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5 min read | अपडेटेड August 21, 2026, 14:37 IST
सारांश
शिवराज सिंह चौहान ने बिहार के लिए बड़ी आवासीय घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य के गरीब परिवारों के लिए 11 लाख 18 हजार 937 पक्के मकानों की मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही 13 हजार 427 करोड़ रुपये का अलॉट भी किया गया है।

दो साल में बिहार को 24.30 लाख मकानों की मंजूरी (Photo: Shutterstock)
पटना में प्रधानमंत्री आवास योजना के राज्यस्तरीय कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिहार को बड़ी सौगात दी। उन्होंने एक तरफ गरीब परिवारों के लिए 11 लाख 18 हजार 937 पक्के मकानों की मंजूरी और 13 हजार 427 करोड़ रुपये के अलॉट की घोषणा की। इसके अलावा बिहार के किसानों और महिलाओं के लिए भी कुछ अहम सौगातों का ऐलान किया गया है।
शिवराज सिंह चौहान ने बिहार के लिए बड़ी आवासीय घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य के गरीब परिवारों के लिए 11 लाख 18 हजार 937 पक्के मकानों की मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही 13 हजार 427 करोड़ रुपये का अलॉट भी किया गया है और इसका पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा। चौहान ने कहा कि यह सिर्फ मकान देने की योजना नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के जीवन में सम्मान और सुरक्षा जोड़ने का अभियान है। उन्होंने कहा कि जिनके पास पक्का घर होगा, उनके जीवन की परेशानियां काफी कम होंगी। सर्दी, गर्मी, बारिश और तूफान से बचाव के लिए घर सबसे पहली जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि पक्का मकान सिर्फ ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं होता, वह पूरे परिवार के सम्मान और आत्मविश्वास का प्रतीक होता है।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि बिहार को 24 लाख 30 हजार 327 मकानों की मंजूरी दी जा चुकी है। इन मकानों पर कुल 29 हजार 164 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा दिखाता है कि केंद्र सरकार गरीबों के लिए सिर्फ घोषणा नहीं करती, बल्कि जमीन पर काम करती है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में योजनाओं का पैसा पूरी पारदर्शिता के साथ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाया जा रहा है।
चौहान ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का जिक्र करते हुए कहा कि यह योजना अब बिहार में लागू की जाएगी। इससे किसानों को बाढ़, सूखा, बारिश या किसी भी प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान पर सुरक्षा मिलेगी। उन्होंने बताया कि अगर फसल खराब होती है, तो किसान को उसका मुआवजा मिलेगा। इससे खेती को लेकर अनिश्चितता कम होगी और किसान नुकसान की चिंता से थोड़ा मुक्त रह पाएगा। उन्होंने कहा कि किसान हमारे लिए भगवान के समान हैं और सरकार का कर्तव्य है कि उनकी फसल को सुरक्षा दी जाए। उन्होंने बिहार सरकार के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम किसानों के हित में बड़ा और दूरगामी साबित होगा। राज्य में लंबे समय से इस तरह की सुरक्षा की जरूरत महसूस की जा रही थी। अब फसल बीमा लागू होने से किसान पहले से ज्यादा भरोसे के साथ खेती कर सकेंगे।
शिवराज सिंह ने कहा कि बिहार में खेती सिर्फ उत्पादन का मामला नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की रोजी-रोटी का आधार है। ऐसे में फसल बीमा योजना का लागू होना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि किसान प्राकृतिक जोखिम से पूरी तरह असुरक्षित न रहें। चौहान ने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य मिलकर खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। फसल बीमा के साथ खरीद, समर्थन और तकनीक को भी मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान अगर मजबूत होगा, तो गांव मजबूत होगा और गांव मजबूत होगा, तो बिहार मजबूत होगा। इसलिए खेती से जुड़े हर फैसले को सिर्फ कागज पर नहीं, जमीन पर असर देने वाला होना चाहिए।
शिवराज सिंह चौहान ने महिलाओं के सशक्तिकरण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में लाखों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आगे बढ़ रही हैं। इनमें से बड़ी संख्या अब लखपति दीदी बन चुकी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की आमदनी बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि स्वरोजगार, समूह आधारित काम और बैंक से जुड़ाव के जरिए ग्रामीण महिलाएं नई पहचान बना रही हैं। चौहान ने कहा कि यह सिर्फ आर्थिक बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव भी है। उन्होंने यह भी कहा कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं, तो पूरे परिवार की स्थिति बदलती है। बिहार में यह अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इसे ग्रामीण विकास और महिला शक्ति के बीच मजबूत कड़ी बताया।
महिलाओं के लिए बाजार की तैयारी
चौहान ने कहा कि महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराना बहुत जरूरी है। इसी वजह से हर जिले में शी-मार्ट जैसी व्यवस्था बनाने की बात कही। इससे जीविका दीदियों और महिला समूहों के सामान को सही मंच मिलेगा। शिवराज सिंह ने कहा कि गांवों में बनी चीजें तभी सफल होंगी, जब उन्हें बेचने का रास्ता भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि महिला उद्यमिता को सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उत्पाद, पैकेजिंग और बिक्री- तीनों स्तर पर सहायता जरूरी है। उन्होंने भरोसा जताया कि इस तरह की व्यवस्था से महिलाओं की आय में बड़ा इजाफा होगा। गांव की महिलाएं जब अपने सामान को बाजार तक पहुंचाएंगी, तो उनकी आत्मनिर्भरता और मजबूत होगी। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
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