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  1. SIP मिस हुई तो लगेगा जुर्माना! कंपाउंडिंग पर भी पड़ता है असर, जानिए बचने के आसान तरीके

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SIP मिस हुई तो लगेगा जुर्माना! कंपाउंडिंग पर भी पड़ता है असर, जानिए बचने के आसान तरीके

Upstox

3 min read | अपडेटेड April 17, 2026, 17:13 IST

सारांश

SIP: सिर्फ पेनल्टी ही नुकसान नहीं है। बार-बार SIP मिस होने से आपकी लॉन्ग-टर्म कंपाउंडिंग पर भी असर पड़ता है। खासकर इक्विटी म्यूचुअल फंड में नियमित निवेश बहुत जरूरी होता है, और अगर आप किस्तें मिस करते हैं, तो आपका वेल्थ क्रिएशन धीमा पड़ जाता है।

SIP

भारत में ज्यादातर SIP एक ऑटो-डेबिट सिस्टम से चलती हैं।

सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान यानी SIP आज के समय में निवेश का बेहद पॉपुलर तरीका है। इसमें नियमित अंतराल पर आपके अकाउंट से पैसे कट जाते हैं। निवेश में अनुशासन और नियमितता लाने के लिहाज से यह तरीका काफी बेहतर माना जाता है। हालांकि कई बार लापरवाही या अकाउंट में पैसे कम होने की वजह से आपकी SIP की किश्त समय पर नहीं कटती। इसका असर सिर्फ उस महीने के निवेश पर नहीं, बल्कि आपकी पूरी फाइनेंशियल प्लानिंग पर पड़ सकता है। आइए समझते हैं कैसे।

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SIP की किश्त मिस होने पर क्या होता है?

भारत में ज्यादातर SIP एक ऑटो-डेबिट सिस्टम से चलती हैं। इसके जरिए म्यूचुअल फंड कंपनियां (AMC) आपके बैंक अकाउंट से तय तारीख पर अपने आप पैसे काट लेती हैं। यह सिस्टम आसान तो है, लेकिन अगर खाते में पैसे कम हों, तो समस्या शुरू होती है। इस स्थिति में बैंक अपने कस्टमर्स से जुर्माना वसूलता है।

कितना लगता है जुर्माना

अगर SIP की किश्त खाते में बैलेंस कम होने की वजह से फेल हो जाती है, तो बैंक हर बार ₹250 से ₹750 तक का चार्ज लगा सकते हैं, और इस पर 18% GST भी लगता है। यह चार्ज हर फेल ट्रांजैक्शन पर लगता है, यानी अगर एक दिन में कई SIP फेल होती हैं, तो हर एक पर अलग-अलग पेनल्टी लगेगी।

कंपाउंडिंग पर भी पड़ता है असर

सिर्फ पेनल्टी ही नुकसान नहीं है। बार-बार SIP मिस होने से आपकी लॉन्ग-टर्म कंपाउंडिंग पर भी असर पड़ता है। खासकर इक्विटी म्यूचुअल फंड में नियमित निवेश बहुत जरूरी होता है, और अगर आप किस्तें मिस करते हैं, तो आपका वेल्थ क्रिएशन धीमा पड़ जाता है।

इन बातों का रखें ध्यान

इस समस्या से बचने के लिए कुछ आसान उपाय हैं। सबसे जरूरी है कि अपने बैंक अकाउंट में हमेशा थोड़ा एक्स्ट्रा बैलेंस रखें, खासकर अगर कई SIP एक साथ कटती हैं। कोशिश करें कि SIP की तारीखें अलग-अलग रखें, ताकि एक ही दिन ज्यादा पैसा न कटे। इसके अलावा, डेबिट डेट से पहले रिमाइंडर सेट करना भी मददगार होता है।

एक और जरूरी बात यह है कि NACH मैंडेट की लिमिट थोड़ी ज्यादा सेट करें। इससे आप भविष्य में SIP की रकम बढ़ा सकते हैं, बिना बार-बार नया मैंडेट बनाए। SIP मिस होना छोटा मुद्दा नहीं है। यह आपकी जेब पर तुरंत असर डालता है और लंबे समय में आपके रिटर्न को भी नुकसान पहुंचाता है। इसलिए थोड़ी सी प्लानिंग और ध्यान रखकर आप इन बेवजह के खर्चों से बच सकते हैं।

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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