UPI Credit Card and How Does it Work?
Explore Learning Centre
All topics · stocks, MFs, derivatives, IPOs