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5 min read | अपडेटेड May 26, 2026, 16:50 IST
सारांश
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 पर एक बड़ी गाइड जारी की है। इस नए कानून में पुराने सेक्शंस और फॉर्म्स की संख्या में भारी कटौती की गई है। इसके साथ ही असेसमेंट ईयर का झंझट खत्म करके टैक्स ईयर का नया कॉन्सेप्ट लाया गया है।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 को आसान बनाने के लिए किया खास काम | Image: Shutterstock.
भारत सरकार के इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 1 अप्रैल 2026 से देश में नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू करने की पूरी तैयारी कर ली है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (CBDT) ने इस बड़े बदलाव और दोनों कानूनों के आपसी तालमेल को समझाने के लिए अक्सर पूछे जाने वाले सवालों यानी FAQs की एक डिटेल्ड गाइड जारी की है। इस गाइड को 'कर सेतु' नाम दिया गया है, जिसका मूल मंत्र सरल कानून और सशक्त भारत है।
विभाग का कहना है कि छह दशकों से चले आ रहे पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 को पूरी तरह से बदलकर टैक्स सिस्टम को मॉडर्न और ट्रांसपेरेंट बनाया जा रहा है ताकि देश की तेजी से बढ़ती इकोनॉमी की जरूरतों को पूरा किया जा सके। इस नए कानून में टैक्सपेयर्स पर कोई नया टैक्स या आर्थिक बोझ नहीं डाला गया है, बल्कि इसका पूरा फोकस टैक्स भरने की प्रक्रिया को आसान करने और कानूनी झंझटों को कम करने पर है।
नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 में टैक्सपेयर्स को कागजी कामकाज और जटिल नियमों से बड़ी राहत दी गई है। पुराने कानून में लगातार होने वाले बदलावों और अमेंडमेंट्स की वजह से वह काफी पेचीदा हो चुका था। अब नए एक्ट में कुल सेक्शंस की संख्या को 819 से घटाकर सिर्फ 536 कर दिया गया है, जो कि सीधे तौर पर 35 पर्सेंट की कटौती है। इसी तरह इनकम टैक्स के नियमों में भी 35 पर्सेंट की कमी की गई है और अब 511 नियमों की जगह सिर्फ 333 नियम ही रह गए हैं। सबसे बड़ी राहत फॉर्म्स को लेकर मिली है, जहां विभाग ने 52 पर्सेंट की भारी कटौती करते हुए कुल फॉर्म्स की संख्या 399 से घटाकर केवल 190 कर दी है। इसके अलावा एक्ट में लंबे-चौड़े पैराग्राफ की जगह आसान टेबल और फॉर्मूलों का इस्तेमाल किया गया है ताकि एक आम टैक्सपेयर भी इसे आसानी से समझ सके।
इस नए कानून के तहत एक और सबसे बड़ा बदलाव असेसमेंट ईयर (AY) के कॉन्सेप्ट को खत्म करना है। पुराने कानून में जिस साल कमाई होती थी उसे प्रीवियस ईयर और उसके अगले साल को असेसमेंट ईयर कहा जाता था, जिससे आम लोगों में काफी उलझन पैदा होती थी। अब नए कानून में इन दोनों की जगह सिर्फ एक ही नाम होगा जिसे 'टैक्स ईयर' कहा जाएगा। उदाहरण के लिए, फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में होने वाली कमाई को अब सीधे टैक्स ईयर 2026-27 ही कहा जाएगा और इसी नाम से टैक्स का असेसमेंट भी होगा। हालांकि 1 अप्रैल 2026 से पहले के पुराने मामलों और असेसमेंट ईयर 2026-27 के रिटर्न फाइलिंग पर पुराना कानून ही लागू रहेगा।
टैक्सपेयर्स की आसानी के लिए विभाग ने कई जरूरी फॉर्म्स को आपस में मिला दिया है। नौकरीपेशा और सीनियर सिटीजन्स को टीडीएस (TDS) न कटने के लिए पहले फॉर्म 15G और 15H अलग-अलग भरने पड़ते थे, लेकिन अब इन दोनों को मिलाकर एक सिंगल फॉर्म नंबर 121 बना दिया गया है। इसके अलावा बिजनेस करने वालों के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट के तीन अलग-अलग फॉर्म्स (3CA, 3CB और 3CD) को मिलाकर अब एक ही सिंगल फॉर्म नंबर 26 कर दिया गया है। विदेशी पेमेंट भेजने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 15CA और 15CB की जगह अब नए फॉर्म नंबर 145 और 146 का इस्तेमाल होगा। सैलरी एरियर पर टैक्स राहत के लिए अब फॉर्म 10E की जगह नया फॉर्म 39 भरना होगा।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने साफ किया है कि इस नए कानून के आने से टैक्सपेयर्स के मौजूदा परमानेंट अकाउंट नंबर यानी पैन (PAN) और टैन (TAN) पर कोई असर नहीं पड़ेगा और वे पहले की तरह ही वैलिड रहेंगे। हालांकि 1 अप्रैल 2026 से नए पैन कार्ड के लिए अप्लाई करने वालों को नए फॉर्मेट के फॉर्म्स भरने होंगे। भारतीय नागरिकों के लिए अब फॉर्म 49A की जगह फॉर्म नंबर 93 और भारतीय कंपनियों के लिए फॉर्म नंबर 94 लागू होगा। इसी तरह सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए टैन (TAN) एप्लीकेशन फॉर्म को भी दो अलग-अलग सरल हिस्सों यानी फॉर्म 134 और 135 में बांट दिया गया है। इसके अलावा पुराने कानून के तहत दी गई चैरिटेबल ट्रस्ट की मंजूरियां और रजिस्ट्रेशन भी नए कानून में पूरी तरह मान्य रहेंगे।
इस बड़े बदलाव पर सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (CBDT) के चेयरमैन रवि अग्रवाल ने कहा कि नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 देश के टैक्स सिस्टम के इतिहास में एक बड़ा और महत्वपूर्ण मोड़ है। छह दशकों से चले आ रहे पुराने कानून में इतने अमेंडमेंट्स हो चुके थे कि उसे समझना बहुत कठिन हो गया था। नया कानून मॉडर्न, ट्रांसपेरेंट और देश की तेजी से बदलती इकोनॉमी की जरूरतों के हिसाब से है। उन्होंने भरोसा जताया कि विभाग द्वारा जारी यह गाइड नए और पुराने कानून के बीच एक मजबूत पुल का काम करेगी और टैक्सपेयर्स को इस ऐतिहासिक बदलाव को अपनाने में किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने देगी।
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