पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड September 24, 2026, 19:03 IST
सारांश
होम लोन की आखिरी ईएमआई चुकाने के बाद ग्राहकों को बैंक से प्रॉपर्टी के ओरिजिनल कागज वापस लेना बहुत जरूरी होता है। आरबीआई के नियम के मुताबिक लोन चुकता होने के 30 दिन के अंदर बैंक को प्रॉपर्टी के सभी दस्तावेज लौटाने होंगे। देरी होने पर बैंक को ग्राहक को रोजाना हर्जाना देना पड़ेगा।

होम लोन खत्म होने के बाद 30 दिन में ओरिजिनल प्रॉपर्टी के कागज लौटाना बैंकों के लिए अनिवार्य है।
अपने सपनों के घर के लिए लिया गया होम लोन जब पूरी तरह चुकता हो जाता है, तब हर किसी को बड़ा सुकून मिलता है। आखिरी EMI भरते ही लोग मान लेते हैं कि बैंक से उनका नाता खत्म हो गया है। लेकिन असल में काम यही खत्म नहीं होता है। लोन का पूरा पैसा देने के बाद भी एक सबसे जरूरी काम बचता है और वह है अपनी प्रॉपर्टी के असली कागज बैंक से सुरक्षित वापस पाना। अक्सर देखा गया है कि लोन चुकता होने के महीनों बाद तक बैंक ग्राहकों को उनके ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स नहीं देते हैं और लोग चक्कर काटते रहते हैं। इसी परेशानी को दूर करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने कड़े नियम लागू किए हैं।
आरबीआई के नए निर्देशों के मुताबिक केवल लोन का पेमेंट पूरा कर देना ही काफी नहीं है। रिजर्व बैंक ने बैंकों और फाइनेंशियल संस्थानों के लिए 30 दिनों की समय सीमा तय कर दी है। इसके तहत जैसे ही ग्राहक अपने होम लोन का पूरा पेमेंट कर देता है, बैंक को 30 दिनों के अंदर उसकी प्रॉपर्टी के सभी असली कागज लौटाने होंगे। इसके साथ ही प्रॉपर्टी पर बैंक का जो भी चार्ज दर्ज होता है, उसे भी सरकारी रजिस्ट्री से तुरंत हटाना होगा। यह नियम 1 दिसंबर 2023 से सभी कमर्शियल बैंकों और NBFC पर पूरी तरह लागू है। ग्राहकों को लोन के सेंक्शन लेटर में ही यह जानकारी दे दी जाती है कि लोन खत्म होने पर डॉक्यूमेंट्स किस ब्रांच या ऑफिस से मिलेंगे।
अगर कोई बैंक या NBFC तय 30 दिनों की डेडलाइन में प्रॉपर्टी के कागज नहीं लौटा पाता है, तो उसे ग्राहक को भारी पेनाल्टी देनी होगी। रिजर्व बैंक के साफ आदेश हैं कि 30 दिन की सीमा बीतने के बाद हर एक दिन की देरी के लिए बैंक को ग्राहक के खाते में 5,000 रुपये का मुआवजा जमा करना होगा। उदाहरण के लिए अगर बैंक 10 दिन लेट करता है, तो उसे 50,000 रुपये का पेनाल्टी अमाउंट चुकाना पड़ेगा। इसके अलावा बैंक को लिखित में यह भी बताना होगा कि आखिर पेपर्स लौटाने में देरी क्यों हुई है। यह व्यवस्था बैंकों की लेट-लतीफी पर रोक लगाती है और ग्राहकों को उनका हक दिलाती है।
कई मामलों में बैंक की कस्टडी में रखे प्रॉपर्टी के ओरिजिनल पेपर्स खो जाते हैं या नुकसान पहुंचता है। ऐसी स्थिति में पूरी जवाबदेही बैंक की ही तय की गई है। अगर बैंक से कागज गुम हो जाते हैं, तो बैंक को अपने खर्च पर ग्राहक के लिए डुप्लीकेट या सर्टिफाइड कॉपी बनवानी होगी। इस पूरी प्रक्रिया का एक भी पैसा ग्राहक से नहीं लिया जाएगा। हालांकि ऐसी किसी इमरजेंसी स्थिति में बैंक को डुप्लीकेट डॉक्यूमेंट्स तैयार करवाने के लिए 30 दिन का एक्स्ट्रा टाइम मिलता है, यानी कुल 60 दिनों का वक्त होता है। अगर 60 दिनों के बाद भी बैंक पेपर्स नहीं दे पाता है, तो 5,000 रुपये रोजाना का हर्जाना फिर से शुरू हो जाएगा।
अगर लोन का पूरा भुगतान होने के 30 दिन बाद भी आपको अपनी प्रॉपर्टी के पेपर्स नहीं मिलते हैं, तो आपको सही तरीका अपनाना चाहिए। सबसे पहले अपने बैंक में लिखित शिकायत दर्ज कराएं और लोन क्लोज होने का लिखित प्रूफ मांगें। अगर बैंक की तरफ से कोई रिस्पांस नहीं आता है, तो बैंक के ग्रीवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म में अपनी बात रखें। अगर वहां से भी कोई हल नहीं निकलता है, तो आप सीधे आरबीआई ओम्बड्समैन यानी बैंकिंग लोकपाल के पास अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अपनी शिकायत को मजबूत बनाने के लिए बैंक के साथ किए गए सभी बातचीत का लिखित रिकॉर्ड जरूर संभाल कर रखें।
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