पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड May 19, 2026, 15:00 IST
सारांश
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक पत्र को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है। इस वायरल पत्र में दावा किया जा रहा था कि ईपीएस-95 योजना के तहत न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 7500 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। ईपीएफओ ने साफ किया है कि यह पत्र पूरी तरह फर्जी है।

ईपीएफओ ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे न्यूनतम ईपीएस पेंशन वृद्धि के पत्र को फर्जी घोषित किया। | Image: Shutterstock.
सोशल मीडिया और इंटरनेट के इस दौर में कई बार भ्रामक और झूठी खबरें बहुत तेजी से फैलने लगती हैं, जिससे आम जनता और खास तौर पर पेंशनधारक बड़ी उलझन में पड़ जाते हैं। ऐसा ही एक मामला कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ से जुड़ा हुआ सामने आया है। सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से ईपीएस-95 योजना के तहत न्यूनतम पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी किए जाने का एक लेटर बहुत तेजी से प्रसारित किया जा रहा है। इस लेटर के सामने आने के बाद पेंशनधारकों के बीच खुशी और असमंजस का माहौल बन गया था। लेकिन अब इस पूरे मामले पर ईपीएफओ ने खुद सामने आकर सच्चाई बताई है और एक बड़ा अलर्ट जारी किया है। ईपीएफओ ने स्पष्ट कर दिया है कि न्यूनतम ईपीएस पेंशन में वृद्धि से संबंधित जो लेटर लगातार प्रसारित किया जा रहा है, वह पूरी तरह से फर्जी और नकली है।
सोशल मीडिया पर जो लेटर वायरल हो रहा है, उसे देखने पर वह बिल्कुल असली सरकारी दस्तावेज की तरह दिखाई देता है। इस लेटर पर भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय का नाम लिखा हुआ है और इसका पता श्रम शक्ति भवन, रफी मार्ग, नई दिल्ली दर्शाया गया है। लेटर का विषय ईपीएस-95 योजना के तहत न्यूनतम पेंशन में वृद्धि के संबंध में अधिसूचना बताया गया है। इस फर्जी लेटर में यह झूठा दावा किया गया है कि ईपीएस-95 योजना, 1995 द्वारा प्रदत्त सुविधाओं का उपयोग कर रहे पेंशनधारकों के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद न्यूनतम पेंशन राशि को बढ़ा दिया गया है। लेटर के अनुसार, संशोधित न्यूनतम मासिक पेंशन को बढ़ाकर 7500 रुपये प्रति माह किया जा रहा है, जो कि 30 अप्रैल 2026 से तुरंत प्रभावी माना जाएगा। इतना ही नहीं, इस फर्जी चिट्ठी में यह भी लिखा गया है कि संशोधित बढ़ी हुई पेंशन राशि का वितरण सभी पात्र पेंशनधारकों को 1 मई 2026 से शुरू कर दिया जाएगा।
जालसाजों ने इस फर्जी लेटर को असली रूप देने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए हैं। इस लेटर के नीचे बाईं तरफ श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार की एक गोल मोहर भी लगाई गई है, जिस पर नई दिल्ली लिखा हुआ है। इसके अलावा दाईं तरफ एक फर्जी दस्तखत किए गए हैं और उसके नीचे अवर सचिव, भारत सरकार, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय लिखा हुआ है। लेटर के सबसे नीचे एक बड़े बॉक्स में अप्रूव्ड यानी स्वीकृत होने का मार्क भी लगाया गया है, ताकि लोग इस पर आसानी से भरोसा कर लें। लेटर में सभी संबंधित विभागों और पेंशन हस्तांतरण एजेंसियों को तुरंत और समय पर इस कार्य-उन्नयन को सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। यह पूरी बनावट इस तरह की गई है कि कोई भी आम इंसान पहली नजर में इसे सच मान बैठे।
जब यह फर्जी लेटर बहुत ज्यादा वायरल होने लगा और लोग इसके बारे में पूछताछ करने लगे, तो ईपीएफओ ने तुरंत एक्शन लिया। ईपीएफओ ने अपने आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स पर इस लेटर की फोटो जारी करते हुए इसके ऊपर लाल रंग से बड़ा-बड़ा फर्जी और फेक लिख दिया है। ईपीएफओ ने साफ शब्दों में देश के सभी हितधारकों और पेंशनधारकों को सूचित किया है कि सरकार की तरफ से ऐसा कोई भी आदेश या अधिसूचना जारी नहीं की गई है। यह पूरी तरह से एक धोखाधड़ी का प्रयास है, जिसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। श्रम मंत्रालय और ईपीएफओ ने इस तरह के किसी भी लेटर को जारी करने की बात से साफ इनकार किया है।
ईपीएफओ ने इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए सभी पेंशनधारकों से अपील की है कि वे इस तरह के किसी भी अनधिकृत और भ्रामक लेटर पर बिल्कुल भी विश्वास न करें। ऐसी झूठी खबरें केवल लोगों को गुमराह करने और बाजार में भ्रम फैलाने के लिए प्रसारित की जाती हैं। ईपीएफओ ने कहा है कि पेंशन से जुड़ी किसी भी तरह की आधिकारिक जानकारी या बदलावों को जानने के लिए केवल ईपीएफओ की आधिकारिक वेबसाइट या उनके वेरिफाइड सोशल मीडिया हैंडल पर दी गई सूचनाओं को ही सही माना जाए। इस फर्जी लेटर के बहकावे में आकर किसी भी तरह के भ्रम का शिकार होने से बचें।
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