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3 min read | अपडेटेड September 24, 2026, 14:15 IST
सारांश
IRDAI चाहता है कि Bima Sugam जल्द से जल्द पूरी तरह ऑपरेशनल हो और इस पर लाइफ के साथ-साथ जनरल इंश्योरेंस के भी कई तरह के प्रोडक्ट उपलब्ध हों। इसका मकसद ग्राहकों को एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म देना है, जहां उन्हें इंश्योरेंस खरीदने के लिए अलग-अलग जगहों पर जाने की जरूरत कम पड़े।

IRDAI ने भविष्य में ऐसे और डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने की संभावना भी रखी है।
भारतीय बीमा नियामक IRDAI ने इंश्योरेंस खरीदने की प्रक्रिया को आसान और डिजिटल बनाने के लिए डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया है। रेगुलेटर चाहता है कि ऐसे ज्यादा डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किए जाएं, जहां ग्राहक आसानी से अलग-अलग इंश्योरेंस प्रोडक्ट देख सकें, उनकी तुलना कर सकें और अपनी जरूरत के हिसाब से पॉलिसी खरीद सकें। इससे बीमा कंपनियों के बीच भी बराबरी का मुकाबला बढ़ाने की कोशिश है।
IRDAI ने अपने Consultation Paper on Distribution Reforms में Bima Sugam को इंश्योरेंस सेक्टर के Market Infrastructure Institution (MII) के तौर पर पहचानने का प्रस्ताव रखा है। Bima Sugam India Federation वह कंपनी है जो Bima Sugam डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार कर रही है। इसके शेयरहोल्डर्स में तीन को छोड़कर लगभग सभी बीमा कंपनियां शामिल हैं।
IRDAI चाहता है कि Bima Sugam जल्द से जल्द पूरी तरह ऑपरेशनल हो और इस पर लाइफ के साथ-साथ जनरल इंश्योरेंस के भी कई तरह के प्रोडक्ट उपलब्ध हों। इसका मकसद ग्राहकों को एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म देना है, जहां उन्हें इंश्योरेंस खरीदने के लिए अलग-अलग जगहों पर जाने की जरूरत कम पड़े।
IRDAI सिर्फ Bima Sugam तक सीमित नहीं रहना चाहता। रेगुलेटर ने भविष्य में ऐसे और डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने की संभावना भी रखी है। इन प्लेटफॉर्म का मकसद ग्राहकों को कम लागत में इंश्योरेंस उपलब्ध कराना और कंपनियों के बीच निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनाए रखना होगा।
प्रस्ताव के मुताबिक ऐसे प्लेटफॉर्म नॉट-फॉर-प्रॉफिट कंपनियों के रूप में काम करेंगे और इनमें कई बीमा कंपनियों की भागीदारी होगी। किसी MII को शुरू करने के लिए कम से कम 11 बीमा कंपनियों का साथ आना जरूरी होगा। किसी एक कंपनी को प्लेटफॉर्म पर इतना नियंत्रण नहीं दिया जाएगा कि वह अकेले फैसलों को प्रभावित कर सके।
जब कोई MII पूरी तरह ऑपरेशनल हो जाएगा, तब हर शेयरहोल्डर इंश्योरेंस कंपनी के पास उसके 10% से कम शेयर या वोटिंग राइट्स होने चाहिए। शुरुआत में किसी Lead Promoter को प्लेटफॉर्म खड़ा करने और चलाने के लिए अधिकतम 20% हिस्सेदारी रखने की अनुमति हो सकती है। हालांकि, यह हिस्सेदारी भी धीरे-धीरे घटानी होगी। पांच साल के भीतर इसे 15% और सात साल के भीतर 10% से नीचे लाना होगा।
IRDAI इन प्लेटफॉर्म को Preferred Distribution Status देने पर भी विचार कर रहा है। इसकी वजह यह है कि ये डिजिटल तरीके से कम लागत पर और निष्पक्ष तरीके से इंश्योरेंस खरीदने की सुविधा दे सकते हैं। हालांकि, इनका फीस स्ट्रक्चर पारदर्शी होना चाहिए और मौजूदा डिस्ट्रीब्यूशन कमीशन की तुलना में काफी कम रखा जाना प्रस्तावित है। साथ ही, सभी बीमा कंपनियों को बराबर मौका मिलना चाहिए। कंपनियां अपने प्रोडक्ट, कीमत, प्रदर्शन, क्लेम सर्विस और शिकायतों के समाधान जैसी चीजों के आधार पर मुकाबला करेंगी।
IRDAI ने Public Insurance Registry यानी PIR को भी एक अन्य MII के रूप में प्रस्तावित किया है। इसे एक राष्ट्रीय डिजिटल सिस्टम के तौर पर विकसित करने की योजना है। यह Bima Sugam जैसे ग्राहक-केंद्रित प्लेटफॉर्म को इंश्योरेंस से जुड़ी जानकारी खोजने, उसकी पुष्टि करने और अलग-अलग पक्षों के बीच साझा करने में मदद करेगा। IRDAI का बड़ा लक्ष्य इंश्योरेंस के पुराने मॉडल को बदलना है।
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