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ITR 2026: होम लोन वालों के लिए कौन सा टैक्स रिजीम फायदेमंद? जानिए पुराने और नए सिस्टम का फर्क

Upstox

3 min read | अपडेटेड June 12, 2026, 17:11 IST

सारांश

ITR 2026: नए टैक्स रिजीम में टैक्स दरें तो कम हैं, लेकिन इसमें ज्यादातर टैक्स छूट और कटौतियां नहीं मिलतीं। नए रिजीम में आमतौर पर होम लोन के प्रिंसिपल भुगतान पर धारा 80C की छूट नहीं मिलती और खुद के रहने वाले घर के लिए ब्याज पर धारा 24(b) की 2 लाख रुपये वाली छूट भी उपलब्ध नहीं होती।

ITR

ITR फाइल करने से पहले दोनों टैक्स रिजीम में अपनी टैक्स देनदारी की तुलना करना जरूरी है।

ITR 2026: अगर आपने होम लोन लिया हुआ है, तो ITR फाइल करते समय यह तय करना जरूरी है कि आपके लिए पुराने और नए में से कौन सा टैक्स सिस्टम बेहतर है। दोनों रिजीम में होम लोन पर मिलने वाले टैक्स बेनिफिट अलग-अलग हैं, इसलिए सही विकल्प चुनने से अच्छी-खासी टैक्स बचत हो सकती है। यहां हम समझेंगे कि दोनों में कौन सा टैक्स सिस्टम फायदेमंद है।
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पुराना टैक्स सिस्टम

पुराने टैक्स रिजीम में होम लोन लेने वालों को सबसे ज्यादा फायदा मिलता है। आयकर अधिनियम की धारा 24(b) के तहत खुद के रहने वाले घर के लिए होम लोन पर दिए गए ब्याज पर सालाना अधिकतम 2 लाख रुपये तक की टैक्स छूट ली जा सकती है। हालांकि इसके लिए घर का निर्माण या खरीद तय समयसीमा के भीतर पूरा होना चाहिए।

इसके अलावा, धारा 80C के तहत होम लोन की मूल राशि के भुगतान पर सालाना 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है। हालांकि यह छूट 80C की कुल 1.5 लाख रुपये की सीमा के भीतर ही होती है, जिसमें PPF, EPF, ELSS, जीवन बीमा प्रीमियम और NSC जैसे निवेश भी शामिल होते हैं।

नया टैक्स सिस्टम

नए टैक्स रिजीम में टैक्स दरें तो कम हैं, लेकिन इसमें ज्यादातर टैक्स छूट और कटौतियां नहीं मिलतीं। नए रिजीम में आमतौर पर होम लोन के प्रिंसिपल भुगतान पर धारा 80C की छूट नहीं मिलती और खुद के रहने वाले घर के लिए ब्याज पर धारा 24(b) की 2 लाख रुपये वाली छूट भी उपलब्ध नहीं होती।

हालांकि, अगर किसी व्यक्ति ने घर किराए पर दिया हुआ है, तो नए टैक्स रिजीम में भी कुछ मामलों में ब्याज खर्च को हाउस प्रॉपर्टी की आय के खिलाफ एडजस्ट किया जा सकता है। इसलिए किराए वाली संपत्ति रखने वाले निवेशकों को अपना टैक्स कैलकुलेशन ध्यान से करना चाहिए।

कौन सा सिस्टम है बेहतर

कौन-सा टैक्स रिजीम चुनना बेहतर रहेगा, इसका कोई एक जवाब नहीं है। जिन लोगों के पास होम लोन, बीमा और अन्य टैक्स बचत निवेशों के जरिए अच्छी-खासी कटौतियां हैं, उनके लिए पुराना टैक्स रिजीम अधिक फायदेमंद हो सकता है। वहीं जिनके पास ज्यादा छूट या कटौतियां नहीं हैं, वे नए टैक्स रिजीम में कम टैक्स दे सकते हैं।

इसलिए ITR फाइल करने से पहले दोनों टैक्स रिजीम में अपनी टैक्स देनदारी की तुलना करना जरूरी है। इससे आप अपने लिए सबसे फायदेमंद विकल्प चुन सकेंगे और टैक्स की बेहतर बचत कर पाएंगे।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। कोई भी फैसला लेने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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