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  1. UPI पेमेंट पर MDR से किन पर पड़ेगा असर, क्या हर यूजर को देना होगा एक्स्ट्रा पैसा? वित्त मंत्री ने किया सब क्लियर

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UPI पेमेंट पर MDR से किन पर पड़ेगा असर, क्या हर यूजर को देना होगा एक्स्ट्रा पैसा? वित्त मंत्री ने किया सब क्लियर

Namita Shukla

4 min read | अपडेटेड August 07, 2026, 08:52 IST

सारांश

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मुद्दे पर स्थिति क्लियर करते हुए कहा है कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) ग्राहकों पर नहीं, बल्कि व्यापारियों (Merchants) पर लागू होता है।

यूपीआई पेमेंट

यूपीआई पर एमडीआर शुल्क व्यापारियों पर लगेगा, ग्राहकों पर नहींः सीतारमन (Photo: Shutterstock)

देश में UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के जरिए करोड़ों लोग रोजाना डिजिटल भुगतान करते हैं। ऐसे में हाल ही में सामने आई खबरों के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि क्या अब UPI से भुगतान करने पर कस्टमर्स को भी शुल्क देना पड़ेगा। इस बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मुद्दे पर स्थिति क्लियर करते हुए कहा है कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) ग्राहकों पर नहीं, बल्कि व्यापारियों (Merchants) पर लागू होता है। उन्होंने कहा कि आम ग्राहकों को UPI से भुगतान करने के लिए MDR नहीं देना पड़ता। यह शुल्क व्यापारियों से जुड़ा होता है और इसका उद्देश्य बैंकों और फिनटेक कंपनियों को डिजिटल भुगतान से जुड़ा बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, नई तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने में मदद करना है।

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MDR क्या होता है?

MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर व्यापारी से लिया जाता है। यह राशि बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और अन्य संबंधित संस्थानों के बीच बांटी जाती है। आमतौर पर ग्राहक इस शुल्क का भुगतान नहीं करते। वित्त मंत्री ने साफ कहा कि MDR का संबंध केवल व्यापारियों से है। इसलिए यह कहना गलत होगा कि UPI इस्तेमाल करने वाले आम लोगों पर सीधे कोई नया शुल्क लगाया जा रहा है।

अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ

निर्मला सीतारमण ने बताया कि UPI और डिजिटल भुगतान सेवाओं से जुड़े MDR पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। यह फैसला NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) की UPI एवं सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी करेगी। यानी फिलहाल UPI पर MDR लागू करने या उसमें बदलाव को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

सरकार बिल में क्या बदलाव करना चाहती है?

सरकार ने संसद में Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 पास किया है। इस विधेयक के जरिए सरकार Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10(A) में संशोधन करना चाहती है। इस संशोधन के बाद केंद्र सरकार को यह अधिकार मिला है कि वह अधिसूचना जारी कर यह तय कर सके कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों या लेनदेन पर शुल्क नहीं लगेगा और किन पर नियम बदले जा सकते हैं।

ध्यान देने वाली बात यह है कि यह विधेयक खुद MDR लागू नहीं करता और न ही किसी शुल्क की घोषणा करता है। यह केवल भविष्य में Zero MDR व्यवस्था में बदलाव करने का कानूनी आधार तैयार करता है।

क्यों वित्त मंत्री को देनी पड़ी सफाई?

कांग्रेस नेता जयराम ने आरोप लगाया था कि अगर MDR लागू होता है तो इसका बोझ आम लोगों पर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि UPI को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने का यही एकमात्र तरीका बताना सही नहीं है। इस पर जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जयराम रमेश को गलत जानकारी फैलाने से पहले तथ्यों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि MDR ग्राहकों पर नहीं बल्कि व्यापारियों पर लागू होता है और इससे मिलने वाली राशि का इस्तेमाल बैंक और फिनटेक कंपनियां डिजिटल भुगतान प्रणाली को अधिक सुरक्षित, मजबूत और आधुनिक बनाने में करेंगी। इसका फायदा सभी UPI उपयोगकर्ताओं को मिलेगा।

UPI यूजर्स को क्या करना चाहिए?

फिलहाल UPI इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार ने अभी तक UPI लेनदेन पर ग्राहकों से कोई शुल्क वसूलने का फैसला नहीं किया है। MDR को लेकर अंतिम निर्णय संसद में विधेयक पारित होने और उसके बाद संबंधित समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया जाएगा। यानी अभी के लिए UPI से भुगतान करने वाले आम उपभोक्ताओं के लिए कोई बदलाव नहीं हुआ है। आने वाले समय में यदि सरकार कोई नया नियम लागू करती है, तो उसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी।

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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