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ईरान-अमेरिका के लिए क्यों यह सप्ताह इतना अहम, क्या खत्म हो जाएगी 5-6 महीने से चल रही जंग?

Namita Shukla

4 min read | अपडेटेड August 06, 2026, 08:34 IST

सारांश

ईरान ने कहा है कि वह होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर ओमान के साथ एक समझौते का ड्राफ्ट तैयार करने के आखिरी राउंड में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इस हफ्ते किसी समझौते की घोषणा हो सकती है।

ईरान-अमेरिका

ईरान और अमेरिका के लिए यह सप्ताह बहुत अहम (Photo: Shutterstock)

ईरान और अमेरिका के बीच करीब 5-6 महीने से जारी संघर्ष खत्म हो सकता है। यह सप्ताह ईरान और अमेरिका के लिए ही नहीं बल्कि ग्लोबल इकॉनमी के लिए बहुत अहम होने वाला है। ईरान ने कहा है कि वह होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर ओमान के साथ एक समझौते का ड्राफ्ट तैयार करने के आखिरी राउंड में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इस सप्ताह किसी समझौते की घोषणा हो सकती है। अगर यह समझौता हो जाता है, तो इससे रणनीतिक रूप से अहम जलमार्ग फिर से खुल सकता है, ग्लोबल अर्थव्यवस्था पर दबाव कम हो सकता है और युद्ध को खत्म करने में मदद मिल सकती है।

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हालांकि, इस समझौते का दारोमदार इस बात पर हो सकता है कि अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटाए। ईरान ने कहा है कि वह होर्मुज स्ट्रेट पर कुछ हद तक अपना कंट्रोल बनाए रखना चाहता है और इसे युद्ध से पहले वाली स्थिति में वापस नहीं लाएगा, जब यह एक खुला अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग हुआ करता था।

इस क्षेत्र में व्यापक कूटनीतिक प्रयासों के बीच, ईरान और ओमान इस स्ट्रेट को लेकर द्विपक्षीय बातचीत कर रहे हैं, जिस पर दोनों का उत्तरी और दक्षिणी चैनलों के जरिए कंट्रोल है। ईरान ने बातचीत में काफी प्रगति की बात कही है और कहा है कि आने-जाने वाले दोनों तरह के जहाज ईरानी जलक्षेत्र से होकर गुजरेंगे।

इस प्रस्ताव पर अमेरिका की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई है। जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने का समझौता जल्द ही हो सकता है, वहीं अमेरिकी अधिकारियों ने बार-बार जोर देकर कहा है कि वे कभी भी इस बात के लिए सहमत नहीं होंगे कि एनर्जी सप्लाई के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग तक ईरान का कंट्रोल हो। इस बीच, ईरान ने खाड़ी देशों को चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका उसके क्षेत्र पर कोई नया हमला करता है, तो इसके जवाब में पूरे क्षेत्र में महत्वपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर जवाबी कार्रवाई की जाएगी। न्यूज ऑन एयर की खबर के मुताबिक पांच सूत्रों के अनुसार, तेहरान वाशिंगटन के सबसे करीबी क्षेत्रीय सहयोगियों को धमकाकर सैन्य कार्रवाई की कीमत बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

अमेरिका-ईरान के बीच इस साल अभी तक क्या-क्या हुआ?

28 फरवरी: 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' शुरू हुआ, जिसमें ईरान के मिलिट्री कमांड, एयर डिफेंस और लीडरशिप को निशाना बनाते हुए अमेरिका और इजराइल ने लगभग 900 संयुक्त हवाई हमले किए। इन हमलों में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई मारे गए।
1–7 मार्च: ईरान ने गठबंधन के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय ड्रोन और मिसाइल हमले करके जवाबी कार्रवाई की। इन घटनाओं में कुवैत में अमेरिकी सैनिकों की मौत वाला ड्रोन हमला और श्रीलंका के पास एक अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत को डुबोना शामिल था। अमेरिका में गैस पंप की कीमतें $3.98 प्रति गैलन से ऊपर चली गईं।
17 जून: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी अधिकारियों ने जिनेवा में पाकिस्तान की मध्यस्थता से एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसमें परमाणु गतिविधियों को कम करने के बदले नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने पर सहमति बनी।
7–8 जुलाई: ईरानी धरती पर अमेरिका के नए जवाबी हमलों के बाद यह नाजुक शांति खत्म हो गई, राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्धविराम के खत्म होने की घोषणा की, जिससे फिर से हवाई बमबारी शुरू हो गई।
जुलाई के आखिर में: मध्यस्थों द्वारा कराई गई लड़ाई में कुछ समय की शांति ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी, क्योंकि हूथी और मिलिशिया प्रॉक्सी ने क्षेत्रीय हमले जारी रखे और मध्य पूर्व के एनर्जी हब के पास स्थानीय स्तर पर तनाव बढ़ता रहा। अब एक बार फिर दोनों देशों के बीच बातचीत की चर्चा है, लेकिन इसका रिजल्ट कब तक आएगा, इसके बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है।

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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