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पर्सनल फाइनेंस

NSE ने शुरू की Electronic Gold Receipts की ट्रेडिंग, समझिए शेयरों की तरह कैसे खरीद-बेच सकेंगे सोना

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड May 18, 2026, 17:30 IST

सारांश

अभी EGR के लिए वॉल्ट और कलेक्शन सेंटर अहमदाबाद और मुंबई में चालू हैं। इसके अलावा दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु में भी सेंटर शुरू किए जा रहे हैं। आगे चलकर पूरे देश में करीब 120 कलेक्शन सेंटर बनाने की योजना है।

NSE EGR

NSE EGR के तहत अब सोना खरीदने के लिए घर में रखने की जरूरत नहीं होगी।

Electronic Gold Receipts: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने आज 18 मई से इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसिप्ट यानी EGRs की लाइव ट्रेडिंग शुरू कर दी है। इसका मकसद भारत में सोने की खरीद-बिक्री को ज्यादा डिजिटल, पारदर्शी और आसान बनाना है। NSE के मुताबिक 16 मई को इसका मॉक ट्रेडिंग सेशन सफलतापूर्वक किया गया था, जिसमें कोई तकनीकी दिक्कत नहीं आई। इसके बाद अब इसकी असली ट्रेडिंग शुरू कर दी गई है। एक्सचेंज का कहना है कि बाजार से इसे अच्छा रिस्पॉन्स मिला है।
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120 कलेक्शन सेंटर बनाने की योजना

अभी EGR के लिए वॉल्ट और कलेक्शन सेंटर अहमदाबाद और मुंबई में चालू हैं। इसके अलावा दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु में भी सेंटर शुरू किए जा रहे हैं। आगे चलकर पूरे देश में करीब 120 कलेक्शन सेंटर बनाने की योजना है।

EGR क्या है?

आसान भाषा में समझें तो EGR सोने का एक डिजिटल प्रमाणपत्र है। यानी आपका सोना फिजिकल रूप में वॉल्ट में सुरक्षित रहेगा, लेकिन उसकी ओनरशिप आपके डीमैट अकाउंट में डिजिटल रूप में दिखाई देगी, बिल्कुल शेयरों की तरह। इसका फायदा यह है कि अब सोना खरीदने के लिए घर में रखने की जरूरत नहीं होगी। न चोरी का डर, न प्योरिटी की चिंता, और न स्टोरेज की झंझट। आप इसे शेयर बाजार की तरह आसानी से खरीद और बेच सकेंगे।

अगर कोई निवेशक चाहे, तो कुछ शर्तों और चार्जेज के साथ EGR को बाद में फिजिकल गोल्ड में भी बदल सकता है। यानी डिजिटल सोना खरीदो, और जरूरत पड़ने पर असली सोना ले लो। NSE का मानना है कि EGR भारत के गोल्ड मार्केट को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम है, जिससे फिजिकल गोल्ड और शेयर बाजार का सिस्टम आपस में जुड़ जाएगा।

कैसे कर सकते हैं खरीद-बिक्री?

निवेशक अपने ट्रेडिंग अकाउंट के जरिए स्टॉक एक्सचेंज पर EGRs को खरीद और बेच सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे वे इक्विटी खरीदते-बेचते हैं। इसके पीछे का सोना अधिकृत वॉल्ट में सुरक्षित रखा जाता है और ट्रेड पूरा होते ही मालिकाना हक इलेक्ट्रॉनिक रूप से ट्रांसफर हो जाता है।

EGRs रखने वालों के पास EGRs को असली सोने में बदलने का विकल्प भी हो सकता है, बशर्ते वे एक्सचेंज के नियमों और लागू शुल्कों का पालन करें। एक्सचेंज ने कहा कि EGRs की शुरुआत से भारत के सोने के बाज़ार का इकोसिस्टम और मज़बूत होने की उम्मीद है, क्योंकि यह असली सोने को एक्सचेंज-आधारित ट्रेडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ जोड़ता है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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