पर्सनल फाइनेंस

4 min read | अपडेटेड May 25, 2026, 16:44 IST
सारांश
सोने में निवेश के नए तरीकों ने सैलरी पाने वाले लोगों का काम आसान कर दिया है। गोल्ड ईटीएफ को सेबी रेगुलेट करता है और इसमें 12 महीने बाद लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है। वहीं ईजीआर में सोने को सुरक्षित वॉल्ट में रखा जाता है और डिजिटल गोल्ड को आप मात्र 10 रुपये से भी शुरू कर सकते हैं।

सोने में डिजिटल तरीके से निवेश करने के लिए मार्केट में कई शानदार विकल्प मौजूद हैं। | Image: Shutterstock
हर महीने जैसे ही फोन पर सैलरी क्रेडिट होने का मैसेज आता है, लोग शॉपिंग, बाहर घूमने और नेटफ्लिक्स सब्सक्रिप्शन जैसी चीजों पर खर्च करना शुरू कर देते हैं। लेकिन समझदार लोग इसी सैलरी में से एक छोटा हिस्सा बचाकर उसे गोल्ड, स्टॉक्स या म्यूचुअल फंड में निवेश भी करते हैं ताकि उनका पैसा बढ़ सके। आजकल निवेश के लिए गोल्ड यानी सोना लोगों को काफी ज्यादा पसंद आ रहा है। बाजार में सोने में निवेश करने के लिए गोल्ड ETF, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGR) और डिजिटल गोल्ड जैसे कई बेहतरीन प्रोडक्ट मौजूद हैं। सैलरी पाने वाले लोगों के लिए हर महीने बचे हुए पैसों को इन तीनों में से कहां लगाना सबसे सही रहेगा, आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
गोल्ड ETF यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड असल में स्टॉक्स और म्यूचुअल फंड का एक बेहतरीन कॉम्बिनेशन है। यह कमोडिटी पर आधारित म्यूचुअल फंड होते हैं जिन्हें शेयर बाजार में सामान्य स्टॉक्स की तरह ही खरीदा और बेचा जाता है। ये फंड घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर नजर रखते हैं। आप हर महीने अपने ट्रेडिंग और डीमैट अकाउंट के जरिए गोल्ड ईटीएफ की यूनिट्स खरीदकर एक छोटी रकम से निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। सैलरी पाने वाले लोगों के लिए यह एक सबसे पसंदीदा विकल्प है क्योंकि इसमें फिजिकल गोल्ड की तरह चोरी होने, संभालकर रखने या शुद्धता की कोई चिंता नहीं होती है। इसका ट्रांजैक्शन पूरी तरह सुरक्षित और आसान होता है।
इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स एक्सचेंज पर ट्रेड होने वाली सिक्योरिटीज हैं जो आपको डिजिटल रसीद को फिजिकल गोल्ड में बदलने की सुविधा देती हैं। इसमें आपको खुद सोना संभालकर रखने की जरूरत नहीं होती है बल्कि आपका सोना सेबी से मान्यता प्राप्त वॉल्ट में पूरी तरह सुरक्षित रखा जाता है और आपके मालिकाना हक का रिकॉर्ड डीमैट अकाउंट में डिजिटल तरीके से दर्ज होता है। एनएसई ने हाल ही में इसे 100 मिलीग्राम जैसी छोटी मात्रा में भी लॉन्च किया है जिसकी शुद्धता का लेवल 999 और 995 है। पूरे देश में इसकी कीमतें एक समान रहती हैं और इसे एक्सचेंज पर आसानी से ट्रेड किया जा सकता है। यह निवेश और पर्सनल इस्तेमाल के बीच की दूरी को मिटाता है।
डिजिटल गोल्ड एक नए जमाने का निवेश माध्यम है जिसके जरिए आप पेटीएम या फोनपे जैसे प्लेटफॉर्म से 24 कैरेट का फिजिकल गोल्ड ऑनलाइन खरीद, बेच और होल्ड कर सकते हैं। इसमें आपको सोने को अपने पास रखने की जरूरत नहीं होती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि आप मात्र 10 रुपये जैसी बेहद कम रकम से भी सोने में निवेश शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा प्लेटफॉर्म की शर्तों के हिसाब से आप बाद में अपने इस डिजिटल बैलेंस को सोने के सिक्कों या बार में भी बदल सकते हैं। हालांकि यह माध्यम सेबी या आरबीआई द्वारा फॉर्मल तरीके से रेगुलेटेड नहीं होता है।
अगर इन तीनों विकल्पों की तुलना करें तो गोल्ड ETF को सेबी रेगुलेट करता है और इसके लिए डीमैट अकाउंट की जरूरत होती है। इसमें लिक्विडिटी बहुत ज्यादा होती है और टैक्स का नियम भी सीधा है क्योंकि 12 महीने के बाद इस पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है। दूसरी तरफ EGR खरीदने पर डायरेक्ट 3 पर्सेंट का GST तो नहीं लगता लेकिन निवेशकों को ब्रोकरेज, डीमैट, एक्सचेंज और वॉल्टिंग के साथ 15 रुपये प्रति किलोग्राम प्रति दिन का स्टोरेज चार्ज देना पड़ता है। बाद में इसे फिजिकल गोल्ड में बदलने पर डिलीवरी चार्ज और 3 पर्सेंट GST भी लगता है। कम ट्रेडिंग वॉल्यूम के कारण इसमें लिक्विडिटी की समस्या भी आ सकती है।
वहीं डिजिटल गोल्ड में 3 पर्सेंट GST के साथ खरीद और बिक्री की कीमतों में बड़ा अंतर होता है और इसमें लॉन्ग टर्म का स्टेटस 24 महीने के बाद शुरू होता है। इसलिए सुरक्षा और टैक्स के लिहाज से गोल्ड ईटीएफ ज्यादातर निवेशकों के लिए सबसे सही बैठता है और इसमें फ्यूचर भी सुरक्षित रहता है।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में

अगला लेख