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4 min read | अपडेटेड October 07, 2026, 15:00 IST
सारांश
KVP सेविंग अकाउंट की तरह नहीं है, जिसमें जरूरत पड़ने पर कभी भी पैसा निकाल लिया जाए। India Post के मुताबिक, सामान्य तौर पर KVP को 2 साल और 6 महीने के बाद प्रीमैच्योरली भुनाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए स्कीम की शर्तें लागू होती हैं।

मैच्योरिटी से पहले KVP बंद करने पर आपको मैच्योरिटी वैल्यू नहीं मिलेगी।
किसान विकास पत्र यानी KVP को लंबे समय की सेविंग के लिए बनाया गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पैसा हर परिस्थिति में मैच्योरिटी तक पूरी तरह लॉक रहता है। KVP अकाउंट को एक पोस्ट ऑफिस से दूसरे पोस्ट ऑफिस में ट्रांसफर किया जा सकता है। कुछ खास परिस्थितियों में इसे किसी दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर या सिक्योरिटी के तौर पर गिरवी भी रखा जा सकता है। मैच्योरिटी से पहले इसे बंद करने यानी प्रीमैच्योर क्लोजर की सुविधा भी है, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें लागू होती हैं।
1 अप्रैल 2026 से खोले गए KVP अकाउंट पर अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए ब्याज दर 7.5 फीसदी है। इस दर पर KVP की मैच्योरिटी अवधि 115 महीने यानी 9 साल और 7 महीने है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि KVP खोलते समय जो ब्याज दर लागू होती है, उसी के आधार पर उसकी मैच्योरिटी अवधि तय होती है।
अगर आप सिर्फ अपना KVP एक पोस्ट ऑफिस से दूसरे पोस्ट ऑफिस में ले जाना चाहते हैं, तो ऐसा किया जा सकता है। इसे अकाउंट ऑफिस ट्रांसफर कहा जाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि KVP के मालिक की जानकारी बदल गई है। यानी अकाउंट दूसरे पोस्ट ऑफिस में चला जाएगा, लेकिन निवेश का मालिक वही व्यक्ति रहेगा।
KVP के मालिकाना हक को किसी दूसरे व्यक्ति के नाम बदलना सामान्य तरीके से संभव नहीं है। नियमों के तहत कुछ खास परिस्थितियों में ही ऐसा किया जा सकता है। इनमें अकाउंट होल्डर की मृत्यु, कोर्ट का आदेश और किसी सिक्योरिटी के तौर पर किए गए ट्रांसफर जैसी स्थितियां शामिल हैं।
अगर KVP जॉइंट अकाउंट में है और किसी एक होल्डर की मृत्यु हो जाती है, तो नियमों के अनुसार अकाउंट बाकी बचे होल्डर या होल्डर्स के नाम जारी रह सकता है। इसलिए KVP को बैंक अकाउंट की तरह किसी दोस्त या रिश्तेदार को अपनी मर्जी से गिफ्ट करना संभव नहीं है।
KVP को कुछ परिस्थितियों में किसी दायित्व के बदले सिक्योरिटी के तौर पर गिरवी रखा जा सकता है। इसके लिए निर्धारित संस्थाओं के पक्ष में KVP ट्रांसफर किया जा सकता है। इनमें RBI, शेड्यूल्ड बैंक, को-ऑपरेटिव सोसाइटी या बैंक, कुछ सरकारी कंपनियां, स्थानीय प्राधिकरण और पात्र हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां शामिल हैं। इसके लिए आवेदन और संबंधित संस्था की स्वीकृति जरूरी होती है। KVP के रिकॉर्ड और सर्टिफिकेट पर भी इसकी जानकारी दर्ज की जाती है।
KVP सेविंग अकाउंट की तरह नहीं है, जिसमें जरूरत पड़ने पर कभी भी पैसा निकाल लिया जाए। India Post के मुताबिक, सामान्य तौर पर KVP को 2 साल और 6 महीने के बाद प्रीमैच्योरली भुनाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए स्कीम की शर्तें लागू होती हैं। KVP नियमों में अकाउंट होल्डर की मृत्यु, पात्र प्लेजी द्वारा सिक्योरिटी जब्त किए जाने और कोर्ट के आदेश जैसी परिस्थितियों में भी प्रीमैच्योर क्लोजर का प्रावधान है।
मैच्योरिटी से पहले KVP बंद करने पर आपको मैच्योरिटी वैल्यू नहीं मिलेगी। जरूरत पड़ने पर जल्दी पैसा निकालने से मिलने वाली रकम मैच्योरिटी वैल्यू से काफी कम हो सकती है। इसलिए KVP में निवेश करने से पहले उसकी मैच्योरिटी अवधि और प्रीमैच्योर क्लोजर के नियम समझना जरूरी है। अगर आपको बीच में पैसों की जरूरत पड़ सकती है, तो KVP को तुरंत उपलब्ध होने वाली नकदी के बजाय लंबे समय की सेविंग के तौर पर देखना बेहतर है।
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